Karnataka: कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दहेज उत्पीड़न मामले में ससुराल के तीन सदस्यों पर कार्रवाई रद्द
कर्नाटक हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में ससुराल पक्ष के तीन लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि शिकायत और चार्जशीट में ठोस आरोप नहीं हैं और शादी के खर्चों को दहेज मांग नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी साफ किया कि शादी से पहले की चर्चाओं को बाद में दहेज का रूप देकर पूरे परिवार को फंसाना गलत है।
विस्तार
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने दहेज उत्पीड़न मामले में ससुराल पक्ष के तीन सदस्यों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि इन ससुराल वालों को बिना किसी ठोस आरोप के अनावश्यक रूप से मामले में घसीटा गया है। यह केस बंगलूरू की एक महिला ने दायर किया है। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने कहा कि शिकायत और चार्जशीट दोनों में केवल शादी के खर्चों का जिक्र है, जिसे दहेज की मांग नहीं माना जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शादी से पहले की चर्चाओं को बाद में दहेज की मांग के रूप में नहीं बदला जा सकता, जिससे पति के पूरे परिवार को फंसाया जाए। न्यायालय ने कहा कि भले ही इसे सही माना जाए, तो भी यह बाद में दहेज की मांग नहीं बन सकता, जिससे पति के परिवार के हर सदस्य को मामले में फंसाया जाए। अदालत ने आगे कहा कि ससुराल पक्ष के सदस्यों को बिना किसी तुक या कारण मामले में घसीटा गया है।
शादी से पहले 25 लाख मांगने का लगाया था आरोप
याचिका का विरोध करते हुए शिकायतकर्ता ने दावा किया कि ससुराल वालों ने उनके पति को भड़काया और उत्पीड़न में उनकी मिलीभगत थी। उन्होंने कहा कि शादी से पहले परिवार ने 25 लाख रुपये, 300 ग्राम सोना, 3 किलो चांदी और दूल्हे के लिए किराए का घर मांगा था। साथ ही शादी की सगाई बंगलूरू के लग्जरी होटल में और विवाह मैसूर में कराने की मांग की गई थी।
पति पर चलता रहेगा मुकदमा
यह मामला 2018 में हुई शादी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता महिला और अमेरिका में नौकरी करने वाले युवक का विवाह अप्रैल 2018 में संपन्न हुआ था। शादी के मात्र छह महीने बाद रिश्तों में दरार आ गई और महिला ने बासवेश्वरनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में महिला ने पति, सास-ससुर और ननद पर क्रूरता और दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। पुलिस ने सभी चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। हालांकि, पति अभी भी मामले में आरोपी बने हुए हैं, जबकि ससुराल के अन्य तीन सदस्यों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कार्यवाही रद्द करने की मांग की।
सिर्फ 19 दिन ही साथ रहे पति-पत्नी
अदालत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि दंपति साथ में महज 19 दिन ही रहे थे। उसके बाद महिला थोड़े समय के लिए ससुराल में रहीं। न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने टिप्पणी की कि लगाए गए आरोप ज्यादातर संयुक्त परिवार में होने वाले सामान्य घरेलू मतभेद और छोटी-मोटी नाराजगियों को दर्शाते हैं, जिन्हें आपराधिक स्तर पर ले लिया गया है। अदालत ने कहा कि कथित दहेज मांगें मुख्य रूप से शादी से पहले की चर्चाओं से जुड़ी थीं, जो शादी के खर्चों पर आधारित थीं, न कि क्रूरता का गठन करने वाली ठोस मांगें।
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