कर्नाटक का एक गांव, जहां हर घर में शिक्षक, बड़ी खास है कहानी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश में शिक्षा के गिरते स्तर पर को लेकर खूब हल्ला मचता है पर इसमें सुधार के लिए कोई मुकम्मल प्रयास नहीं किए जाते। लेकिन कर्नाटक का एक गांव पूरे देश के लिए नजीर बन रहा है जहां शिक्षा के प्रति समर्पण ऐसा है कि हर घर में एक शिक्षक आपको जरूर मिल जाएगा। और ये सब संभव हो पाया है गांव के एक शख्स की वजह से जिसकी जगाई अलख ने हर किसी को शिक्षक बनने और शिक्षा का उजाला फैलाने के लिए प्रोत्साहित किया।
वेबसाइट SCOOPWHOOP.com के अनुसार कर्नाटक के बेलागावी गांव की कुल आबादी 6000 के करीब है और गांव के 600 से ज्यादा लोग शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। देश में शायद ही किसी अकेले गांव में इतनी संख्या में शिक्षक हों। गांव वालों की मानें तो यह संभव हो पाया है शिवानंद भारती स्वामी की वजह से। 1970 के दशक में शिवानंद ने कुछ शिक्षकों के सहयोग से गांव में एक एजुकेशन सोसायटी की स्थापना की। इसका मकसद था गांव के लोगों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना।
असल में इतनी बड़ी आबादी वाले गांव में मात्र एक प्राइमरी स्कूल था और आगे की शिक्षा के लिए उन्हें नजदीक के कस्बे में जाना पड़ता था। लेकिन शिवानंद की जगाई अलख कुछ ऐसी जगी कि शिक्षा के प्रति गांव वालों का जबरदस्त रुझान हो गया। आलम ये है कि लोगों ने शिक्षा को व्यवसाय के रूप में अपना लिया।
आज गांव के हर घर से एक शिक्षक मिल जाएगा। हालांकि इनमें से ज्यादातर प्राइवेट कालेजों में पढ़ाते हैं। इसके अलावा काफी संख्या में गांव के युवाओं ने शिक्षक की पढ़ाई पूरी कर ली है और नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
गांव में शिक्षकों का सबसे बड़ा परिवार शब्बीर मिराजन्नावर का है जो फिलहाल कर्नाटक स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन के राज्य सचिव हैं। जानकर आश्चर्य होगा कि उनके परिवार के 13 लोग इस व्यवसाय में हैं।
दूसरी ओर स्वामी शिवानंद ने जो शिक्षा का अभियान गांव में शुरू किया था उसके बाद गांव में प्राइमरी स्कूल, एक हाईस्कूल, एक प्री यूनिवर्सिटी कालेज, एक डिग्री कालेज, एक संस्कृत स्कूल और एक मेडिकल कालेज भी है।