{"_id":"636e50c2dc4df83f9f6dc32e","slug":"karnataka-high-court-acquits-all-accused-in-2012-rti-activist-murder-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnataka: RTI कार्यकर्ता हत्याकांड में सभी आरोपी बरी, सबूतों के अभाव में कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Karnataka: RTI कार्यकर्ता हत्याकांड में सभी आरोपी बरी, सबूतों के अभाव में कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला
Fri, 11 Nov 2022 07:10 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Fri, 11 Nov 2022 07:10 PM IST
सार
सेशन कोर्ट द्वारा दी गई इस सजा के खिलाफ सभी आरोपियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद न्यायमूर्ति के सोमशेखर और न्यायमूर्ति टी जी शिवशंकर गौड़ा की खंडपीठ ने फैसला दिया।
विज्ञापन
कोर्ट का फैसला
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
साल 2012 में कर्नाटक में आरटीआई कार्यकर्ता लिंगराजू की हत्या के मामले में आरोपियों को वहां की हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को मामले में सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। शुक्रवार को कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा दिए गए इस फैसले में आरोपियों को सबूतों के अभाव का लाभ मिला।
विज्ञापन
गौरतलब है कि आरटीआई कार्यकर्ता लिंगराजू महा प्रचंड' अखबार के संपादक भी थे। 20 नवंबर, 2012 को उनके घर के पास तीन हथियारबंद लोगों ने लिंगराजू पर हमला किया था। हमले के वक्त वह एक नल से पानी निकाल रहे थे। बाद में इस मामले में उनकी पत्नी उमा देवी ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी शिकायत में बीबीएमपी के पूर्व पार्षद गोविंदराजू पर भी आरोप लगाए थे। मृतक उमा देवी ने आरोप लगाया था कि गोविंदराजू को उसके घर पर लोकायुक्त की छापेमारी में लिंगराजू का हाथ होने का संदेह था। इसके कारण वह लिंगराजू से द्वेष रखता था।
विज्ञापन
मृतक की पत्नी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने 12 आरोपियों रंगास्वामी, आर शंकर, राघवेंद्र, गोविंदराजू, गौरम्मा (गोविंदराजू की पत्नी), चंद्रा, शंकर, उमाशंकर, वेलु, लोगनाथ, जहीर और सुरेश के खिलाफ चार्जशीट फाइल की थी। इस मामले में पूरी सुनवाई के बाद 28 अक्टूबर, 2020 को अपर सिटी सिविल एंड सेशन जज कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत अन्य आरोपों के तहत भी सजा सुनाई गई थी।
विज्ञापन
सेशन कोर्ट द्वारा दी गई इस सजा के खिलाफ सभी आरोपियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद न्यायमूर्ति के सोमशेखर और न्यायमूर्ति टी जी शिवशंकर गौड़ा की खंडपीठ ने हाल ही में अपने फैसले में आरोपियों द्वारा दायर चार आपराधिक अपीलों के बैच का निपटारा करते हुए सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ सबूतों की कमी है।