{"_id":"65fc0239eebb26dbde009698","slug":"kerala-health-department-withdraws-social-media-ban-amid-criticism-news-update-2024-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"केरल: स्वास्थ्य विभाग ने आलोचना के बाद वापस लिया फैसला, अब कर्मचारी कर सकेंगे सोशल मीडिया का इस्तेमाल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
केरल: स्वास्थ्य विभाग ने आलोचना के बाद वापस लिया फैसला, अब कर्मचारी कर सकेंगे सोशल मीडिया का इस्तेमाल
Thu, 21 Mar 2024 03:17 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Thu, 21 Mar 2024 03:17 PM IST
सार
स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक ने कहा कि 13 मार्च को जारी किए गए परिपत्र को प्रशासनिक कारणों से वापस लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि विभिन्न चिकित्सा पेशेवर निकायों की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आने के बाद परिपत्र वापस लेने का फैसला किया गया।
विज्ञापन
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज
- फोटो : Social Media
विस्तार
केरल का स्वास्थ्य विभाग कई दिनों से आालोचना का सामना कर रहा है। आखिकरकार बढ़ते विरोध को देखते हुए विभाग ने अपने उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उसने अधिकारियों को सोशल मीडिया गतिविधि में शामिल होने या यूट्यूब चैनल बनाने से मना किया था।
विज्ञापन
गुरुवार को जारी नए आदेश में, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक ने कहा कि 13 मार्च को जारी किए गए परिपत्र को प्रशासनिक कारणों से वापस लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि विभिन्न चिकित्सा पेशेवर निकायों, विशेष रूप से केरल सरकार चिकित्सा अधिकारी संघ (केजीएमओए) की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आने के बाद परिपत्र वापस लेने का फैसला किया गया।
विज्ञापन
13 मार्च को दिया यह आदेश
स्वास्थ्य सेवा निदेशक द्वारा जारी 13 मार्च के आदेश में सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया उपयोग से जुड़े उल्लंघनों के संभावित जोखिम पर जोर दिया गया था। साथ ही यूट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से वित्तीय लाभ की संभावना के बारे में चिंता व्यक्त की गई थी।
विज्ञापन
केजीएमओए ने की थी निंदा
इससे पहले केजीएमओए ने परिपत्र की निंदा की थी, जिसमें सोशल मीडिया गतिविधि पर स्वास्थ्य विभाग के प्रतिबंधों को संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) में निहित भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया गया था। केजीएमओए ने कहा था कि यह आदेश ऐसे समय में जारी करना गलत है, जब सरकारी कर्मचारी जनता को शिक्षित करने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से अथक प्रयास कर रहे हैं।