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भारत में तैयार 'दिव्यास्त्र एमके3' ने भरी उड़ान: जेट इंजन से चलता है ड्रोन, जानिए क्या है इसकी खासियत
Sun, 16 Aug 2026 12:16 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 16 Aug 2026 12:16 PM IST
सार
भारत में तैयार ‘दिव्यास्त्र एमके3’ की सफल उड़ान के बाद कंपनी ने इसे आत्मनिर्भर भारत की बड़ी मिसाल बताया है। कंपनी के सह-संस्थापकों ने कहा कि भारत अब ऐसी जेट इंजन वाली सटीक हमला करने की प्रणाली खुद बना और उड़ा सकता है। आखिर इस नई तकनीक में क्या खास है?
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दिव्यास्त्र एमके3 की सफल उड़ान
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
विस्तार
जेट इंजन से चलने वाले ड्रोन 'दिव्यास्त्र एमके3' ने सफल उड़ान भरी है। कावा यूएवी प्राइवेट लिमिटेड (हॉवरइट) ने इसका सफल परीक्षण किया। कंपनी के मुताबिक, यह अगली पीढ़ी का ड्रोन है, जिसे भारत में ही तैयार किया गया है।
ड्रोन बनाने वाली कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी ने बताया कि 'दिव्यास्त्र एमके3' जेट इंजन से चलता है। इसे किसी तय लक्ष्य पर सटीक हमला करने के लिए बनाया गया है। इसकी पूरी तकनीक भारत में ही तैयार की गई है।
कंपनी के सह-संस्थापक क्या बोले?
इस कंपनी के सह-संस्थापकों ने कहा, यह सिर्फ एक परीक्षण उड़ान नहीं है। यह हमारी क्षमता दिखाने का एलान है। भारत ने बड़े स्तर पर और तेजी से यह साबित किया है कि वह अपने देश के अंदर ही जेट इंजन से चलने वाली सटीक हमला करने वाली प्रणाली को तैयार कर सकता है और उसे उड़ा सकता है। दिव्यास्त्र एमके3 आत्मनिर्भर भारत को जमीन पर उतारने का उदाहरण है।
डीआरडीओ ने यूएलपीजीएम-वी3 के विकास चरण किए पूरे
इससे पहले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मानवरहित विमान से दागी जाने वाली सटीक निर्देशित मिसाइल (यूएलपीजीएम-वी3) के अंतिम रूप वाले सिस्टम के विकास परीक्षण पूरे किए थे। ये परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुरनूल के पास डीआरडीओ के एक परीक्षण केंद्र में किए गए थे। इन परीक्षणों में मिसाइल को हवा से जमीन और हवा से हवा, दोनों तरह से इस्तेमाल करके देखा गया।
इन परीक्षणों में एक ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम (जीसीएस) का इस्तेमाल किया गया। इसी प्रणाली से यूएलपीजीएम हथियार प्रणाली को निर्देशित और नियंत्रित किया गया। जीसीएस में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे हथियार को तैयार करने और लॉन्च करने की प्रक्रिया को अपने आप चलाने में मदद मिलती है।
डीआरडीओ ने मिसाइल के विकास और उत्पादन के लिए दो कंपनियों के साथ साझेदारी की है। इनमें हैदराबाद स्थित भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड शामिल हैं। मौजूदा परीक्षणों के लिए इस प्रणाली को बंगलूरू की न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज की बनाई मानवरहित उड़ान प्रणालियों यानी यूएवी में लगाया गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई देते हुए क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूएलपीजीएम-वी3 के सफल विकास परीक्षणों के लिए डीआरडीओ, सरकारी रक्षा कंपनियों, रक्षा और उत्पादन से जुड़े साझेदारों और निजी उद्योग को बधाई दी। ये परीक्षण हवा से जमीन पर हमला करने वाले तरीके में टैंक रोधी भूमिका और हवा से हवा में ड्रोन, हेलिकॉप्टर और दूसरे उड़ने वाले लक्ष्यों के खिलाफ किए गए थे। राजनाथ सिंह ने इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में हासिल हुई एक रणनीतिक बड़ी उपलब्धि बताया।
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ड्रोन बनाने वाली कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी ने बताया कि 'दिव्यास्त्र एमके3' जेट इंजन से चलता है। इसे किसी तय लक्ष्य पर सटीक हमला करने के लिए बनाया गया है। इसकी पूरी तकनीक भारत में ही तैयार की गई है।
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#WATCH | Kawa UAV Pvt. Ltd. (HoverIt) conducts a successful flight of the Divyastra Mk3 — a next-generation, jet-powered loitering munition developed in India.
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“This is not merely a test flight — it is a declaration of intent. India has demonstrated, at scale and at speed, that… pic.twitter.com/MbrMA5jBI1 — ANI (@ANI) August 16, 2026
कंपनी के सह-संस्थापक क्या बोले?
इस कंपनी के सह-संस्थापकों ने कहा, यह सिर्फ एक परीक्षण उड़ान नहीं है। यह हमारी क्षमता दिखाने का एलान है। भारत ने बड़े स्तर पर और तेजी से यह साबित किया है कि वह अपने देश के अंदर ही जेट इंजन से चलने वाली सटीक हमला करने वाली प्रणाली को तैयार कर सकता है और उसे उड़ा सकता है। दिव्यास्त्र एमके3 आत्मनिर्भर भारत को जमीन पर उतारने का उदाहरण है।
डीआरडीओ ने यूएलपीजीएम-वी3 के विकास चरण किए पूरे
इससे पहले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मानवरहित विमान से दागी जाने वाली सटीक निर्देशित मिसाइल (यूएलपीजीएम-वी3) के अंतिम रूप वाले सिस्टम के विकास परीक्षण पूरे किए थे। ये परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुरनूल के पास डीआरडीओ के एक परीक्षण केंद्र में किए गए थे। इन परीक्षणों में मिसाइल को हवा से जमीन और हवा से हवा, दोनों तरह से इस्तेमाल करके देखा गया।
इन परीक्षणों में एक ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम (जीसीएस) का इस्तेमाल किया गया। इसी प्रणाली से यूएलपीजीएम हथियार प्रणाली को निर्देशित और नियंत्रित किया गया। जीसीएस में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे हथियार को तैयार करने और लॉन्च करने की प्रक्रिया को अपने आप चलाने में मदद मिलती है।
डीआरडीओ ने मिसाइल के विकास और उत्पादन के लिए दो कंपनियों के साथ साझेदारी की है। इनमें हैदराबाद स्थित भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड शामिल हैं। मौजूदा परीक्षणों के लिए इस प्रणाली को बंगलूरू की न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज की बनाई मानवरहित उड़ान प्रणालियों यानी यूएवी में लगाया गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई देते हुए क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूएलपीजीएम-वी3 के सफल विकास परीक्षणों के लिए डीआरडीओ, सरकारी रक्षा कंपनियों, रक्षा और उत्पादन से जुड़े साझेदारों और निजी उद्योग को बधाई दी। ये परीक्षण हवा से जमीन पर हमला करने वाले तरीके में टैंक रोधी भूमिका और हवा से हवा में ड्रोन, हेलिकॉप्टर और दूसरे उड़ने वाले लक्ष्यों के खिलाफ किए गए थे। राजनाथ सिंह ने इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में हासिल हुई एक रणनीतिक बड़ी उपलब्धि बताया।