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High Court: 'बदमाशों को मौखिक समन नहीं एसएमएस या व्हाट्सएप का इस्तेमाल करें', कर्नाटक हाईकोर्ट का निर्देश

Sat, 13 Dec 2025 05:26 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 13 Dec 2025 05:26 AM IST
सार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अहम निर्देश में पुलिस को कहा है कि वे बदमाशों को थाने में हाजिर होने के लिए मौखिक रूप से नहीं कह सकते। याचिकाकर्ता ने पुलिस के मौखिक समन को मौलिक अधिकारों को उल्लंघन बताया।

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Karnataka High Court directs police use SMS or WhatsApp to miscreants instead of verbal summons
कर्नाटक हाईकोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई बदमाश वर्तमान में किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं है और किसी मामले में संदिग्ध नहीं है, तो पुलिस अब उसे मौखिक रूप से थाने में हाजिर होने के लिए नहीं बुला सकती। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों को पूछताछ के लिए बुलाना हो तो एसएमएस या व्हाट्सएप के जरिये सूचना दी जाए।
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याचिकाकर्ता ने लगाए ये आरोप
जस्टिस आर. नटराज ने यह आदेश 4 दिसंबर को सुनाया। मामला हेब्बल निवासी सुनील कुमार नामक व्यक्ति की याचिका से जुड़ा था, जिनका नाम बदमाश रजिस्टर में दर्ज था। याचिकाकर्ता ने कहा कि वह सुधर चुके हैं, लेकिन पुलिस की बार-बार मौखिक नोटिस और घर पर आने-जाने से भय और अनिश्चितता उत्पन्न होती है, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि उनके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है, फिर भी पुलिस पूछताछ में दुर्व्यवहार करती है और कभी-कभी बिना कारण हिरासत में ले लेती है। उन्होंने कहा कि न भारतीय न्याय संहिता और न ही राज्य पुलिस मैनुअल में इस तरह के मौखिक समन की अनुमति है। 
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सरकार ने कहा- हजारों बदमाशों को औपचारिक नोटिस देना कठिन
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि हजारों बदमाशों को औपचारिक नोटिस देना व्यावहारिक रूप से कठिन है, लेकिन कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मौखिक समन कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं और किसी को लंबे समय तक थाने में बैठाकर रखना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि बदमाश एक मोबाइल नंबर उपलब्ध कराएं, जिस पर उन्हें पूछताछ के लिए संदेश भेजा जा सके। यदि कोई आपराधिक गतिविधि हो या नोटिस का जवाब न मिले, तो पुलिस घर जाकर नोटिस दे सकती है।
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