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लव-जिहाद मामला: शाह और योगी के जिक्र से सुप्रीम कोर्ट नाराज, सुनवाई 30 तक टली

Tue, 10 Oct 2017 09:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 10 Oct 2017 09:29 AM IST
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Kerala love jihad case, supreme court adjourns hearing till 30 october
सुप्रीम कोर्ट

केरल के लव-जिहाद मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के केरल दौरे का मसला उठाया गया। वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले को राजनीतिक रूप देने में लगी हुई है।

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हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दवे की इस बयान पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि हमें इस बात से कोई लेना देना नहीं है। शीर्ष अदालत ने यह कहते हुए सुनवाई 30 अक्टूबर तक के लिए टाल दी कि हम इस मसले पर कानूनी पक्ष ही सुनेंगे।
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता मुस्लिम युवक सफीन जहां (हादिया का पति) की ओर से पेश दुष्यंत दवे ने कहा कि केरल जनरक्षा यात्रा के दौरान अमित शाह और योगी आदित्यनाथ ने लव-जेहाद के मसले को भुनने की कोशिश की।
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पढ़ें: केरल में बोले योगी- ‘जिहादी आतंकवाद’ को बढ़ावा देती है राज्य सरकार

दवे के इस बयान पर पीठ ने आपत्ति जताते हुए कहा कि हम राजनीतिक दलों या नेताओं के बयानों में नहीं पड़ना चाहते हैं। पीठ के बार-बार आग्रह करने के बावजूद दवे यह कहते रहे कि सुप्रीम कोर्ट आखिर इस बात को कैसे नजरअंदाज कर सकती है। उन्होंने कहा कि वह पीठ की जानकारी में यह बात लाना चाहती है कि सरकार किस तरह पूरे मसले का राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश कर रही है।

वयस्क बेटी की कस्टडी पिता को नहीं दी जा सकती

Kerala love jihad case, supreme court adjourns hearing till 30 october

​दवे की दलीलों से नाराज हुई पीठ ने कहा कि वह इस मसले पर सोमवार को सुनवाई नहीं करेगी। पीठ ने दवे को यहां तक कहा कि आप अपना केस खुद की खराब कर रहे हैं। पीठ 30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में सिर्फ कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने एक बार फिर यह दोहराया कि वयस्क बेटी की पिता को कस्टडी नहीं दी जा सकती। चीफ जस्टिस ने कहा कि कानूनी सिद्धांत यह है कि जब दो वयस्क शादी करते हैं तो अदालत इसमें दखल नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि बेटी की कस्टडी पिता को तब दी जा सकती है जब वह मानसिक रूप से विकलांग हो या उसकी मन:स्थिति ठीक न हो।

चीफ जस्टिस ने सोमवार को इस ओर भी इशारा किया कि याचिकाकर्ता की पत्नी हादिया को इस मसले पर उसकी राय जानने के लिए बुलाया जा सकता है। पीठ ने एक बार फिर कहा कि आखिर रिट याचिका पर हाईकोर्ट शादी को कैसे निरस्त कर सकता है। मालूम हो कि याचिकाकर्ता सफीन जहां ने हिंदू युवती (हादिया) का धर्म परिवर्तन करा उससे शादी थी। दोनों की शादी को केरल हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है।

16 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी थी। एनआईए की यह जांच सुप्रीम कोर्ट केपूर्व जर्ज आरवी रविंद्रन की निगरानी में हो रही है। पीठ ने केरल सरकार की इस रिपोर्ट पर भी गौर किया जिसमें कहा गया कि केरल पुलिस की जांच में ऐसा कुछ नहीं पाया गया है जिससे कि इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए।

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