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Sabarimala: केरल के मंत्री बोले- सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर हमारा रुख 2007 जैसा, भाजपा पर लगाया यह आरोप

Sat, 14 Mar 2026 01:42 PM IST
Asmita Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Asmita Tripathi Updated Sat, 14 Mar 2026 01:42 PM IST
सार

केरल के मंत्री ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के लिए भाजपा को दोषी ठहराया। इसके साथ ही उन्होनें एलडीएफ सरकार का वर्तमान रुख  2007 वाला बताया। 

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Kerala minister says our stand on women's entry into Sabarimala is similar to that of 2007 blames BJP
वीएन वासवन, केरल के देवस्वोम मंत्री - फोटो : X / @vn_vasavan

विस्तार

केरल के देवस्वम मंत्री वीएन वासवन ने शनिवार को सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने वाले 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के लिए भाजपा को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि एलडीएफ सरकार का वर्तमान रुख वही है, जो 2007 में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दायर हलफनामे में था। वह सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से दायर हलफनामे के संबंध में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे, जिसमें मासिक धर्म वाली उम्र की महिलाओं के पहाड़ी मंदिर में प्रवेश के संबंध में सरकार की स्थिति स्पष्ट की जानी थी। उन्होंने कहा कि 2018 का फैसला भाजपा से जुड़ी महिला वकीलों द्वारा सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के बाद आया था।

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सरकार अभी क्या रुख है? 

उन्होंने कहा, "हमने 2007 में एक हलफनामा दायर किया था जिसमें कहा गया था कि इस मुद्दे का फैसला धार्मिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञों को करना चाहिए। हम अभी भी उसी रुख पर कायम हैं।" उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल महिलाओं के प्रवेश पर राज्य सरकार का रुख नहीं मांगा है, बल्कि कुछ संवैधानिक मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा है। मंत्री ने कहा, "हमने सर्वोच्च न्यायालय के एडवोकेट जनरल और संवैधानिक विशेषज्ञों को जवाब देने के लिए नियुक्त किया है।" उन्होंने आगे कहा कि यदि अदालत इस मामले पर राज्य सरकार का रुख जानना चाहेगी तो उसे प्रस्तुत किया जाएगा। यह भी बताया कि एलडीएफ सरकार ने 2007 में दायर हलफनामे में पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा, "पार्टी (माकपा) का रुख सरकार के रुख के समान है। सरकार भक्तों के साथ है। हम हमेशा से भक्तों के साथ रहे हैं।"

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कुछ कह सकते हैं?

उन्होंने पूछा, "वे कई मामलों में अदालत जाते हैं और हर बार उन्हें प्रतिकूल जवाब मिलते हैं। क्या केरल में कोई ऐसा विपक्ष रहा है जिसे अदालतों से इतने झटके लगे हों?" जब उनसे सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद 2018 में राज्य सरकार की कार्रवाई के बारे में पूछा गया, जिसमें सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला में प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी, तो उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई व्याख्या नहीं की जानी चाहिए क्योंकि सरकार ने 2007 के हलफनामे में पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा, "अगर सुप्रीम कोर्ट कोई फैसला देता है, तो क्या हम उसके खिलाफ कुछ कह सकते हैं? महिलाओं के प्रवेश का फैसला देश की सर्वोच्च अदालत का था।"

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भाजपा ने अपना रुख बदला?
उन्होंने कहा, "वे अब छिप रहे हैं। दरअसल, वे इसके पक्ष में खड़े थे। लेकिन यहां वे एक अलग रुख अपना रहे हैं।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि 2018 में महिलाओं के प्रवेश को सुगम बनाने के प्रयास भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए थे। उन्होंने दावा किया, "भाजपा के युवा वकीलों ने ही यह मुकदमा दायर किया था। फैसला उन्हीं के पक्ष में आया था। तब उन्होंने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया था। लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने अपना रुख बदल लिया।"

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में मासिक धर्म की उम्र वाली महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दी थी, जिसके बाद केरल में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट पहले के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर विचार कर रहा है।

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