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Karnataka: 'जाति जनगणना की कोई रिपोर्ट नहीं, केवल सामाजिक-आर्थिक आंकड़े उपलब्ध', प्रियांक खरगे का बड़ा बयान
Mon, 28 Oct 2024 03:37 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 28 Oct 2024 03:37 PM IST
सार
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने जाति जनगणना को लेकर बड़ा बयान दिया है। खरगे ने कहा कि जाति जनगणना की कोई रिपोर्ट नहीं है। केवल पिछड़ा वर्ग आयोग की एक सामाजिक-आर्थिक रिपोर्ट उपलब्ध है।
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कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियांक खरगे।
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने जाति जनगणना को लेकर बड़ा बयान दिया है। खरगे ने कहा कि जाति जनगणना की कोई रिपोर्ट नहीं है। केवल राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की एक सामाजिक-आर्थिक रिपोर्ट उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि क्या इसे अतिरिक्त विषय के रूप में मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा। हमारे पास जाति जनगणना करने की कोई शक्ति नहीं है।
खरगे के इस बयान ने जाति जनगणना के मुद्दे पर फिर से चर्चा शुरू कर दी है। कई नेता और सामाजिक संगठन इसे महत्वपूर्ण मानते हैं और इसकी मांग कर रहे हैं। इस साल 29 फरवरी को जाति जनगणना पर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। हालांकि, यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई थी। लेकिन इसको लेकर खूब विवाद हुआ था। खुद सत्ताधारी कांग्रेस के कई विधायकों ने इसका विरोध किया था। विपक्षी भाजपा ने भी जाति जनगणना रिपोर्ट पर सवालिया निशान खड़े किए थे। राज्य सरकार इसे जाति जनगणना की जगह सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण बताती है।
एच कंथाराज की अध्यक्षता में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 2015 में अप्रैल और मई में सर्वे कराया था। इस दौरान 1.6 लाख गणनाकारों ने लगभग 1.3 करोड़ घरों का सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान 1,30,00,000 परिवारों के 5,90,00,000 लोगों से 54 सवाल पूछे गए थे। इस परियोजना पर 169 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया के पहले कार्यकाल में 2017 में रिपोर्ट तैयार हो गई थी। हालांकि, इसे न तो स्वीकार किया गया और न ही इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक किया गया।
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रिपोर्ट को लेकर विवाद क्या है?
रिपोर्ट के सौंपते ही इस पर विवाद छिड़ गया था। कर्नाटक कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने जाति जनगणना रिपोर्ट को स्वीकार करने पर आपत्ति जताई थी। कांग्रेस के दिग्गज नेता और वीरशैव-लिंगायत महासभा के अध्यक्ष शमनूर शिवशंकरप्पा ने जाति जनगणना को अवैज्ञानिक बताया था। उन्होंने कहा था, 'बिना डोर-टू-डोर सर्वेक्षण किए तैयार की गई रिपोर्ट को समाज स्वीकार नहीं करेगा।'
मंत्री एमबी पाटिल ने कहा था कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लिंगायत समुदाय को अन्याय का सामना न करना पड़े। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने कहा कि रिपोर्ट में खामियां हैं। इसके अलावा कांग्रेस के विधायक विनय कुलकर्णी और विजयानंद कशप्पनवर ने भी रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट पर भाजपा ने क्या कहा था?
कर्नाटक की विपक्षी भाजपा ने भी रिपोर्ट का विरोध किया था। पार्टी के विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने कहा था, 'यह सर्वे वैज्ञानिक नहीं है। इससे लिंगायत और वोक्कालिगा नाराज हैं। हम इसका विरोध करेंगे। हम कांग्रेस सरकार से अनुरोध करेंगे कि वे घर-घर जाकर दोबारा सर्वे करें, जिसके बाद ही हम इसे स्वीकार करेंगे।'
इससे पहले किसी और राज्य में इस तरह का सर्वे हुआ है क्या?
पिछले साल बिहार में जातिगत सर्व की रिपोर्ट सामने आई थी। बिहार सरकार ने अक्तूबर 2023 में बिहार सरकार ने जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट जारी की थी। जातिगत जनगणना के आंकड़े कहते हैं कि राज्य में कुल 13 करोड़ से ज्यादा की आबादी है। जो 2011 की जनगणना के मुकाबले 25.5% से ज्यादा है। पिछड़ा वर्ग की कुल आबादी राज्य की जनसंख्या का 63 फीसदी से भी ज्यादा है। इनमें 27 फीसदी से ज्यादा पिछड़ी जातियां तो 36 फीसदी से ज्यादा अति पिछड़ी जातियां भी शामिल हैं। अनुसूचित जाति की आबादी 19.65 फीसदी है। वहीं, अनुसूचित जनजाति की आबादी 1.68 फीसदी है। इसके साथ ही कुल आबादी में सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी करीब 15.52 फीसदी है।
आरक्षण पर भी बोले प्रियांक खरगे
प्रियांक खरगे ने यह भी कहा कि आंतरिक आरक्षण हमारी पार्टी के घोषणा पत्र का हिस्सा है। पिछली सरकार ने आंतरिक आरक्षण लागू करने में किसी आंकड़े का इस्तेमाल नहीं किया था। खरगे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि आतंरिक आरक्षण को वास्तविक आंकड़ों के आधार पर लागू किया जाना चाहिए। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हमने एक एकल न्यायाधीश आयोग का गठन किया है। इस आयोग का मकसद यह पता लगाना है कि आंतरिक आरक्षण के लिए आकंड़े एकत्रित कैसे किए जा सकते हैं।
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खरगे के इस बयान ने जाति जनगणना के मुद्दे पर फिर से चर्चा शुरू कर दी है। कई नेता और सामाजिक संगठन इसे महत्वपूर्ण मानते हैं और इसकी मांग कर रहे हैं। इस साल 29 फरवरी को जाति जनगणना पर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। हालांकि, यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई थी। लेकिन इसको लेकर खूब विवाद हुआ था। खुद सत्ताधारी कांग्रेस के कई विधायकों ने इसका विरोध किया था। विपक्षी भाजपा ने भी जाति जनगणना रिपोर्ट पर सवालिया निशान खड़े किए थे। राज्य सरकार इसे जाति जनगणना की जगह सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण बताती है।
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एच कंथाराज की अध्यक्षता में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 2015 में अप्रैल और मई में सर्वे कराया था। इस दौरान 1.6 लाख गणनाकारों ने लगभग 1.3 करोड़ घरों का सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान 1,30,00,000 परिवारों के 5,90,00,000 लोगों से 54 सवाल पूछे गए थे। इस परियोजना पर 169 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया के पहले कार्यकाल में 2017 में रिपोर्ट तैयार हो गई थी। हालांकि, इसे न तो स्वीकार किया गया और न ही इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक किया गया।
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रिपोर्ट को लेकर विवाद क्या है?
रिपोर्ट के सौंपते ही इस पर विवाद छिड़ गया था। कर्नाटक कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने जाति जनगणना रिपोर्ट को स्वीकार करने पर आपत्ति जताई थी। कांग्रेस के दिग्गज नेता और वीरशैव-लिंगायत महासभा के अध्यक्ष शमनूर शिवशंकरप्पा ने जाति जनगणना को अवैज्ञानिक बताया था। उन्होंने कहा था, 'बिना डोर-टू-डोर सर्वेक्षण किए तैयार की गई रिपोर्ट को समाज स्वीकार नहीं करेगा।'
मंत्री एमबी पाटिल ने कहा था कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लिंगायत समुदाय को अन्याय का सामना न करना पड़े। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने कहा कि रिपोर्ट में खामियां हैं। इसके अलावा कांग्रेस के विधायक विनय कुलकर्णी और विजयानंद कशप्पनवर ने भी रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट पर भाजपा ने क्या कहा था?
कर्नाटक की विपक्षी भाजपा ने भी रिपोर्ट का विरोध किया था। पार्टी के विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने कहा था, 'यह सर्वे वैज्ञानिक नहीं है। इससे लिंगायत और वोक्कालिगा नाराज हैं। हम इसका विरोध करेंगे। हम कांग्रेस सरकार से अनुरोध करेंगे कि वे घर-घर जाकर दोबारा सर्वे करें, जिसके बाद ही हम इसे स्वीकार करेंगे।'
इससे पहले किसी और राज्य में इस तरह का सर्वे हुआ है क्या?
पिछले साल बिहार में जातिगत सर्व की रिपोर्ट सामने आई थी। बिहार सरकार ने अक्तूबर 2023 में बिहार सरकार ने जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट जारी की थी। जातिगत जनगणना के आंकड़े कहते हैं कि राज्य में कुल 13 करोड़ से ज्यादा की आबादी है। जो 2011 की जनगणना के मुकाबले 25.5% से ज्यादा है। पिछड़ा वर्ग की कुल आबादी राज्य की जनसंख्या का 63 फीसदी से भी ज्यादा है। इनमें 27 फीसदी से ज्यादा पिछड़ी जातियां तो 36 फीसदी से ज्यादा अति पिछड़ी जातियां भी शामिल हैं। अनुसूचित जाति की आबादी 19.65 फीसदी है। वहीं, अनुसूचित जनजाति की आबादी 1.68 फीसदी है। इसके साथ ही कुल आबादी में सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी करीब 15.52 फीसदी है।
आरक्षण पर भी बोले प्रियांक खरगे
प्रियांक खरगे ने यह भी कहा कि आंतरिक आरक्षण हमारी पार्टी के घोषणा पत्र का हिस्सा है। पिछली सरकार ने आंतरिक आरक्षण लागू करने में किसी आंकड़े का इस्तेमाल नहीं किया था। खरगे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि आतंरिक आरक्षण को वास्तविक आंकड़ों के आधार पर लागू किया जाना चाहिए। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हमने एक एकल न्यायाधीश आयोग का गठन किया है। इस आयोग का मकसद यह पता लगाना है कि आंतरिक आरक्षण के लिए आकंड़े एकत्रित कैसे किए जा सकते हैं।
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