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Kerala: राज्यपाल आरिफ खान का बड़ा बयान, बोले- ड्रग्स की राजधानी के रूप में पंजाब की जगह ले रहा केरल
Sat, 22 Oct 2022 06:10 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 22 Oct 2022 06:10 PM IST
सार
राज्यपाल ने कहा, यहां हमने तय किया है कि लॉटरी और शराब हमारे विकास के लिए काफी हैं। राज्य के क्या शर्मनाक स्थिति है जहां सौ फीसदी साक्षरता है। राज्य के मुखिया के रूप में मुझे शर्म आती है कि मेरे राजस्व के दो मुख्य स्त्रोत लॉटरी और शराब हैं।
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केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान
- फोटो : पीटीआई (फाइल फोटो)
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विस्तार
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शनिवार को कहा कि केरल ड्रग्स की राजधानी के रूप में पंजाब की जगह ले रहा है। खान ने यह भी कहा कि राज्य के मुखिया के रूप में उन्हें शर्म आती है क्योंकि उनके राजस्व के दो ही मुख्य स्त्रोत हैं-लॉटरी और शराब।
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विश्वविद्यालयों में नियुक्ति समेत विभिन्न मुद्दों पर सत्तारूढ़ वाम सरकार के साथ कड़वाहट के बीच खान ने कहा कि जहां सभी जगह शराब के सेवन के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, वहीं केरल में इसके सेवन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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राज्यपाल ने कहा, यहां हमने तय किया है कि लॉटरी और शराब हमारे विकास के लिए काफी हैं। राज्य के क्या शर्मनाक स्थिति है जहां सौ फीसदी साक्षरता है। राज्य के मुखिया के रूप में मुझे शर्म आती है कि मेरे राजस्व के दो मुख्य स्त्रोत लॉटरी और शराब हैं। लॉटरी क्या है? आप यहां बैठे हैं, क्या आपमें से किसी ने भी लॉटरी टिकट खरीदा है। केवल गरीब लोग ही लॉटरी टिकट खरीदते हैं। आप उन्हें लूट रहे हैं। आप अपने ही लोगों को शराब का आदी बना रहे हैं।
खान यहां एक किताब के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि केरल ड्रग्स की राजधानी के रूप में पंजाब की जगह ले रहा है, क्योंकि राज्य शराब की बिक्री को बढ़ावा दे रहा है। राज्यपाल ने यह भी कहा, हर कोई शराब के सेवन के खिलाफ अभियान चला रहा है। यहां शराब के सेवन को बढ़ावा दिया जा रहा है। क्या शर्म की बात है।
राज्यपाल ने आज फिर केरल के विभिन्न विश्वविद्यालयों मं कुलपतियों की नियुक्ति का मुद्दा उठाया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि कुलपतियों की नियुक्ति राज्य राज्यपाल की की जिम्मेदारी है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है और अगर सरकार कोई कानून पारित करती है, तो वह विश्वविद्यालय अनुदान आयो (यूजीसी) के नियमों के प्रावधानों के अनुसार होना चाहिए।
उन्होंने केरल के उन मंत्रियों पर भी निशाना साधा जिन्होंने उनके अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया और कहा कि राज्य के एक मंत्री ने पूछा था कि क्या उत्तर प्रदेश का कोई राज्यपाल केरल की शिक्षा प्रणाली को समझ सकता है।
राज्यपाल ने कहा, कल सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के माननीय जजों के बारे में वहीं टिप्पणी न कर दें, क्योंकि कल उन्होंने केरल तकनीकी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर की नियुक्ति के खिलाफ फैसला दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम में एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर की नियुक्ति को यूजीसी के नियमों के विपरीत करार दिया था।