नेहरू की बड़ी चूक है कश्मीर समस्या, देश को दो हिस्सों में बांटना पहली गलती : जितेंद्र सिंह
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प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में प्रतिबद्धता के बजाय अवसरवादी अलगाववाद है। अलगाववादियों के बच्चे ऐश कर रहे हैं, जबकि आम कश्मीरी भुगत रहा है। वादी में भाड़े के आतंकी अशांति फैला रहे हैं। इनका प्रतिबद्धता या विचारधारा से कोई लेनादेना नहीं है। वहीं, उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बड़ी चूक को कश्मीर समस्या का कारण बताया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारा दुश्मन देश जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। वह आतंकियों को आर्थिक मदद कर रहा है। कुछ दल राजनीति का मुखौटा लगाकर अलगाववाद को बढ़ावा दे रहे हैं। यह अवसरवादी अलगाववाद खुले अलगाववाद से ज्यादा खतरनाक है। ये भी देश के दुश्मन हैं।
सिंह ने कहा कि पाकिस्तान आज तक जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा स्वीकार नहीं कर पाया है। अलगाववादियों का आजादी का मॉडल फर्जी है, जिसमें पड़ोसी के बच्चों को जेहादी बनाया जाता है और अपने बच्चों को सुरक्षित जगह भेज दिया जाता है। कश्मीर समस्या के लिए नेहरू की ‘बड़ी चूकों की श्रृंखला’ को जिम्मेदार बताते हुए सिंह ने कहा कि सबसे पहली चूक देश को दो हिस्सों में बांटना थी। बंटवारे के बाद पंडित नेहरू ने तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को अन्य राज्यों की तरह कश्मीर में कार्यवाही करने से रोका। बाद में जब पाकिस्तान के हमले का संकट आया तो बीच में ही युद्धविराम की घोषणा कर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर बनने दिया।
इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में जनमत संग्रह की बात कर फिर बड़ी चूक की। सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के विभाजन के बाद 1972 में शिमला समझौते के समय पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पास भी अच्छा मौका था, जिसे उन्होंने गंवा दिया। अब बुद्धिजीवियों पर कश्मीर को एक मुद्दे की तरह देखने का आरोप लगाते हुए बौद्धिक आतंकवाद को भी नुकसानदायक बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार कश्मीर को लेकर नीतियों में दृढ़ निश्चय, निरंतरता और स्पष्टता का श्रेय ले सकती है।
सशस्त्र संघर्ष समाधान नहीं : मलिक
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि पिछले 50 साल में सूबे के नेताओं ने लोगों से आजादी, पाकिस्तान की मदद से स्वतंत्रता और स्वायत्तता जैसे झूठे वादे ही किए हैं। लोगों को समझना होगा कि सशस्त्र संघर्ष समाधान नहीं है। सरकार को उन्हें बताना होगा कि हम सिर्फ आतंकियों को खत्म करना चाहते हैं। इस समय राज्य के विकास, भ्रष्टाचार को खत्म करने और रोजगार बढ़ाने की जरूरत है।