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कश्मीर: सीआरपीएफ के जांबाजों ने ऐसे रोका था 'पुलवामा-2', पढ़िये 'पीएमजी' से सम्मानित कमांडर की कहानी

Sat, 14 Aug 2021 10:49 PM IST
kumar sambhava कुमार संभव
Updated Sat, 14 Aug 2021 10:49 PM IST
सार

यह किस्सा जनवरी 2021 का है, उस वक्त जम्मू कश्मीर के कई इलाकों में पंचायत चुनावों की प्रक्रिया चल रही थी। चुनाव के दौरान काम आने वाले बॉक्स इधर-उधर ले जाए जा रहे थे।

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Kashmir Pulwama-2 was stopped by the brave CRPF men read the story of PMG honored commander dharmendra kumar jha
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

आतंकवादियों ने पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों से भरी एक बस को उड़ाकर केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भारी चोट की थी। इसके बाद घाटी में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने वैसा ही दूसरा हमला यानी पुलवामा-2 को अंजाम देने की साजिश रची थी। इससे पहले आतंकी अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते, नगरोटा के बन टोल प्लाजा के निकट सीआरपीएफ के जांबाजों ने तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया। 

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बताया जा रहा है कि आतंकी खाई में उतरने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन तत्कालीन टूआईसी और सीआरपीएफ कमांडर धर्मेंद्र कुमार झा ने अपने 22 जवानों के साथ मिलकर तीनों आतंकियों को भागने का मौका नहीं दिया। आतंकियों के पास से अमेरिकन कारबाइन एमके-16, एके-47 राइफल्स, पिस्टल, दर्जनों हैंडग्रेनेड, आईईडी और बड़ी संख्या में गोला-बारूद बरामद किया गया। 75वें स्वतंत्रता दिवस पर धर्मेंद्र कुमार झा को वीरता के पुलिस पदक से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। 

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यह किस्सा जनवरी 2021 का है, उस वक्त जम्मू कश्मीर के कई इलाकों में पंचायत चुनावों की प्रक्रिया चल रही थी। चुनाव के दौरान काम आने वाले बॉक्स इधर-उधर ले जाए जा रहे थे। 31 जनवरी की सुबह तत्कालीन टूआईसी (अब कमांडेंट) डीके झा को सूचना मिली कि नगरोटा के बन टोल प्लाजा पर फायरिंग हो गई है। वहां संदिग्ध हालत में एक ट्रक भी खड़ा है। वह सीआरपीएफ क्यूएटी के साथ तीस मिनट में नगरोटा पहुंच गए। ट्रक की जांच पड़ताल की, लेकिन आतंकी तब तक घने जंगल के रास्ते खाई की तरफ जा चुके थे। ट्रक में जो सामान पड़ा था, उसे देखने के बाद आतंकियों के मंसूबों का अंदाजा हो गया था। एम 16 कारबाइन, एके 47 राइफलें, टीएनटी, आईईडी, कश्मीर के लोगों के नाम हजारों चिट्ठियां और संचार उपकरण सहित दूसरा सामान ट्रक में बिखरा पड़ा था। जांच के दौरान पता चला कि जैश-ए-मोहम्मद के तीनों आतंकी दो-तीन दिन पहले ही सीमा पार कर जम्मू कश्मीर में पहुंचे हैं। 

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सीआरपीएफ के मुताबिक, ट्रक में पड़े सामान को देखकर यह तय हो गया था कि आतंकी पुलवामा जैसे किसी बड़े हमले को अंजाम देना चाहते थे। ट्रक ड्राइवर और क्लीनर को गिरफ्तार कर लिया गया था। खास बात यह है कि आतंकियों के ट्रक क्लीनर का नाम समीर डार था। वह आदिल डार का चचेरा भाई था, जिसने खुद को आईईडी लगाकर पुलवामा हमले को अंजाम दिया था। उस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। समीर डार अपने दो साथियों आसिफ व सरताज के साथ मिलकर इन आतंकियों को ट्रक से कश्मीर ले जा रहा था। समीर डार के बारे में कहा जाता है कि वह पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के साथ सीधे संपर्क में था। डीके झा के साथ सीआरपीएफ की 137वीं बटालियन के सीओ व एसी सहित कई जवान मौजूद रहे। सीआरपीएफ टीम ने जैसे ही यूएवी उड़ाया तो आतंकियों ने उसे पहले ही शॉट में मार गिराया। मतलब साफ था कि आतंकियों को अच्छी ट्रेनिंग मिली थी। इससे सुरक्षा बलों को यह भी मालूम हो गया कि आतंकी बड़े हथियारों से लैस हैं। 

आतंकी तब तक ज्यादा दूर नहीं गए थे, यह बात भी सामने आ चुकी थी। हालांकि, सड़क की दूसरी तरफ गहरी खाई थी। अगर आतंकी खाई में उतर जाते तो उन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता। खाई 80 डिग्री के एंगल की तरह सीधी थी। वहां अंधेरा भी था, क्योंकि उस वक्त तक सूरज पूरी तरह नहीं निकला था। आतंकी इसका फायदा उठाकर भागना चाहते थे। डीके झा की टीम जैसे ही आतंकियों के पीछे लगी, उन पर हैंड ग्रेनेड फेंक दिया गया। इस टीम को रास्ते में विदेशी करेंसी के फटे हुए नोट मिले। इनमें पाकिस्तान और अरब देशों की करेंसी शामिल थी। अब सीआरपीएफ टीम को यह विश्वास हो गया था कि उनकी लोकेशन गलत नहीं है। कुछ ही देर में झा और उसके साथी भागने की कोशिश कर रहे आतंकियों के बेहद करीब पहुंच चुके थे। आतंकी समझ गए थे कि अब वे घिर चुके हैं। उन्होंने यूबीजीएल से हमला करने का प्रयास किया, लेकिन उनका अटैचमेंट नीचे गिर गया। इससे सुरक्षा बलों को कुछ राहत महसूस हुई, क्योंकि जब तक यूबीजीएल आतंकियों के पास था, वे सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचा सकते थे। 
 

अहम बात यह थी कि आतंकी हर तरह से प्रशिक्षित थे। ऐसे में उन्होंने दोबारा हैंड ग्रेनेड फेंका। डीके झा और उनकी टीम ने आतंकियों को सरेंडर करने के लिए कहा। वे नहीं माने। नतीजा, सीआरपीएफ की टीम ने कुछ ही देर में तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया। इसके बाद इलाके में सर्च अभियान शुरू किया गया। यह कहा जा सकता है कि ये ऑपरेशन ढाई घंटे में ही खत्म हो गया। क्यूएटी के सदस्य जानते थे कि एक बार ये आतंकी सेटल होने में कामयाब हो गए तो उनके हाथ से निकल जाएंगे। यही वजह थी कि डीके झा और उनकी टीम ने मौके पर ही तीनों आतंकी मार गिराए। स्वतंत्रता दिवस पर उस टीम में शामिल रहे सिपाही सतीश शर्मा को भी वीरता के पुलिस पदक से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। डीके झा अब छत्तीसगढ़ के एलडब्लूई एरिया में कमांडेंट के पद पर तैनात हैं। 

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