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Karnataka Politics: कर्नाटक में कैबिनेट गठन पर मंथन तेज, बंगलूरू से दिल्ली पहुंचेंगे शिवकुमार-सिद्धारमैया
Sun, 31 May 2026 07:24 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sun, 31 May 2026 07:24 PM IST
सार
कर्नाटक में नई कांग्रेस सरकार के गठन को लेकर हलचल तेज है। मुख्यमंत्री पद के लिए चुने गए डी के शिवकुमार और सिद्धारमैया एक जून को दिल्ली जाकर कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात करेंगे। बैठक में मंत्रिमंडल गठन, विभागों के बंटवारे और उपमुख्यमंत्री पदों पर चर्चा होगी। मंत्री पदों के लिए कई नेताओं की दावेदारी सामने आ रही है। कांग्रेस सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश में जुटी है।
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कर्नाटक कैबिनेट गठन पर दिल्ली में बड़ा मंथन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कर्नाटक में नई सरकार के गठन को लेकर कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद के लिए चुने गए डी के शिवकुमार और वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया एक जून को दिल्ली जाकर कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में मंत्रिमंडल गठन, विभागों के बंटवारे, शपथ ग्रहण समारोह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है। दूसरी तरफ मंत्री और उपमुख्यमंत्री पदों को लेकर पार्टी नेताओं की लॉबिंग भी तेज हो गई है।
डी के शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब तीन जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी है। उन्होंने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार गठन के लिए आमंत्रित किया। तीन जून को शाम 4 बजकर 5 मिनट पर लोक भवन परिसर में शपथ ग्रहण समारोह होगा। हालांकि अब सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि पहली सूची में कितने मंत्री शपथ लेंगे और किन नेताओं को सरकार में जगह मिलेगी।
कैबिनेट गठन को लेकर दिल्ली में क्या होगा?
सूत्रों के मुताबिक डी के शिवकुमार और सिद्धारमैया सोमवार को दिल्ली पहुंचेंगे। वहां वे कांग्रेस हाईकमान के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में मंत्रिमंडल के आकार, विभागों के बंटवारे और सामाजिक संतुलन पर चर्चा होगी। इसके अलावा नए केपीसीसी अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी विचार किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व यह तय करेगा कि पहले चरण में कितने मंत्रियों को शपथ दिलाई जाए और बाद में किन नेताओं को मौका दिया जाए।
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ये भी पढ़ें- India Economy: 'पश्चिम एशिया संकट नहीं, निजी निवेश की कमी'; भारतीय अर्थव्यवस्था पर और क्या बोले सुरजीत भल्ला?
मंत्री पदों के लिए कौन-कौन कर रहा दावेदारी?
कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मंत्री पद और उपमुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। एम बी पाटिल, दिनेश गुंडू राव और मधु बंगारप्पा जैसे नेता डी के शिवकुमार से मिले हैं। वहीं कई विधायक दिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व से मिलने की तैयारी कर रहे हैं। कोलार जिले के नेताओं ने भी अपने इलाके को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई है। अनुसूचित जाति, वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों को प्रतिनिधित्व देने पर भी चर्चा हो रही है।
क्या कर्नाटक में कई उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि अभी तक पार्टी नेतृत्व के पास उपमुख्यमंत्री पदों को लेकर कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि जब प्रस्ताव आएगा, तब इस पर चर्चा होगी। खरगे ने संकेत दिए कि मंत्रिमंडल गठन चरणों में किया जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए एक से ज्यादा उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला हाईकमान ही करेगा।
सामाजिक संतुलन पर कांग्रेस क्यों दे रही जोर?
पूर्व मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि नई सरकार में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा जल्द शुरू होगी। वहीं एम बी पाटिल के समर्थक लिंगायत समुदाय को बड़ा प्रतिनिधित्व देने की मांग कर रहे हैं। कुछ नेता उन्हें उपमुख्यमंत्री या केपीसीसी अध्यक्ष बनाने की पैरवी कर रहे हैं। दूसरी तरफ पूर्व मंत्री के एच मुनियप्पा और एम सी सुधाकर ने कहा कि पार्टी हाईकमान जो फैसला करेगा, वह उसे मानेंगे।
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी गुटों और समुदायों को संतुष्ट करने की है। पार्टी को मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक संतुलन बनाना होगा। अगर किसी बड़े नेता या समुदाय को नजरअंदाज किया गया, तो असंतोष बढ़ सकता है। इसलिए हाईकमान बेहद सावधानी से फैसले ले रहा है। माना जा रहा है कि दिल्ली बैठक के बाद कर्नाटक सरकार की पहली तस्वीर साफ हो जाएगी।
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डी के शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब तीन जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी है। उन्होंने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार गठन के लिए आमंत्रित किया। तीन जून को शाम 4 बजकर 5 मिनट पर लोक भवन परिसर में शपथ ग्रहण समारोह होगा। हालांकि अब सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि पहली सूची में कितने मंत्री शपथ लेंगे और किन नेताओं को सरकार में जगह मिलेगी।
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कैबिनेट गठन को लेकर दिल्ली में क्या होगा?
सूत्रों के मुताबिक डी के शिवकुमार और सिद्धारमैया सोमवार को दिल्ली पहुंचेंगे। वहां वे कांग्रेस हाईकमान के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में मंत्रिमंडल के आकार, विभागों के बंटवारे और सामाजिक संतुलन पर चर्चा होगी। इसके अलावा नए केपीसीसी अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी विचार किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व यह तय करेगा कि पहले चरण में कितने मंत्रियों को शपथ दिलाई जाए और बाद में किन नेताओं को मौका दिया जाए।
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मंत्री पदों के लिए कौन-कौन कर रहा दावेदारी?
कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मंत्री पद और उपमुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। एम बी पाटिल, दिनेश गुंडू राव और मधु बंगारप्पा जैसे नेता डी के शिवकुमार से मिले हैं। वहीं कई विधायक दिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व से मिलने की तैयारी कर रहे हैं। कोलार जिले के नेताओं ने भी अपने इलाके को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई है। अनुसूचित जाति, वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों को प्रतिनिधित्व देने पर भी चर्चा हो रही है।
क्या कर्नाटक में कई उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि अभी तक पार्टी नेतृत्व के पास उपमुख्यमंत्री पदों को लेकर कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि जब प्रस्ताव आएगा, तब इस पर चर्चा होगी। खरगे ने संकेत दिए कि मंत्रिमंडल गठन चरणों में किया जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए एक से ज्यादा उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला हाईकमान ही करेगा।
सामाजिक संतुलन पर कांग्रेस क्यों दे रही जोर?
पूर्व मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि नई सरकार में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा जल्द शुरू होगी। वहीं एम बी पाटिल के समर्थक लिंगायत समुदाय को बड़ा प्रतिनिधित्व देने की मांग कर रहे हैं। कुछ नेता उन्हें उपमुख्यमंत्री या केपीसीसी अध्यक्ष बनाने की पैरवी कर रहे हैं। दूसरी तरफ पूर्व मंत्री के एच मुनियप्पा और एम सी सुधाकर ने कहा कि पार्टी हाईकमान जो फैसला करेगा, वह उसे मानेंगे।
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी गुटों और समुदायों को संतुष्ट करने की है। पार्टी को मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक संतुलन बनाना होगा। अगर किसी बड़े नेता या समुदाय को नजरअंदाज किया गया, तो असंतोष बढ़ सकता है। इसलिए हाईकमान बेहद सावधानी से फैसले ले रहा है। माना जा रहा है कि दिल्ली बैठक के बाद कर्नाटक सरकार की पहली तस्वीर साफ हो जाएगी।