Karnataka Election: जगदीश शेट्टार ने क्या कर्नाटक में हिला दी है बीएस येदियुरप्पा की नींव
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विस्तार
मूल रूप से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ करियर की शुरुआत करने वाले, पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज लिंगायत नेताओं में एक जगदीश शेट्टार कांग्रेसी हो गए हैं। उनके इस फैसले से कर्नाटक की राजनीति को समझने वालों का कहना है कि राजनीति के जिद्दी खिलाड़ी पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की नींव की ईंट हिलने का खतरा पैदा हो गया है। भाजपा के संगठन मंत्री बीएल संतोष का भी गृह राज्य कर्नाटक ही है। राजनीति को समझने वाले जानते हैं कि शेट्टार के पार्टी छोड़ देने से होने वाले नुकसान का उन्हें भी एहसास होगा। कर्नाटक से ही आने वाले भाजपा के एक पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि समझाने की कोशिशें हो रही थी। हम नाकाम रहे। शेट्टार अच्छे नेता हैं और उन्हें अपने निर्णय पर पछतावा होगा।
67 साल के जगदीश शेट्टार 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उनका टिकट कट गया। उन्होंने अपनी नाराजगी का भाजपा के केंद्रीय नेताओं को एहसास कराने का तरीका चुना, लेकिन उनके पास कोरे आश्वासन के सिवा कुछ नहीं था। बताते हैं शेट्टार का टिकट कटने में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के अहम भी कहीं न कहीं टकरा रहे थे। टीम येदियुरप्पा और भाजपा के नेताओं को उम्मीद थी कि जड़ से संघी शेट्टार मान जाएंगे। घर बैठ सकते हैं लेकिन पार्टी नहीं छोड़ेंगे। हालांकि मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई को कुछ ज्यादा सही अंदाजा था। बोम्मई ने शेट्टार को लेकर अपनी भावनाएं भी व्यक्त की हैं। लेकिन पछतावा को अपने हिस्से में न रखने का निर्णय लेकर जगदीश शेट्टार कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। यह उनके कद का ही प्रभाव है कि कांग्रेस में लाने, सदस्यता दिलाने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धा रमैया, बीके हरिप्रसाद और प्रभारी रणदीप सुरजेवाला पलकें बिछाए थे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली से बेंगलुरु की टिकट बुक करा ली थी और स्वयं जाकर जगदीश शेट्टार का कांग्रेस में स्वागत किया।
कौन हैं जगदीश शेट्टार?
कर्नाटक की हुबली विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले जदगीश शेट्टार का मूल आधार संघ का है। शेट्टार के पिता एसएस शेट्टार जनसंघ के नेता थे। हुबली-धारवाड़ के पांच बार महापौर रह चुके। चाचा सदाशिव शेट्टार दक्षिण भारत के जनसंघ के बड़े और प्रभावी नेताओं में गिने जाते थे। 1967 में वह विधायक थे। जदगीश शेट्टार की शुरुआत संघ की शाखा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई है। बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। वह शेट्टार के बचपन के दिन थे, जब उनके परिवार में जनसंघ के नेताओं का आना जाना था और हैसियत थी। उन दिनों बीएस येदियुरप्पा युवा थे। 1994 में जगदीश शेट्टार पहली बार भाजपा के टिकट पर विधायक बने थे। 1996 में भाजपा ने उन्हें प्रदेश का सचिव बनाया और 1999 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने। 2005 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने थे। इसी साल भाजपा ने जनता दल(एस) के साथ गठबंधन की सरकार बनाई थी। इसमें शेट्टार राजस्व मंत्री थे। 2008 में बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में कमल खिला। पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। इस सरकार में विधानसभा अध्यक्ष का पद जदगीश शेट्टार को मिला। 20 जुलाई 2012 को डीवी सदानंद गौड़ा के इस्तीफा देने के बाद वह राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। 6 बार लगातार विधायक का चुनाव जीतने वाले शेट्टार लिंगायतों में दूसरे सबसे बड़े नेता हैं।
येदियुरप्पा के उत्तराधिकार के बाद ही बिगड़ने शुरू हुए समीकरण
जद(एस) और कांग्रेस गठबंधन की सरकार गिरने के बाद बीएस येदियुरप्पा राज्य के मुख्यमंत्री बने। उनके शपथ लेने पर कर्नाटक भाजपा के तमाम बड़े नेताओं को कोई खास आपत्ति नहीं थी, लेकिन जब येदियुरप्पा से अपना पद छोडऩे और उत्तराधिकार तय करने के लिए कहा गया तो माना जा रहा है कि उसके बाद से समीकरण बिगड़ने लगे। लिंगायत समाज में भाजपा के नेताओं में येदियुरप्पा के बाद सबसे प्रभावी नेताओं में शेट्टार को माना जाता है। शेट्टार येदियुरप्पा के बाद अब अपना कद देखते थे। लेकिन ऐसा न हो पाया। बसाव राज बोम्मई के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी के साथ उन्होंने किसी के कैबिनेट में शामिल न होने का मंतव्य जता दिया था। माना जा रहा है कि इसे कुछ नेताओं ने नाराजगी के तौर पर लिया और इस बार उनके चुनाव लड़ने की मंशा व्यक्त करने के बाद उन्हें टिकट नहीं दिया गया।
कांग्रेस को 15-20 सीटों पर भाजपा का समीकरण बिगड़ने की उम्मीद
जगदीश शेट्टार के भाजपा छोड़कर आने के बाद कांग्रेस में जश्न का माहौल है। वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद कहते हैं कि शेट्टार का आना भाजपा में भगदड़, भ्रष्टाचार और तानाशाही को दर्शा रहा है। डीके शिवकुमार के मुताबिक अब कहने के लिए क्या बचा है। सब तो दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के नेताओं के मुताबिक मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई और येदियुरप्पा के हाथ से कर्नाटक विधानसभा का चुनाव निकल चुका है। लिंगायत मतों में बड़ा बंटवारा होगा और जगदीश शेट्टार के आने का असर दर्जन भर के करीब सीटों पर पड़ेगा। डिप्टी सीएम सावदी के कांग्रेस में आने से पहले ही भाजपा को जोर का झटका लगा था।
भाजपा को झटका तो लगा है
कर्नाटक में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कड़ी मेहनत कर रहे हैं। अमित शाह हर पल की जानकारी ले रहे हैं। प्रह्लाद जोशी लगातार प्रदेश में कैंप कर रहे हैं और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया गोट साधने में लगे हैं। इन सबके बीच में मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई को 130 जीत लेने की उम्मीद है। हालांकि जगदीश शेट्टार के साथ छोड़ने का अफसोस भी। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा शेट्टार के जाने के निर्णय पर अपना अफसोस जाहिर कर चुके हैं। वह जनता के बीच में शेट्टार को एक्सपोज करने की भी बातें कर रहे हैं। वरिष्ठ नेता ईश्वरप्पा पहले नाराजगी का संकेत देते हुए राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर चुके हैं। डिप्टी सीएम लक्ष्मण सावदी ने त्यागपत्र देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। बीके हरिप्रसाद कहते हैं कि इस तरह की भगदड़ से आप खुद ही अंदाजा लगा लीजिए कि भाजपा में क्या चल रहा है। वहीं कर्नाटक दौरे से रविवार को लौटे एक वरिष्ठ भाजपा नेता का कहना है कि कुछ नेताओं के पार्टी छोडऩे से भाजपा जैसे राजनीतिक दल पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। यह राज्य की जनता जानती है कि लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ में ऐसा कर रहे हैं।