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Karnataka: कर्नाटक चुनाव में 'नो एंट्री' के दिलचस्प मामले, किसी ने सीट बदली तो किसी ने दूसरे को सौंपा टिकट

Sun, 23 Apr 2023 07:33 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sun, 23 Apr 2023 07:33 PM IST
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सार
'प्रतिबंधित प्रवेश' वाले दो नेताओं विनय कुलकर्णी और जनार्दन रेड्डी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। कुलकर्णी के धारवाड़ जाने पर रोक लगी है। दूसरी ओर, अदालत द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद रेड्डी ने अपनी पत्नी को मैदान में उतारा।
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Karnataka Election: Curious case of two banned-entry candidates in Assembly polls, know about the cases
विनय कुलकर्णी और जनार्दन रेड्डी - फोटो : SOCIAL MEDIA

विस्तार

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार जोरों पर है। सारे दल प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोक रहे हैं। चुनाव के नामांकन की प्रक्रिया 20 अप्रैल को पूरी हो गई। इसके साथ ही राज्य की सभी सीटों के लिए उम्मीदवार तय हो गए। इस बीच राज्य में दो ऐसे मामले आए हैं जिनमें नेताओं को उनके निर्वाचन क्षेत्र में जाने से प्रतिबंधित किया गया है।

 

'प्रतिबंधित प्रवेश' वाले दो मामले क्या हैं?
'प्रतिबंधित प्रवेश' वाले दो नेताओं विनय कुलकर्णी और जी जनार्दन रेड्डी ने 10 मई को होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। कांग्रेस उम्मीदवार कुलकर्णी धारवाड़ ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके धारवाड़ जाने पर रोक लगी है। दूसरी ओर, अदालत द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद रेड्डी ने बेल्लारी शहर में अपनी पत्नी को मैदान में उतारा, क्योंकि उन्हें वहां प्रवेश करने से रोक दिया गया था।

विनय कुलकर्णी
विनय कुलकर्णी - फोटो : SOCIAL MEDIA
विनय कुलकर्णी का मामला क्या है?
पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विनय कुलकर्णी को जून 2016 में भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य योगेशगौड़ा गौदर की हत्या के मामले में नवंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने इस शर्त पर जमानत दे दी थी कि उन्हें धारवाड़ में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

बेंगलुरू में क्षेत्राधिकार विशेष अदालत ने एंट्री के उनके अनुरोध को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। बीते शुक्रवार को न्यायमूर्ति के नटराजन ने कुलकर्णी की इस याचिका को भी खारिज कर दिया था। कुलकर्णी के वकील ने तर्क दिया था कि चुनाव प्रचार के लिए उन्हें निर्वाचन क्षेत्र में रहने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने कहा कि जिस पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया था, उसे पता होना चाहिए कि अदालत ने उन्हें धारवाड़ में प्रवेश करने से मना किया था।

विनय कुलकर्णी की पत्नी शिवलीला
विनय कुलकर्णी की पत्नी शिवलीला - फोटो : SOCIAL MEDIA
कोर्ट के झटके के बाद पत्नी को मैदान में उतारा
कुलकर्णी की ओर से उनकी पत्नी शिवलीला ने नामांकन दाखिल किया है। उन्होंने मीडिया से कहा, 'हमारे समर्थक इस दृढ़ विश्वास के साथ हमारा समर्थन कर रहे हैं कि 'साहेब' यहां आएंगे। उनकी अनुपस्थिति में मैं मतदाताओं से आशीर्वाद मांग रही हूं कि वे मुझे 'साहेब' मानें।' वहीं, अपने मतदाताओं तक पहुंचने के लिए कुलकर्णी ने एक वीडियो संदेश में कहा, 'मैं आपके और अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए खुद को समर्पित कर दूंगा। आप मेरी ताकत हैं, जिन्होंने मेरा समर्थन किया।'

जनार्दन रेड्डी
जनार्दन रेड्डी - फोटो : SOCIAL MEDIA
दूसरा मामला क्या है?
पूर्व खनन कारोबारी जनार्दन रेड्डी का मामला कुलकर्णी की तुलना में बहुत अलग नहीं है। पूर्व भाजपा मंत्री, रेड्डी को शीर्ष अदालत ने अवैध खनन मामले में कर्नाटक के बल्लारी और आंध्र प्रदेश के अनंतपुर और वाईएसआर कडप्पा जिलों में प्रवेश करने से रोक दिया है। रेड्डी ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था और एक नई पार्टी कल्याण राज्य प्रगति पक्ष (KRPP) बनाई थी। उनके भाई जी करुणाकर रेड्डी और जी सोमशेखर रेड्डी भाजपा के साथ हैं और पार्टी के टिकट पर बल्लारी सिटी और हरपनहल्ली से चुनाव लड़ रहे हैं।

जनार्दन रेड्डी के लिए बल्लारी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है, इसलिए उन्होंने कोप्पल जिले में पड़ोसी गंगावती सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। केआरपीपी नेता ने अपने भाई सोमशेखर रेड्डी के खिलाफ बल्लारी सिटी निर्वाचन क्षेत्र से अपनी पत्नी लक्ष्मी अरुणा जी को मैदान में उतारा है।

इसे पहले जनार्दन रेड्डी ने कहा था, 'मैं केवल उन सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं जहां मेरे पास चुनाव जीतने की गुंजाइश है। मेरा लक्ष्य 20 से 28 सीटें जीतना है। मैं बूथ स्तर पर पार्टी का निर्माण कर रहा हूं।' प्रवेश वर्जित होने के कारण रेड्डी अपनी पत्नी या किसी अन्य उम्मीदवार के लिए प्रचार नहीं कर सकते हैं। पार्टी बेल्लारी जिले को अपना गढ़ मानती है।

कर्नाटक चुनाव का कार्यक्रम क्या है?
कर्नाटक में 13 अप्रैल को अधिसूचना जारी होने के साथ ही चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। प्रत्याशियों ने 20 अप्रैल तक नामांकन दाखिल किया। 21 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की गई। वहीं, 24 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए राज्य में 10 मई को मतदान होगा। वहीं, 13 मई को राज्य के चुनावी नतीजे आएंगे।
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