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Kerala: हाईकोर्ट ने मौत की सजा पाए दो दोषियों की याचिकाओं पर किया विचार! पृष्ठभूमि की जांच के निर्देश

Tue, 16 May 2023 05:21 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 16 May 2023 05:21 PM IST
सार

अटिंगल दोहरे हत्याकांड और पेरुंबवूर जिशा हत्या मामले के दोषियों की मौत की सजा पर विचार करते हुए जस्टिस अलेक्जेंडर थॉमस और जस्टिस सी जयचंद्रन की बेंच ने स्वतंत्र मूल्यांकन करने वालों की नियुक्ति की की उन्हें सीलबंद लिफाफे में कोर्ट की रजिस्ट्री के समक्ष अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। 

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Kerala HC directs 'mitigation investigation' in pleas by two death row convicts
high court of kerala

विस्तार

केरल हाईकोर्ट ने दो दोषियों की मौत की सजा पर विचार करते हुए उनकी पृष्ठभूमि की जांच-पड़ताल करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि मौत की सजा की पुष्टि करने से पहले उनकी सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, आर्थिक पृष्ठभूमि की स्टडी की जाएगी। 

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अटिंगल दोहरे हत्याकांड और पेरुंबवूर जिशा हत्या मामले के दोषियों की मौत की सजा पर विचार करते हुए जस्टिस अलेक्जेंडर थॉमस और जस्टिस सी जयचंद्रन की बेंच ने स्वतंत्र मूल्यांकन करने वालों की नियुक्ति की की उन्हें सीलबंद लिफाफे में कोर्ट की रजिस्ट्री के समक्ष अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। 
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कोर्ट ने कहा कि दोषियों के सभी प्रांसंगिक विवरणों पर विचार किया जाएगा जैसे कि उनकी उम्र, भाई-बहनों सहित पारिवारिक पृष्ठभूमि, माता-पिता की सुरक्षा, हिंसा या उपेक्षा का कोई इतिहास, परिवार के सदस्यों की पृष्ठभूमि, विवाहित या बच्चे हों, शिक्षा का स्तर, गरीबी या अभाव की स्थिति, सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि, आय या रोजगार की प्रकृति आदि। 
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कोर्ट ने 11 मई के अपने आदेश में कहा था कि वह दोषसिद्धि के मुद्दे पर फैसला होने तक रिपोर्ट का अवलोकन नहीं करेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट द्वारा अपीलीय चरण में दोषसिद्धि के मुद्दे पर सुनवाई करने से पहले ही सजा को कम करने के लिए स्टडी शुरू करने में कोई कानूनी रोक नहीं है।  


बेंच ने अपने आदेश में कहा, 'इस तरह की रिपोर्ट अभियोजन पक्ष द्वारा इस अदालत के समक्ष सीलबंद लिफाफे में दायर की जाएगी और जब तक इन अपीलों में दोषसिद्धि के मुद्दे पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक न्यायाधीशों द्वारा इसका अवलोकन नहीं किया जाएगा।'  बेंच ने आगे कहा कि यदि अपीलीय अदालत द्वारा दोषसिद्धि की पुष्टि किए जाने के बाद ही स्टडी प्रक्रिया शुरू की जाती है, तो गंभीर देरी होगी।   

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अपराध के कारण पैदा हुई परिस्थितियों का आकलन करने के लिए जांच को कम करने की प्रक्रिया की जरूरत है। 

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