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Karnataka: धर्मांतरण रोधी अध्यादेश को राज्यपाल की मंजूरी, टीपू मस्जिद में हनुमान पूजा को लेकर नाराज हुए गृह मंत्री

Tue, 17 May 2022 10:38 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 17 May 2022 10:38 PM IST
सार

अध्यादेश में कहा गया है कि कोई भी धर्मांतरित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई, बहन या अन्य व्यक्ति जिनका उनसे खून का रिश्ता है, वैवाहिक संबंध है या किसी भी तौर पर संबद्ध हों, वे इस तरह के धर्मांतरण पर शिकायत दायर कर सकते हैं।

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Karnataka Governor gives his assent for anti conversion ordinance by BS Bommai Government news in hindi
बीएस बोम्मई, मुख्यमंत्री कर्नाटक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मंगलवार को उस अध्यादेश को मंजूरी दे दी, जिसके जरिए कर्नाटक सरकार धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार विधेयक, 2021 को प्रभावी बना सकती है। इसे धर्मांतरण-रोधी विधेयक के तौर पर भी जाना जाता है। विधेयक को राज्य विधानसभा ने पिछले साल दिसंबर में पारित किया था लेकिन यह विधानपरिषद में लंबित है जहां सत्तारूढ़ भाजपा के पास बहुमत नहीं है।
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गजट अधिसूचना में कहा गया है , ‘‘कर्नाटक विधानसभा और विधानपरिषद का चूंकि सत्र नहीं चल रहा है और माननीय राज्यपाल इस बात से सहमत हैं कि ऐसी परिस्थितियां मौजूद हैं जो अध्यादेश जारी करने के लिए उन्हें फौरन कार्रवाई करने की आवश्यकता बताती हैं। ’’
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अध्यादेश में कहा गया है कि कोई भी धर्मांतरित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई, बहन या अन्य व्यक्ति जिनका उनसे खून का रिश्ता है, वैवाहिक संबंध है या किसी भी तौर पर संबद्ध हों, वे इस तरह के धर्मांतरण पर शिकायत दायर कर सकते हैं। दोषी को तीन साल की कैद की सजा हो सकती है जो बढ़ा कर पांच साल तक की जा सकती है और उसे 25,000 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा।
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टीपू मस्जिद में हनुमान पूजा की मांग पर गृह मंत्री की चेतावनी 
कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने मंगलवार को एक हिंदू संगठन को कानून-व्यवस्था को चुनौती नहीं देने की चेतावनी दी। संगठन का दावा है कि मांड्या जिले के श्रीरंगपटना में मस्जिद-ए-अला पहले एक हनुमान मंदिर था और उन्हें वहां पूजा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

‘नरेंद्र मोदी विचार मंच’ (एनएमवीएम) नामक एक संगठन ने 13 मई को मांड्या के उपायुक्त से संपर्क किया और दावा किया कि मस्जिद-ए-अला ‘मूडला बगिलु अंजनेया स्वामी मंदिर’ था, जिसे 18वीं शताब्दी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान ने नष्ट कर दिया था और वहां पर मस्जिद बनाई थी। संगठन के सचिव सी टी मंजूनाथ के नेतृत्व में संगठन ने मांग की कि हिंदुओं को मस्जिद के अंदर हनुमान की पूजा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ज्ञानेंद्र ने कहा कि उन्हें घटनाक्रम की जानकारी है और लोगों से आह्वान किया कि वे इस विवाद को अपने मुताबिक सुलझाने के लिए कानून-व्यवस्था को चुनौती न दें। उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई कानून-व्यवस्था को चुनौती देता है तो उससे उसी के मुताबिक निपटा जाएगा। इसलिए सभी को सौहार्दपूर्ण तरीके से रहना चाहिए। हम अदालत के आदेश का पालन करेंगे।’’


मांड्या के उपायुक्त को अपनी याचिका में मंजूनाथ ने कहा कि कई इतिहासकारों ने मूडला बगिलु अंजनेया स्वामी मंदिर के अस्तित्व का दस्तावेजीकरण किया है, जिसे टीपू सुल्तान ने कथित तौर पर अपने शासन के दौरान नष्ट कर दिया था और एक मस्जिद में परिवर्तित कर दिया था।
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