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कर्नाटक में बस किराया बढ़ाने पर घमासान: परिवहन मंत्री सुरेश बोले- निगमों को बचाने के लिए जरूरी था फैसला

Wed, 04 Nov 2026 03:40 PM IST
अमन मौर्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कर्नाटक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कर्नाटक Published by: अमन मौर्या Updated Wed, 04 Nov 2026 03:40 PM IST
सार

कर्नाटक सरकार ने राज्य में बस किराए बढ़ाने का फैसला किया है। परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने कहा कि इसका उद्देश्य निगमों को आर्थिक रूप से बचाना है। 'वायु वज्र' एयरपोर्ट बस का किराया भी 405 से बढ़ाकर 425 रुपये कर दिया गया है।

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रोडवेज बस (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक सरकार द्वारा राज्य में बसों के किराए में बढ़ोत्तरी किए जाने के बाद विपक्ष ने खूब विरोध किया। इस बीच परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने राज्य में बस किराया बढ़ाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सरकार का मकसद मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) और बंगलूरु महानगर परिवहन निगम (बीएमटीसी) जैसे सार्वजनिक परिवहन संस्थानों को आर्थिक रूप से बचाना है। पड़ोसी राज्यों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और महाराष्ट्र की सरकारों ने भी बस किराये में बढ़ोतरी की है। ऐसे में कर्नाटक सरकार ने भी किराया बढ़ाने का फैसला किया है। मंत्री के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य परिवहन निगमों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखना है।
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मंत्री बायराथी सुरेश ने बताया कि केएसआरटीसी की लग्जरी बसों 'राजहंसा' और एसी बसों का किराया बाजार में उपलब्ध प्रतिस्पर्धी कीमतों को ध्यान में रखकर तय किया गया है। इसके अलावा, बंगलूरु एयरपोर्ट जाने वाली 'वायु वज्र' सिटी बस सेवा का अधिकतम किराया भी बढ़ाया गया है। पहले इस सेवा का अधिकतम किराया 405 रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 425 रुपये कर दिया गया है।
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परिवहन मंत्री ने क्या कहा?
डीजल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि चारों परिवहन निगमों को कुल मिलाकर नौ हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। वित्तीय नुकसान के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि परिवहन निगमों को हर साल करीब दो हजार करोड़ का घाटा हो रहा है। इसके पहले मंत्री ने भाजपा को विरोध प्रदर्शन की भी आलोचना की और कहा कि कर्नाटक में सार्वजनिक परिवहन किराया कई अन्य राज्यों की तुलना में कम है। उन्होंने भाजपा शासित राज्यों के साथ दरों की भी तुलना की और सवाल किया कि क्या घाटे में चल रहे सार्वजनिक निगमों को वित्तीय व्यवहार्यता में बहाल करने के बजाय बंद कर दिया जाना चाहिए। बता दें कि इसके पहले किरायों में आखिरी बार पिछले साल पांच जनवरी को संशोधन किया गया था। उस समय कीमतों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी।
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