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Karnataka Hijab Row: हिजाब विवाद पर मद्रास हाई कोर्ट ने जताई चिंता, पूछा- राष्ट्र या धर्म में सर्वोपरि क्या?
Thu, 10 Feb 2022 04:30 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 10 Feb 2022 04:30 PM IST
सार
जस्टिस भंडारी ने भारत के धर्मनिरपेक्ष देश होने का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा विवाद से कुछ नहीं मिलने जा रहा है। इसके जरिए धर्म के नाम पर देश को बांटने की कोशिश की जा रही है।
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मद्रास हाई कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कर्नाटक के हिजाब विवाद के बीच मद्रास हाई कोर्ट ने गुरुवार को गंभीर चिंता व्यक्त की। देश में धार्मिक असौहार्द्र पैदा करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर कोर्ट ने हैरानी जताई और सवाल किया कि राष्ट्र या धर्म में सर्वोपरि क्या है? कर्नाटक में हिजाब से जुड़े विवाद को लेकर चल रही बहस पर कार्यवाहक चीफ जस्टिस एमएन भंडारी और जस्टिस डी भरत चक्रवर्ती की प्रथम पीठ ने कहा कि कुछ ताकतों ने ड्रेस कोड को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है और मामला धीरे-धीरे यह पूरे देश में फैलता जा रहा है।
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पीठ ने कहा कि यह सचमुच में स्तब्ध करने वाला है। कोई व्यक्ति हिजाब के पक्ष में है, तो कुछ टोपी के पक्ष में हैं। कुछ अन्य दूसरी चीजों के पक्ष में हैं। यह एक देश है या यह फिर धर्म या इस तरह की कुछ चीजों के आधार पर बंटा हुआ है। यह आश्चर्य की बात है। जस्टिस भंडारी ने भारत के धर्मनिरपेक्ष देश होने का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा विवाद से कुछ नहीं मिलने जा रहा है। इसके जरिए धर्म के नाम पर देश को बांटने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट ने कुछ जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणियां कीं।
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गैर हिंदुओं के मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग
गुरुवार को चेन्नई हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में राज्य के अंदर मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए पोशाक सुनिश्चित करने और मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा मंदिर परिसर में व्यावसायिक गतिविधियों पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग भी की गई। सुनवाई के दौरान तमिलनाडु के महाधिवक्ता आर षणमुगासुंदरम ने अदालत को बताया कि राज्य में आगंतुकों को लेकर हर मंदिर के अपने नियम हैं।
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मंदिरों में मोदी के भाषण के सीधे प्रसारण के खिलाफ याचिका मद्रास हाईकोर्ट में खारिज
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के मंदिरों में पीएम मोदी के पिछले साल उत्तराखंड में दिए भाषण के सीधे प्रसारण के खिलाफ याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा, आदि शंकरा की समाधि समारोह में मोदी के भाषण में कुछ भी राजनीतिक नहीं था।
तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम निवासी याचिकाकर्ता रंगराजन नरसिम्हा ने याचिका में आरोप लगाया कि केदारनाथ में 5 नवंबर 2021 को पीएम मोदी द्वारा की गई पूजा और उनके भाषण का सीधा प्रसारण तमिलनाडु के 16 मंदिरों में किया गया। यह परिवार प्रवेश नियम नंबर 8 का सीधा उल्लंघन है।
इस नियम के तहत मंदिर अनुष्ठानों के अलावा मंदिर परिसर का इस्तेमाल अन्य किसी आयोजन के लिए नहीं होना चाहिए। राज्य के एडवोकेट जनरल आर शनमुगासुंदरम ने कोर्ट को बताया कि मोदी के कार्यक्रम का प्रसार केंद्र सरकार के निर्देश पर किया गया था। मोदी ने उस कार्यक्रम में राजनीति से जुड़ी कोई बात नहीं की थी। वह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन था। एडवोकेट जनरल की दलील को संतोषजनक मानते हुए पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।