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Hindi News ›   India News ›   Karnataka High Court issues guidelines for quick disposal of criminal cases against politicians news in Hindi

Karnataka: राजनेताओं के खिलाफ आपराधिक मामलों का होगा जल्दी निपटारा, कर्नाटक हाईकोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश

Sun, 29 May 2022 05:58 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 29 May 2022 05:58 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने राज्य के एक विधायक के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाली शिकायत के मामले में अत्यधिक देरी का हवाला देते हुए ऐसे मामलों को जल्दी निपटाने के लिए एक अंतरिम आदेश के जरिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

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Karnataka High Court issues guidelines for quick disposal of criminal cases against politicians news in Hindi
Karnataka High Court - फोटो : File

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में राजनेताओं और प्रभावशाली शख्सियतों के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्दी निपटारे के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें गंभीर अपराधों के लिए 90 दिनों की समयसीमा भी शामिल है। 

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हाईकोर्ट की ओर से जारी 17 दिशानिर्देशों में शिकायतकर्ता की जान और हितों की सुरक्षा के लिए गवाह सुरक्षा योजना को लागू करना भी शामिल है। 

न्यायाधीश एस सुनील दत्त यादव ने छोटे-मोटे अपराधों के लिए 60 दिन और गंभीर व जघन्य अपराधों के लिए 90 दिन की समयसीमा तय की है। हालांकि, अगर जांच एजेंसी वैध कारण पेश करती है तो इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है।
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दो बार के विधायक पर लगा भ्रष्टाचार का आरोप
यह अंतरिम आदेश 17 मई को सुजीत मुलगुंड की याचिका पर जारी हुआ था। सुजीत ने बेलगाम दक्षिण क्षेत्र से दो बार विधायक रहे अभय कुमार पाटिल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और उनकी आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग की है।
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आरोप लगाया गया है कि शिकायत दर्ज करवाने के बाद से ही शिकायतकर्ता को लगातार जान से मार दिए जाने की धमकियां मिल रही हैं। आरोप है कि पाटिल और उनके लोग शिकायत वापस लेने के लिए सुजीत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

सुजीत ने पाटिल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की निजी शिकायत दर्ज कराई है। 

जांच में बाधा आए तो मजिस्ट्रेट को बताए पुलिस
मामले में अत्यधिक देरी होने का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायत मूल रूप से साल 2012 में दर्ज कराई गई थी। लेकिन, अब तक पुलिस की ओर से कोई आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है। अब मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) बेलगावी कर रही है।


अन्य दिशानिर्देशों में कोर्ट ने कहा है कि जांच करने वाली पुलिस को आरोपी की ओर से जांच में किसी भी तरह के हस्तक्षेप और जांच में आने वाली बाधाओं के बारे में मजिस्ट्रेट को सूचित करना चाहिए।

इसके अलावा जरूरी प्रशिक्षण के साथ जांच करने वाली विशेष शाखाओं की स्थापना और अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश भी दिया गया। 

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