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हर पल मोहब्बत को यूं 'जिंदा' रख रहा है ये किसान, सच्चे प्रेमियों के लिए है मिसाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Updated Fri, 23 Feb 2018 07:49 PM IST
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मंदिर
- फोटो : TOI
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कर्नाटक में एक किसान ने अपनी पत्नी की याद में मंदिर बनाया है। राजू उर्फ राजसुस्वामी का कहना है कि यह उनकी पत्नी की प्रबल इच्छा थी। उन्होंने कहा कि यह मंदिर तब तक पूरा नहीं हुआ जब तक कि उसमें देवी देवताओं के साथ अपनी पत्नी की मूर्ति स्थापित नहीं की, और पूजना शुरू नहीं की। उन्होंने कहा कि हमारा प्यार दिव्य था।
टीआईओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक आस-पास के गावों के लोग भी अब येलंदुर तालुक जिले के कृष्णापुरा गांव में स्थित इस मंदिर में आते हैं। अब लोग इस राजाम्मा मंदिर के बारे में जानना चाहते हैं। यह मंदिर 2016 में बनाया गया था लेकिन राजू पिछले 12 वर्षों से हर दिन यहां पूजा करते हैं। मंदिर में चार देवी देवताओं भगवान शिव, शनि, सिद्दप्पाजी और नवग्रह के साथ उनकी पत्नी की मूर्ति स्थापित है।
राजू के पास गांव में तीन एकड़ जमीन है। राजू ने अपनी बहन की बेटी से शादी की थी। उन्होंने कहा कि उनके माता पिता इस शादी के खिलाफ थे हालांकि उनकी पत्नी के भाई ने इसका विरोध नहीं किया। बाद में उन्होंने किसी तरह यह शादी कर ली।
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राजू ने कहा कि शादी के कुछ दिन बाद ही उनकी पत्नी ने गांव में एक मंदिर बनाने की इच्छा जाहिर की। पत्नी के कहने पर राजू ने गांव में मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया। इसी दौरान उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। इसके बाद उन्होंने मंदिर में पत्नी की मूर्ति स्थापित करने विचार किया। इस मंदिर के बनने में करीब दो साल का समय लगा।
रााजू ने बताया कि लोगों ने उनके इस विचार का विरोध भी किया था। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ने मरने से पहले ही मौत की भविष्यवाणी कर दी थी। उनके अंदर एक विशेष शक्ति थी। वह हमेशा एक मंदिर के बारे में सोचती थीं। वह एक अध्यात्मिक महिला थीं। इस सब के बाद उनके मन में विचार आया कि उन्हें मंदिर बनवाना चाहिए, और पूजा करनी चाहिए।
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टीआईओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक आस-पास के गावों के लोग भी अब येलंदुर तालुक जिले के कृष्णापुरा गांव में स्थित इस मंदिर में आते हैं। अब लोग इस राजाम्मा मंदिर के बारे में जानना चाहते हैं। यह मंदिर 2016 में बनाया गया था लेकिन राजू पिछले 12 वर्षों से हर दिन यहां पूजा करते हैं। मंदिर में चार देवी देवताओं भगवान शिव, शनि, सिद्दप्पाजी और नवग्रह के साथ उनकी पत्नी की मूर्ति स्थापित है।
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राजू के पास गांव में तीन एकड़ जमीन है। राजू ने अपनी बहन की बेटी से शादी की थी। उन्होंने कहा कि उनके माता पिता इस शादी के खिलाफ थे हालांकि उनकी पत्नी के भाई ने इसका विरोध नहीं किया। बाद में उन्होंने किसी तरह यह शादी कर ली।
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राजू ने कहा कि शादी के कुछ दिन बाद ही उनकी पत्नी ने गांव में एक मंदिर बनाने की इच्छा जाहिर की। पत्नी के कहने पर राजू ने गांव में मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया। इसी दौरान उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। इसके बाद उन्होंने मंदिर में पत्नी की मूर्ति स्थापित करने विचार किया। इस मंदिर के बनने में करीब दो साल का समय लगा।
रााजू ने बताया कि लोगों ने उनके इस विचार का विरोध भी किया था। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ने मरने से पहले ही मौत की भविष्यवाणी कर दी थी। उनके अंदर एक विशेष शक्ति थी। वह हमेशा एक मंदिर के बारे में सोचती थीं। वह एक अध्यात्मिक महिला थीं। इस सब के बाद उनके मन में विचार आया कि उन्हें मंदिर बनवाना चाहिए, और पूजा करनी चाहिए।