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karnataka election 2023: कांग्रेस की विजय यात्रा के चाणक्य डीके शिवकुमार, सीएम पद के प्रबल दावेदार
Sun, 14 May 2023 04:49 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Sun, 14 May 2023 04:49 AM IST
सार
राज्य चुनाव में निभाई भूमिका के लिए शिवकुमार को सीएम पद की रेस में माना जाता रहा है। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर कभी इस बात से इंकार नहीं किया लेकिन हमेशा यही कहा जो आलाकमान तय करेगा, वो स्वीकार होगा।
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डीके शिवकुमार
- फोटो : ANI
विस्तार
2020 में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के बाद 60 वर्षीय डीके शिवकुमार ने कांग्रेस को फिर सत्ता में लाने को ही अपना मिशन बना लिया था। शिवकुमार राज्य में कांग्रेस की वापसी को लेकर इस कदर आश्वस्त थे कि एक हफ्ते पहले दिए एक इंटरव्यू में दो टूक कहा था कि भाजपा चाहे जो दावे करती रही कांग्रेस 140 सीटें हासिल करने जा रही है। कर्नाटक के सबसे अमीर नेताओं में शुमार डीके शिवकुमार के सियासी सफर पर एक नजर...
कुर्सी नहीं पार्टी की जीत ही लक्ष्य
राज्य चुनाव में निभाई भूमिका के लिए शिवकुमार को सीएम पद की रेस में माना जाता रहा है। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर कभी इस बात से इंकार नहीं किया लेकिन हमेशा यही कहा जो आलाकमान तय करेगा, वो स्वीकार होगा। सोनिया गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले शिवकुमार इस बात को भी दोहराते रहे हैं कि सीएम की कुर्सी नहीं बल्कि राज्य में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करना ही उनका एकमात्र लक्ष्य है।
भ्रष्टाचार पर भाजपा को घेरा
कांग्रेस ने सिद्धरमैया के नाम पर राज्य में जातीय समीकरण साधे, वहीं शिवकुमार कदम-कदम पर मौके की नजाकत भांप उचित रणनीति तय करते दिखे। भाजपा ने जब राज्य में सांप्रदायिकता के मुद्दे पर सिद्धरमैया जैसे नेताओं को जुबानी जंग में घसीटने की कोशिश की तो शिवकुमार ने पार्टी कार्यकर्ताओं को जमीनी मुद्दों पर ही ध्यान देने की नसीहत दी। पार्टी के नेता भी मानते हैं कि संगठनात्मक रूप से पार्टी को मजबूत करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोम्मई सरकार को घेरने की उनकी रणनीति भाजपा की हार की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
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खुद भी आरोपों में घिर चुके हैं
पूर्व की कांग्रेस सरकार के दौरान मंत्री रहे शिवकुमार के खिलाफ आयकर विभाग और ईडी ने कई मामले दर्ज कर रखे हैं। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगते रहे हैं। उन्हें 3 सितंबर 2019 को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 23 अक्तूबर, 2019 को जमानत मिली। अगस्त, 2017 में उनके 70 ठिकानों पर आईटी छापे मारे गए थे।
छात्र नेता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन किया शुरू
शिवकुमार ने 1980 के दशक में एक छात्र नेता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया। पहला चुनाव सथानूर विधानसभा क्षेत्र से 1989 में लड़ा था जब वह सिर्फ 27 वर्ष के थे। अब तक आठ बार विधायक रह चुके हैं।
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कुर्सी नहीं पार्टी की जीत ही लक्ष्य
राज्य चुनाव में निभाई भूमिका के लिए शिवकुमार को सीएम पद की रेस में माना जाता रहा है। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर कभी इस बात से इंकार नहीं किया लेकिन हमेशा यही कहा जो आलाकमान तय करेगा, वो स्वीकार होगा। सोनिया गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले शिवकुमार इस बात को भी दोहराते रहे हैं कि सीएम की कुर्सी नहीं बल्कि राज्य में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करना ही उनका एकमात्र लक्ष्य है।
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भ्रष्टाचार पर भाजपा को घेरा
कांग्रेस ने सिद्धरमैया के नाम पर राज्य में जातीय समीकरण साधे, वहीं शिवकुमार कदम-कदम पर मौके की नजाकत भांप उचित रणनीति तय करते दिखे। भाजपा ने जब राज्य में सांप्रदायिकता के मुद्दे पर सिद्धरमैया जैसे नेताओं को जुबानी जंग में घसीटने की कोशिश की तो शिवकुमार ने पार्टी कार्यकर्ताओं को जमीनी मुद्दों पर ही ध्यान देने की नसीहत दी। पार्टी के नेता भी मानते हैं कि संगठनात्मक रूप से पार्टी को मजबूत करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोम्मई सरकार को घेरने की उनकी रणनीति भाजपा की हार की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
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खुद भी आरोपों में घिर चुके हैं
पूर्व की कांग्रेस सरकार के दौरान मंत्री रहे शिवकुमार के खिलाफ आयकर विभाग और ईडी ने कई मामले दर्ज कर रखे हैं। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगते रहे हैं। उन्हें 3 सितंबर 2019 को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 23 अक्तूबर, 2019 को जमानत मिली। अगस्त, 2017 में उनके 70 ठिकानों पर आईटी छापे मारे गए थे।
छात्र नेता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन किया शुरू
शिवकुमार ने 1980 के दशक में एक छात्र नेता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया। पहला चुनाव सथानूर विधानसभा क्षेत्र से 1989 में लड़ा था जब वह सिर्फ 27 वर्ष के थे। अब तक आठ बार विधायक रह चुके हैं।