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Kerala: 'सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए धोखाधड़ी के कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता,' हाईकोर्ट की टिप्पणी

Tue, 10 Oct 2023 10:43 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 10 Oct 2023 10:43 PM IST
सार

Kerala: उच्च न्यायालय ने कहा कि सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए धोखाधड़ी के तरीकों को अदालत द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। आरोपियों ने देश के एक प्रमुख संगठन की चयन प्रक्रिया में हेरफेर करके सभी हितधारकों को धोखा दिया।

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Kerala High Court: 'Acts of fraud to get government job cannot be tolerated'
केरल उच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केरल उच्च न्यायालय ने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में तकनीकी पदों के लिए कर्मचारियों की भर्ती परीक्षा में एक अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए धोखाधड़ी के तरीकों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

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न्यायमूर्ति मोहम्मद नियाज सी.पी. ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा में धोखाधड़ी के तरीके अपनाने वालों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता (आरोपी अमित) द्वारा किया गया कथित अपराध वीएसएससी जैसे सामरिक संगठन की परीक्षा में धांधली कर रोजगार पाने की कोशिश करने का एक बहुत ही गंभीर अपराध है।

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दालत ने कहा कि इस तरह के कृत्य परीक्षा देने वाले सभी अभ्यर्थियों, संगठन और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं। सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए धोखाधड़ी के तरीकों को अदालत द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोपियों ने देश के एक प्रमुख संगठन की चयन प्रक्रिया में हेरफेर करके सभी हितधारकों को धोखा दिया।

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उच्च न्यायालय ने कहा, 'इसके अलावा, इस मामले में शामिल सभी आरोपियों की पहचान की जानी है और उन्हें पकड़ा जाना है, इसलिए पहले आरोपी (अमित) को जमानत देने से निश्चित रूप से जांच में बाधा आएगी।' 

न्यायमूर्ति मोहम्मद नियाज ने कहा, ‘मैं अभियोजन पक्ष द्वारा उठाई गई आशंका पर भी ध्यान देता हूं कि याचिकाकर्ता (अमित) दूसरे राज्य का निवासी होने के कारण, फरार हो सकता है और जांच में बाधा डाल सकता है। ऐसी परिस्थितियों में, मैं याचिकाकर्ता को जमानत देने का इच्छुक नहीं हूं।’ यह भर्ती परीक्षा 20 अगस्त को केरल के 10 केंद्रों पर आयोजित की गई थी और एक अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने के आरोप में हरियाणा के दो निवासियों को गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने महिला न्यायिक अधिकारियों के लिए ड्रेस कोड में  किया संशोधन
उच्च न्यायालय ने दशकों पुराने ड्रेस कोड में बदलाव करते हुए महिला न्यायिक अधिकारियों को सफेद सलवार के विकल्प की भी अनुमति दे दी है। अदालत ने सात अक्टूबर को जारी एक परिपत्र में 1970 के अपने आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि काले कॉलर ब्लाउज के साथ सफेद साड़ी के विकल्प के साथ महिला न्यायिक अधिकारी हाईनेक कॉलर वाली सफेद सलवार का भी इस्तेमाल कर सकती हैं।

पीठ ने कहा कि काले और सफेद को छोड़कर अन्य सभी रंगों से बचा जाना चाहिए और पहनी जाने वाली पोशाक शालीन और सरल होनी चाहिए और न्यायिक अधिकारी की गरिमा के अनुरूप होनी चाहिए। परिपत्र में कहा गया है, 'महिला न्यायिक अधिकारियों द्वारा उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया गया है कि 1970 परिपत्र के अनुसार उनके लिए निर्धारित ड्रेस कोड जलवायु परिस्थितियों में बदलाव और अदालतों में बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण कठिनाइयों का कारण बन रहा है।'

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