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Karnataka: कथित प्रेमी के मोबाइल की लोकेशन का विवरण निजता के अधिकार का उल्लंघन, कर्नाटक की अहम टिप्पणी
Tue, 13 Dec 2022 11:05 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 13 Dec 2022 11:05 PM IST
सार
पति ने आरोप लगाया था कि यह तीसरा पक्ष उसकी पत्नी का प्रेमी है और वह इसे मोबाइल टॉवर से उसके मोबाइल नंबर के ब्योरे के जरिए साबित करना चाहता है। इसे तीसरे पक्ष ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
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कोर्ट का फैसला
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक परिवार कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें एक मोबाइल सेवा प्रदाता को एक दंपति के वैवाहिक मामले में तीसरे पक्ष की कॉल डिटेल और मोबाइल टॉवर का ब्योरा जमा करने को कहा गया था। कोर्ट ने कहा कि यह तीसरे पक्ष के निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है।
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तीसरे पक्ष' की याचिका पर सुनाया फैसला
'तीसरे पक्ष' की याचिका को स्वीकार करते हुए जस्टिस एम नागप्रसन्न ने अपने हालिया फैसले में कहा कि पति की इस दलील पर कि वह याचिकाकर्ता और अपनी पत्नी के बीच अवैध संबंध साबित करना चाहता है, तीसरे पक्ष की निजता का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दंपति के बीच 2018 से बेंगलुरु की परिवार अदालत में वैवाहिक मामला चल रहा है।
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28 फरवरी 2019 को परिवार कोर्ट ने दिया था आदेश
परिवार कोर्ट ने 28 फरवरी 2019 को अन्य व्यक्ति का मोबाइल टॉवर रिकॉर्ड विवरण तलब करने की अनुमति दी थी, जो पारिवारिक मामले का हिस्सा नहीं था। पति ने आरोप लगाया था कि यह तीसरा पक्ष उसकी पत्नी का प्रेमी है और वह इसे मोबाइल टॉवर से उसके मोबाइल नंबर के ब्योरे के जरिए साबित करना चाहता है। इसे तीसरे पक्ष ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसने 2019 में परिवार अदालत के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय ने 30 नवंबर 2022 को याचिका का निस्तारण कर दिया।
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फैसला गोपनीयता का उल्लंघन
याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक को अपनी, अपने परिवार, विवाह और अन्य जुड़े हुए संबंधों की गोपनीयता की रक्षा करने का अधिकार है। सूचनात्मक गोपनीयता भी निजता के अधिकार का एक अभिन्न अंग है। इसलिए जो आदेश याचिकाकर्ता का मोबाइल टॉवर ब्योरा अदालत के समक्ष रखने को निर्देश देता है, निस्संदेह सूचनात्मक गोपनीयता का उल्लंघन करता है।