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केरल: 'गैर शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की जगह शिक्षा के अधिकार को प्राथमिकता दें'; हाईकोर्ट की टिप्पणी

Fri, 24 Nov 2023 10:43 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Fri, 24 Nov 2023 10:43 PM IST
सार

जस्टिस रामचंद्रन ने कहा कि मैं यह आदेश देता हूं क्योंकि शिक्षा का अधिकार एक सांविधानिक रूप से संरक्षित अधिकार है, जो प्रत्येक छात्र और बच्चे को उनके वर्ग, पंथ या स्थिति के बावजूद सुनिश्चित करता है। यह शैक्षिक अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे इसकी रक्षा करें, न कि उन्हें ऐसी गतिविधियों में प्रोत्साहित करें जो गैर-शैक्षणिक हैं।

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Kerala High Court: Give priority to the right to education instead of promoting non-educational activities
कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केरल हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार को लेकर अपने एक फैसले में बड़ी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा है कि शैक्षिक अधिकारियों को गैर शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के बजाय शिक्षा के अधिकार की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। जस्टिस देवन रामचंद्रन ने यह भी कहा कि संविधान किसी की भी पृष्ठभूमि को देखे बिना प्रत्येक छात्र के शिक्षा के अधिकार कर रक्षा करता है।

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दरअसल, हाईकोर्ट सरकार के उस आदेश को लेकर सुनवाई कर रहा था जिसमें राज्य के शैक्षिक अधिकारियों को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके मंत्रिमंडल के नेतृत्व में राज्य में होने वाले नव केरल सदन के लिए स्कूली छात्रों को भेजने से रोक दिया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस देवन रामचंद्रन ने अपने आदेश में कहा कि कहने की जरूरत नहीं है, स्कूलों के हेड मास्टर्स/प्रधानाचार्यों को चेतावनी दी जाती है कि वे इस मामले में किसी भी आधिकारिक उत्तरदाता के निर्देश पर अपने किसी भी छात्र/पाल्य को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल न करें जो शैक्षिक पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है।
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जस्टिस रामचंद्रन ने कहा कि मैं यह आदेश देता हूं क्योंकि शिक्षा का अधिकार एक सांविधानिक रूप से संरक्षित अधिकार है, जो प्रत्येक छात्र और बच्चे को उनके वर्ग, पंथ या स्थिति के बावजूद सुनिश्चित करता है। यह शैक्षिक अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे इसकी रक्षा करें, न कि उन्हें ऐसी गतिविधियों में प्रोत्साहित करें जो गैर-शैक्षणिक हैं। मामले के सुनवाई के लिए आने पर सरकार ने अदालत को बताया कि केरल के किसी भी जिले में किसी भी बच्चे को किसी भी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मजबूर या प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा।

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