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राजनीति: चांद पर उतरने वाले देश में मैला ढोने की प्रथा कैसे? कार्ति चिदंबरम का सरकार पर तंज; भाजपा का पलटवार

Thu, 21 Sep 2023 05:44 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 21 Sep 2023 05:44 PM IST
सार

कार्ति ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि एक ओर भारत चंद्रमा पर उतर रहा है, वहीं, दूसरी ओर देश में अभी भी मैनुअल स्कैवेंजिंग और गड्ढों जैसी समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि हम हर किसी के लिए उपग्रह कैसे लॉन्च कर सकते हैं, जब मानसून में सड़कों का प्रबंधन नहीं कर सकते। हम यह विरोधाभास कैसे रख सकते हैं?

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Karti Chidambaram said How can India land on Moon and still have manual scavenging
कार्ति चिदंबरम - फोटो : PTI

विस्तार

संसद के विशेष सत्र के चौथे दिन लोकसभा में चंद्रयान-3 मिशन की सफलता और अंतरिक्ष क्षेत्र में अन्य उपलब्धियों पर चर्चा की गई। इस दौरान कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने जहां चंद्रयान की सफलता के लिए इसरो को बधाई दी वहीं, मैला ढोने की प्रथा को लेकर सरकार पर निशाना भी साधा। उन्होंने कहा कि चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान उतारने वाला देश अब भी मैला ढोने की प्रथा कैसे अपना सकता है। देश में वैज्ञानिक सोच बनाए रखना जरूरी है।  

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आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोगों के मन में अक्सर आस्था और अध्यात्मवाद के बीच भ्रम पैदा हो जाता है। हमारे देश में  अध्यात्मवाद और विज्ञान पर सवाल उठाया जा सकता है, लेकिन आस्था पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। ऐसे में यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम भारत के वैज्ञानिक स्वभाव को बनाए रखें, जिसे इसरो ने प्रदर्शित किया है।
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हम विरोधाभास कैसे रख सकते हैं- कार्ति
अपने संबोधन में मैला ढोने की प्रथा और सड़कों में गड्ढों की समस्या की ओर उन्होंने सरकार का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि एक ओर भारत चंद्रमा पर उतर रहा है, वहीं, दूसरी ओर देश में अभी भी मैनुअल स्कैवेंजिंग और गड्ढों जैसी समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि हम हर किसी के लिए उपग्रह कैसे लॉन्च कर सकते हैं, जब मानसून में सड़कों का प्रबंधन नहीं कर सकते। हम यह विरोधाभास कैसे रख सकते हैं? अगर हम अपने द्वारा की जा रही वैज्ञानिक प्रगति का लाभ खुद के लिए नहीं उठा सकते, तो निश्चित ही हमारे समाज में कुछ गंभीर रूप से गलत है। 
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उन्होंने यह भी कहा कि मैं पूरी तरह से समझता हूं कि हमारी विरासत और इतिहास विज्ञान और खगोल विज्ञान के साथ बहुत निकटता से जुड़ा हुआ है। हमें अनुसंधान करने, परीक्षण करने और अपनी जड़ों में वापस जाने की जरूरत है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हमारे पास जो विज्ञान था उसे हमने कहां खो दिया। इस दौरान कार्ति चिदंबरम ने सरकार से सरकारी स्कूलों के अधिक से अधिक छात्रों को इसरो में शामिल होने में सक्षम बनाने के लिए फेलोशिप और छात्रवृत्ति शुरू करने का भी आग्रह किया।

भाजपा सांसद ने किया पलटवार
इस बीच, भाजपा सांसद जयंत सिन्हा ने उनको जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान और 'संस्कार' (संस्कृति) भारतीयों के लिए एक साथ चलते हैं। इसमें कोई विरोधाभास नहीं है। अगर हमारे पास विज्ञान है, तो हमारे पास संस्कार भी हैं। अगर कोई सोचता है कि हम दोनों को एक साथ नहीं ले सकते तो वे गलत हैं... संतुलन होना चाहिए। इस दौरान उन्होंने इसरो को शुरू करने में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के योगदान का भी जिक्र किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीते नौ सालों के कार्यकाल में इसरो का बजट दोगुना कर दिया गया है। 2013-14 में इसरो का बजट 5,600 करोड़ रुपये था, जो अब दोगुना होकर लगभग 13,000 करोड़ रुपये हो गया है।

चंद्रयान मिशन की सफलता का श्रेय वैज्ञानिक समुदाय को- डिंपल यादव
वहीं, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने इस विषय पर चर्चा के दौरान चंद्रयान मिशन की सफलता का श्रेय वैज्ञानिक समुदाय को दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि अकेले वैज्ञानिक समुदाय की है, आइए हम अपने वैज्ञानिकों का श्रेय लेने में अपनी गरिमा कम न करें, इस पर गर्व करें। 

 सांसद हसनैन मसूदी ने वास्तविक मुद्दों पर जोर देने की बात कही
वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद हसनैन मसूदी ने जोर देकर कहा कि हालांकि यह एक बड़ी सफलता थी, लेकिन भारत को स्वास्थ्य देखभाल अंतराल को पाटने जैसे वास्तविक मुद्दों को नहीं भूलना चाहिए। हमें लोगों के मुद्दों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए...जम्मू-कश्मीर में 1.5 करोड़ लोगों के पास कोई लोकतांत्रिक अधिकार नहीं है। उनके अलावा इस चर्चा में एलजेएसपी सांसद प्रिंस राज और बीजेपी सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने भी हिस्सा लिया। 


भारत ने रचा था इतिहास
बता दें कि चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलता पूर्वक लैंडिंग की थी। इसके बाद अगले 14 दिनों में चंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी जुटाईं। इस सफलता के बाद भारत उन चार देशों के विशेष क्लब में शामिल हो गया है जिन्होंने सफल चंद्र मिशन किए हैं। साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बन गया है। 

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