फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Kerala High Court says No Media and Government Agency Can Peep Into Citizens Lives

केरल हाईकोर्ट: टीवी चैनल हों या सरकारी एजेंसी, किसी के निजी जीवन में अकारण नहीं झांक सकते

Tue, 21 Mar 2023 05:40 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, कोच्चि।
एजेंसी, कोच्चि। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 21 Mar 2023 05:40 AM IST
सार

जस्टिस वीजी अरुण ने कहा कि यह देखकर हताशा होती है कि कुछ चैनल समाचार दिखाने के बजाए अपने पेशे में अनैतिक व्यवहार करते हुए फूहड़ता दिखा रहे हैं। हो सकता है समाज का एक तबका ऐसी सनसनी और गंदी खबरें देखता हो।

विज्ञापन
Kerala High Court says No Media and Government Agency Can Peep Into Citizens Lives
केरल उच्च न्यायालय। - फोटो : पीटीआई

विस्तार

मीडिया हो या सरकारी एजेंसियां, नागरिकों के निजी जीवन में बिना वैध कारण झांकने का अधिकार किसी को भी नहीं है। यह टिप्पणी केरल हाईकोर्ट ने एक टीवी चैनल के दो कर्मचारियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए की। कोर्ट ने कहा, मीडियाकर्मी सच व न्याय के 'तथाकथित धर्मयुद्ध' या किसी से बदला लेने के बहाने आम नागरिकों के निजता के अधिकार से नहीं टकरा सकते।

विज्ञापन


जस्टिस वीजी अरुण ने कहा कि यह देखकर हताशा होती है कि कुछ चैनल समाचार दिखाने के बजाए अपने पेशे में अनैतिक व्यवहार करते हुए फूहड़ता दिखा रहे हैं। हो सकता है समाज का एक तबका ऐसी सनसनी और गंदी खबरें देखता हो। ऐसे समाचारों को रोकने की कोई व्यवस्था न होने पर खुद समाचार चैनलों को अपने भीतर झांकना चाहिए। तभी वे देख सकेंगे कि कुछ लोगों की गतिविधियों की वजह से लोकतंत्र के चौथे खंभे में लोगों का विश्वास कैसे कम हो रहा है।
विज्ञापन


यह था मामला
ऑनलाइन चैनल पर एक महिला को अपमानित करती खबर जारी करने के लिए इसके मालिक व एक कर्मचारी पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं, आईटी अधिनियम और एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत केस दर्ज हुए थे। महिला खुद भी मीडिया चैनल में काम करती थी। उसका आरोप था कि मीडियाकर्मियों ने उसे जबरन नग्न कर वीडियो बनाए। वे इनमें कुछ बदलाव करके राज्य की एक महिला मंत्री के फर्जी वीडियो बनाना चाहते थे। चैनल मालिक की गिरफ्तारी के बाद भी यह अपमानजनक वीडियो समाचारों के रूप में जारी किए गए। आरोपी जानते थे कि महिला अनुसूचित जनजाति से है, इसलिए उन पर अत्याचार निवारण अधिनियम में भी केस दर्ज हुआ।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed