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कर्नाटक : एसएचओ ने नहीं दर्ज की एफआईआर, अदालत ने दी ये अनोखी सजा

Sun, 27 Dec 2020 03:50 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sun, 27 Dec 2020 03:50 PM IST
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Karnataka HC directs cops to clean public road for failing to register FIR
Karnataka HC

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपहरण के मामले में एफआईआर नहीं लिखने पर एक एसएचओ को अनोखी सजा सुनाई है। अदालत का यह फैसला सुर्खियों में बना हुआ है।

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कर्नाटक उच्च न्यायालय की कलबुर्गी पीठ ने बेटे के अपहरण के बाद एक महिला के गिड़गिड़ाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं करने वाले एसएचओ को एक हफ्ता तक अपने थाने और उसके सामने वाली सड़क की सफाई करने की सजा सुनाई। जस्टिस एस सुनील दत्त यादव और जस्टिस पी कृष्णा की बेंच ने 55 वर्षीय ताराबाई की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सजा दी है।अदालत की यह अनोखी सजा सुर्खियों में छा गया है। 
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कलबुर्गी इलाके में रहने वाली 55 वर्षीय ताराबाई का बेटा सुरेश 20 अक्तूबर को लापता हो गया था। ताराबाई अपनी शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंची थीं, लेकिन उनके गिड़गिड़ाने के बावजूद एसएचओ ने एफआईआर दर्ज नहीं की। एसएचओ ने मामले को क्षेत्र के बाहर का बताते हुए एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद ताराबाई ने कर्नाटक उच्च न्यायालय की कलबुर्गी पीठ में एक याचिका दायर की और पुलिस से उनके बेटे को अदालत में पेश करने की मांग की।
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सड़क की सफाई करने की मिली सजा
जस्टिस एस सुनील दत्त यादव और जस्टिस पी कृष्णा की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए पुलिस के काम करने के तरीके पर नाराजगी जताई। एसएचओ की गलती मानने पर उनको अपने थाने के सामने वाली सड़क को साफ करने की सजा सुनाई। साथ ही कोर्ट ने एसपी सिटी को पुलिसकर्मियों के लिए एफआईआर लिखने के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन करने की बात भी कही।

अदालत ने कहा, जीरो एफआईआर लिख सकते थे

अदालत ने अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर मामला आपके क्षेत्र से बाहर का था, तो 'जीरो एफआईआर' दर्ज कर मामला संबंधित थाने को सौंपना चाहिए था, लेकिन आपने ऐसा कुछ नहीं किया। अदालत ने कहा कि अधिकारी ने अपने काम को सही ढंग से नहीं किया और न ही मामले को दर्ज करने की कोशिश की। इस वजह से ताराबाई और उनके बेटे को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

एसएचओ ने मानी अपनी गलती
अदालत ने कहा, पुलिस अधिकारी ने यह बात स्वीकार कर ली है कि ताराबाई उनके पास अपने बेटे की गुमशुदगी की बात लेकर आईं थी, लेकिन वह उनकी एफआईआर नहीं लिख सके। एसएचओ की लापरवाही के कारण उनको यह सजा दी गई। हालांकि, सरकारी वकील के निवेदन पर अदालत ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की और एसएचओ ने भी ऐसी गलती दोबारा नहीं करने की बात भी अदालत के सामने लिखित रूप में कही है। 

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