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Karnataka High Court : पत्नी को सिर्फ ‘दुधारू गाय’ समझना क्रूरता, निठल्ले पति से तलाक को दी मंजूरी

Thu, 21 Jul 2022 05:57 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी/अमर उजाला ब्यूरो, बंगलूरू/नई दिल्ली।
एजेंसी/अमर उजाला ब्यूरो, बंगलूरू/नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 21 Jul 2022 05:57 AM IST
सार

पीठ ने कहा पति ने अपनी पत्नी को पैसा कमाकर देने वाली गाय की तरह समझा। वह पत्नी से केवल पैसा पाने के लिए संबंध रखता रहा, भावनात्मक संबंध नहीं रखा। यह पत्नी को मानसिक और भावनात्मक पीड़ा देती क्रूरता है।

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Karnataka High Court husband treating wife as cash cow amounts to cruelty
Karnataka High Court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पति के निठल्ले रहने और पत्नी से भावनात्मक संबंध रखे बिना उसे नियमित पैसा पाने का साधन यानी ‘दुधारू गाय’ समझना पत्नी के प्रति क्रूरता है। ऐसी पत्नी चाहे तो उसे तलाक मिलना चाहिए। कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक मामले में महिला की तलाक याचिका स्वीकारते हुए यह टिप्पणियां कीं।

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महिला ने हाईकोर्ट को बताया कि वह तलाक चाहती है लेकिन परिवार अदालत ने 2020 में उसकी अर्जी नामंजूर कर दी थी। उसका पति शादी के बाद से अब तक किसी न किसी बहाने उससे 60 लाख रुपये ले चुका है। महिला ने बैंक व अन्य दस्तावेजों से यह साबित किया। 
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सुनवाई के बाद जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस जेएम खाजी की बेंच ने कहा, पति ने अपनी पत्नी को पैसा कमाकर देने वाली गाय की तरह समझा। वह पत्नी से केवल पैसा पाने के लिए संबंध रखता रहा, भावनात्मक संबंध नहीं रखा। यह पत्नी को मानसिक और भावनात्मक पीड़ा देती क्रूरता है।
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जमीन खरीदी, सलून खुलवाया
दंपती की चिकमंगलूर में 1999 में शादी हुई और 2001 में माता-पिता बने। पति की आर्थिक स्थिति खराब थी, कर्ज भी था, इसलिए परिवार में झगड़े होते थे। पत्नी ने यूएई जाकर नौकरी कर ली व कर्ज उतारा। पति को खेती की जमीन दिलाई। वहां सफल न हुआ तो 2012 में यूएई में सलून खुलवाया। लेकिन 2013 में पति भारत लौट आया व पत्नी से नियमित पैसा मांगता रहा। 2017 में पत्नी ने तलाक की अर्जी दी। परिवार अदालत ने अर्जी खारिज कर कहा, क्रूरता सिद्ध नहीं होती।

पत्नी से दुष्कर्म मामले में पति को राहत सुनवाई पर सुप्रीम रोक
सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी के साथ कथित दुष्कर्म के मामले में राहत देते हुए पति के खिलाफ सुनवाई पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें युवक के खिलाफ सुनवाई की मंजूरी दी गई थी।

सीजेआई एनवी रमण, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा, इस मामले में पत्नी के वकील ने एक पत्र जारी करते हुए जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा है। इसको ध्यान में रखते हुए हम मामले को एक हफ्ते बाद सूचीबद्ध करते हैं। 


पीठ ने साथ ही कहा, अगले आदेश तक मुकदमा चलाने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक रहेगी। युवक ने हाईकोर्ट में याचिका देकर उसके खिलाफ दुष्कर्म की एफआईआर को खारिज करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने युवक की याचिका खारिज करते हुए उसके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।

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