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हम साथ-साथ हैं: नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार बोले- न कोई मतभेद, न कोई भ्रम
Sat, 29 Nov 2025 12:05 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 29 Nov 2025 12:05 PM IST
सार
मुख्यमंत्री ने कहा, 'भाजपा और जेडीएस को झूठे आरोप लगाने की आदत है। इन दलों ने बयान दिया है कि वे अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे। उनके पास सिर्फ 60 विधायक हैं, और जेडीएस के पास 18 हैं। वे हमारी संख्या का मुकाबला नहीं कर सकते।'
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नाश्ते के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने दिया एकजुटता का संदेश
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने एकजुटता का संदेश दिया है। करीब एक घंटे चले नाश्ते के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी एकजुट है और पार्टी आलाकमान जो भी तय करेगा, दोनों नेता उसका पालन करेंगे।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया बोले- हमारे बीच कोई मतभेद नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'कल से कोई असमंजस नहीं रहेगा। अभी भी कोई असमंजस नहीं है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स से गलतफहमी पैदा हुई। हमने तय किया है कि पार्टी आलाकमान जो भी तय करेगा, हम उसका पालन करेंगे।' सिद्धारमैया ने कहा कि 'हमारा एजेंडा 2028 का विधानसभा चुनाव है। निकाय चुनाव भी अहम है। हमने उन पर चर्चा की। हमने 2028 में कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाने पर भी चर्चा की। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है और भविष्य में भी कोई मतभेद नहीं होंगे।'
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विपक्षी पार्टियों भाजपा और जेडीएस पर निशाना साधा और दोनों पार्टियों पर फर्जी अफवाह फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा 'भाजपा और जेडीएस को झूठे आरोप लगाने की आदत है। इन दलों ने बयान दिया है कि वे अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे। उनके पास सिर्फ 60 विधायक हैं, और जेडीएस के पास 18 हैं। वे हमारी संख्या का मुकाबला नहीं कर सकते। हमारे पास 140 विधायक हैं। यह एक बेकार की कोशिश है। हम उनके झूठे आरोपों का सामना करेंगे।'
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क्या बोले डीके शिवकुमार?
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने इस प्रेस वार्ता में कहा, 'राज्य के लोग अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं। हम अपने वादे के मुताबिक काम कर रहे हैं। हमें लोगों की इच्छाएं पूरी करनी हैं। हम उस दिशा में काम कर रहे हैं। हाईकमान जो भी कहेगा, हम उसे मानेंगे। पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। अभी भी हम मिलकर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जो भी कहा, मैं उनके साथ हूं। हम मिलकर काम कर रहे हैं।'
ये भी पढ़ें- Karnataka: 'कांग्रेस मेरे लिए मंदिर है...जल्द दिल्ली जाएंगे', नेतृत्व विवाद पर डीके शिवकुमार ने तोड़ी चुप्पी
उन्होंने आगे कहा, 'जहां तक नेतृत्व की बात है, हम अपनी पार्टी हाईकमान को मानते हैं। वे जो भी कहते हैं, वो ही हमारा फैसला है। हम पार्टी के वफादार सिपाही रहे हैं। हम जानते हैं कि हमारे देश में पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है। लेकिन हमें भरोसा है कि कर्नाटक एक बड़ी भूमिका निभाएगा, हम 2028 में सरकार दोहराएंगे और मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के नेतृत्व में 2029 में भी आगे बढ़ेंगे।' डीके शिवकुमार ने कहा, 'हमें जो भी संदेश देना था, मुख्यमंत्री और मैंने सभी कांग्रेस सदस्यों को दे दिया है। हम उस पर कायम हैं, हम उसके लिए समर्पित हैं।'
क्यों शुरू हुई नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा?
2023 के विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सीएम पद को लेकर रस्साकसी शुरू हो गई थी। दोनों सीएम पद पर अपनी दावेदारी जता रहे थे। बात इतनी बढ़ी कि दोनों नेताओं को पार्टी आलाकमान ने दिल्ली बुलाया। दिल्ली में समझौते के बाद तय हुआ कि सिद्धारमैया कर्नाटक सरकार की कमान संभालेंगे और शिवकुमार डिप्टी सीएम का पद संभालेंगे। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के लिए सीएम पद संभालने का समझौता हुआ। हालांकि दोनों ही नेताओं और पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस रोटेशन फार्मूले की बात को कभी स्वीकार नहीं किया। हालांकि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार दो खेमों में बंटी नजर आई। कई विधायकों और मंत्रियों ने सिद्धारमैया का समर्थन किया तो कई ने शिवकुमार के समर्थन में आवाज बुलंद की। अब जब नवंबर में सिद्धारमैया सीएम पद पर ढाई साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं तो एक बार फिर से नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा ने जोर पकड़ लिया।
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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया बोले- हमारे बीच कोई मतभेद नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'कल से कोई असमंजस नहीं रहेगा। अभी भी कोई असमंजस नहीं है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स से गलतफहमी पैदा हुई। हमने तय किया है कि पार्टी आलाकमान जो भी तय करेगा, हम उसका पालन करेंगे।' सिद्धारमैया ने कहा कि 'हमारा एजेंडा 2028 का विधानसभा चुनाव है। निकाय चुनाव भी अहम है। हमने उन पर चर्चा की। हमने 2028 में कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाने पर भी चर्चा की। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है और भविष्य में भी कोई मतभेद नहीं होंगे।'
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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विपक्षी पार्टियों भाजपा और जेडीएस पर निशाना साधा और दोनों पार्टियों पर फर्जी अफवाह फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा 'भाजपा और जेडीएस को झूठे आरोप लगाने की आदत है। इन दलों ने बयान दिया है कि वे अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे। उनके पास सिर्फ 60 विधायक हैं, और जेडीएस के पास 18 हैं। वे हमारी संख्या का मुकाबला नहीं कर सकते। हमारे पास 140 विधायक हैं। यह एक बेकार की कोशिश है। हम उनके झूठे आरोपों का सामना करेंगे।'
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क्या बोले डीके शिवकुमार?
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने इस प्रेस वार्ता में कहा, 'राज्य के लोग अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं। हम अपने वादे के मुताबिक काम कर रहे हैं। हमें लोगों की इच्छाएं पूरी करनी हैं। हम उस दिशा में काम कर रहे हैं। हाईकमान जो भी कहेगा, हम उसे मानेंगे। पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। अभी भी हम मिलकर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जो भी कहा, मैं उनके साथ हूं। हम मिलकर काम कर रहे हैं।'
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उन्होंने आगे कहा, 'जहां तक नेतृत्व की बात है, हम अपनी पार्टी हाईकमान को मानते हैं। वे जो भी कहते हैं, वो ही हमारा फैसला है। हम पार्टी के वफादार सिपाही रहे हैं। हम जानते हैं कि हमारे देश में पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है। लेकिन हमें भरोसा है कि कर्नाटक एक बड़ी भूमिका निभाएगा, हम 2028 में सरकार दोहराएंगे और मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के नेतृत्व में 2029 में भी आगे बढ़ेंगे।' डीके शिवकुमार ने कहा, 'हमें जो भी संदेश देना था, मुख्यमंत्री और मैंने सभी कांग्रेस सदस्यों को दे दिया है। हम उस पर कायम हैं, हम उसके लिए समर्पित हैं।'
क्यों शुरू हुई नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा?
2023 के विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सीएम पद को लेकर रस्साकसी शुरू हो गई थी। दोनों सीएम पद पर अपनी दावेदारी जता रहे थे। बात इतनी बढ़ी कि दोनों नेताओं को पार्टी आलाकमान ने दिल्ली बुलाया। दिल्ली में समझौते के बाद तय हुआ कि सिद्धारमैया कर्नाटक सरकार की कमान संभालेंगे और शिवकुमार डिप्टी सीएम का पद संभालेंगे। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के लिए सीएम पद संभालने का समझौता हुआ। हालांकि दोनों ही नेताओं और पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस रोटेशन फार्मूले की बात को कभी स्वीकार नहीं किया। हालांकि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार दो खेमों में बंटी नजर आई। कई विधायकों और मंत्रियों ने सिद्धारमैया का समर्थन किया तो कई ने शिवकुमार के समर्थन में आवाज बुलंद की। अब जब नवंबर में सिद्धारमैया सीएम पद पर ढाई साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं तो एक बार फिर से नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा ने जोर पकड़ लिया।
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