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Karnataka: 'सावरकर की कट्टरपंथी विचारधारा भारतीय संस्कृति से काफी अलग थी', कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री का बयान

Thu, 03 Oct 2024 09:55 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 03 Oct 2024 09:55 AM IST
सार

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा कि आरएसएस, हिंदू महासभा और अन्य दक्षिणपंथी समूह कट्टरवाद को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं और लोगों को इसे समझने के लिए सामाजिक और राजनीतिक रूप से जागरूक होने की जरूरत है।
 

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Karnataka Health Minister said Savarkar was nationalist but his fundamentalism different from India’s culture
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव - फोटो : एएनआई

विस्तार

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने बुधवार को कहा कि विनायक सावरकार की कट्टरपंथी विचारधारा भारतीय संस्कृति से काफी अलग थी। भले ही वह राष्ट्रवादी थे। मगर, देश में सावरकर के तर्क की नहीं बल्कि महात्मा गांधी की जीत होनी चाहिए।

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'सावरकार मांसाहारी थे, वह...'
एक किताब के विमोचन के मौके पर राव ने कहा, 'अगर हम चर्चा के जरिए कह सकते हैं कि सावरकर जीत गए हैं, तो यह सही नहीं है। वह एक मांसाहारी थे और वह गोहत्या के खिलाफ नहीं थे। वह एक चितपावन ब्राह्मण थे। सावरकर इस तरह से आधुनिकतावादी थे, लेकिन उनकी मौलिक सोच अलग थी। कुछ लोगों ने कहा कि वह बीफ खाते थे। वह खुलेआम बीफ खाने का प्रचार कर रहे थे इसलिए यह सोच अलग है। मगर, गांधीजी हिंदू धर्म में बहुत विश्वास रखते थे और उसमें रूढ़िवादी थे, लेकिन उनके कार्य अलग थे क्योंकि वह उस तरह से लोकतांत्रिक थे।'
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अली जिन्ना पर भी बोला हमला
उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना पर भी निशाना साधा। कहा कि जिन्ना 'कट्टर इस्लामी' होने के बावजूद सूअर का मांस खाते थे। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्ना एक कट्टरपंथी नहीं थे और सिर्फ सरकार में एक उच्च पद पर रहना चाहते थे और एक अलग देश का भी आह्वान किया था। साथ ही उन्होंने दोहराया कि आरएसएस, हिंदू महासभा और अन्य दक्षिणपंथी समूह कट्टरवाद को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं और लोगों को इसे समझने के लिए सामाजिक और राजनीतिक रूप से जागरूक होने की जरूरत है।
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दक्षिणपंथी समूह कट्टरवाद को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे
गुंडू राव ने कहा, 'जिन्ना भी कट्टर इस्लाम के अनुयायी थे, लेकिन वे सूअर का मांस खाते थे। जैसा कि लोग कहते हैं, इनोवेशन थ्योरी के बाद जिन्ना कट्टरपंथी नहीं थे। वे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति बनना चाहते थे और एक अलग देश चाहते थे। इसलिए उन्होंने धर्मनिरपेक्षता का पालन किया। सावरकर ऐसे नहीं थे। आरएसएस, हिंदू महासभा और अन्य दक्षिणपंथी समूह कट्टरवाद को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका जवाब हमें उनके कट्टरवाद को कम करके देना होगा। राजनीतिक और सामाजिक रूप से, लोगों को जागरूक करना और उन्हें समझाना जरूरी है। हम उन्हें ऐसे ही नहीं हरा सकते। सभी परंपराओं में, लोग कट्टरपंथी नहीं होते हैं।'

बता दें, महात्मा गांधी की 155वीं जयंती के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव एक किताब के कन्नड़ संस्करण के विमोचन कार्यक्रम में पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने सावरकार और महात्मा गांधी के बारे में यह बात कही। उन्होंने बाद में सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि किताब गोडसे की मानसिकता को दिखाती है। साथ ही यह बताती है कि सावरकर ने गोडसे की सोच को कैसे प्रभावित किया था। 


सावरकर ने गोडसे की सोच को कैसे प्रभावित किया
उन्होंने कहा, 'यह पुस्तक महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे की मानसिकता और उस दुखद पल के आसपास की घटनाओं को अच्छी तरह से प्रस्तुत करती है। यह इस पर भी प्रकाश डालती है कि सावरकर ने गोडसे की सोच को कैसे प्रभावित किया। लोकतंत्र में गांधीजी का विश्वास सावरकर की विचारधारा के बढ़ते प्रभाव और आज कट्टरवाद की बढ़ती लहर का एक शक्तिशाली प्रतिकार है।'
 

 

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