{"_id":"60623e005b220241142bd45c","slug":"kerala-government-said-eds-petition-has-been-filed-under-secret-agenda-it-should-be-dismissed","type":"story","status":"publish","title_hn":"केरल सरकार: ईडी की याचिका गुप्त एजेंडे के तहत दायर की गई है, उसे किया जाए खारिज","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
केरल सरकार: ईडी की याचिका गुप्त एजेंडे के तहत दायर की गई है, उसे किया जाए खारिज
Tue, 30 Mar 2021 02:22 AM IST
Kuldeep Singh
पीटीआई, कोच्चि
पीटीआई, कोच्चि
Published by: Kuldeep Singh
Updated Tue, 30 Mar 2021 02:22 AM IST
सार
- सोने की तस्करी के मामले में पीएमएलए के तहत वैधानिक जांच को पटरी से उतारने के गुप्त मकसद से उसके अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
- राज्य सरकार ने कहा कि ईडी की याचिका गुप्त मकसद और गुप्त एजेंडे से दायर की गई
विज्ञापन
Kerala CM P Vijayan
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केरल सरकार ने उच्च न्यायालय से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका को खारिज करने की गुजारिश की है जिसमें सोना तस्करी मामले की मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश को मुख्यमंत्री पी विजयन के खिलाफ बयान देने के लिए मजबूर करने के आरोप में पुलिस द्वारा ईडी के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने का आग्रह किया गया है।
विज्ञापन
जवाबी हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा कि ईडी की याचिका गुप्त मकसद और गुप्त एजेंडे से दायर की गई है। ईडी ने 23 मार्च को दायर याचिका में आरोप लगाया था कि भारी मात्रा में सोने की तस्करी के मामले में बड़े स्तर पर आर्थिक अपराध की धनशोधन रोकथाम निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की जा रही वैधानिक जांच को पटरी से उतारने के गुप्त मकसद से उसके अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
विज्ञापन
अपराध शाखा ने 17 मार्च को एक मामला दर्ज किया था जो अपराध शाखा की टीम की ओर से दाखिल रिपोर्ट पर आधारित है। वह एक ऑडियो क्लिप के लीक होने की जांच कर रही है जो कथित रूप से सुरेश की है।
विज्ञापन
प्राथमिकी के मुताबिक, सोना तस्करी के मामले की जांच कर रहे ईडी के अधिकारियों ने 12-13 अगस्त 2020 को सुरेश से पूछताछ करते हुए उसे राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ बयान देने के लिए कथित रूप से मजबूर किया ताकि फर्जी सबूत गढ़े जा सकें।