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30 हजार मुस्लिमों से धोखा करने वाले को मंत्री देने वाले थे 600 करोड़, आईएएस ने फेल किया प्लान
Sun, 16 Jun 2019 06:53 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sun, 16 Jun 2019 06:53 AM IST
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mansoor khan
- फोटो : Social Media
इस्लामिक बैंक के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले मोहम्मद मंसूर खान को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इसी क्रम में अब एक नया मामला सामने आया है।
दरअसल कर्नाटक सरकार के एक मंत्री मंसूर खान को बेलआउट पैकेज के तौर पर 600 करोड़ रुपए देने वाले थे। हालांकि ऐसा हो पाता इससे पहले ही एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने इस प्लान को फेल कर दिया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक मंसूर खान ने फरार होने से पहले एक मुस्लिम नेता के जरिए मंत्री से मुलाकात की थी। यह घोटाला लगभग 1700 करोड़ रुपए का है। जिसमें 30 हजार मुस्लिम निवेशकों ने अधिक फायदे के लिए अपनी मोटी रकम मंसूर खान को दे दी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक मंसूर खान ने लोन लेने के लिए एक बैंक से संपर्क किया था। लेकिन बैंक को मंसूर खान के धोखाधड़ी के नोटिस के बारे में पता चल गया। इसके बाद बैंक ने मंसूर खान से राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण-पत्र लाने को कहा। मंसूर ने सत्ता में अपनी जान पहचान के चलते एनओसी का जुगाड़ कर लिया।
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लेकिन जब यह मामला एक आईएएस अधिकारी के पास पहुंचा तो उसने दस्तावेज पर साइन करने से मना कर दिया। मंत्री के दबाव बनाने के बावजूद भी अधिकारी ने साइन नहीं किए।
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दरअसल कर्नाटक सरकार के एक मंत्री मंसूर खान को बेलआउट पैकेज के तौर पर 600 करोड़ रुपए देने वाले थे। हालांकि ऐसा हो पाता इससे पहले ही एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने इस प्लान को फेल कर दिया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक मंसूर खान ने फरार होने से पहले एक मुस्लिम नेता के जरिए मंत्री से मुलाकात की थी। यह घोटाला लगभग 1700 करोड़ रुपए का है। जिसमें 30 हजार मुस्लिम निवेशकों ने अधिक फायदे के लिए अपनी मोटी रकम मंसूर खान को दे दी थी।
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रिपोर्ट के मुताबिक मंसूर खान ने लोन लेने के लिए एक बैंक से संपर्क किया था। लेकिन बैंक को मंसूर खान के धोखाधड़ी के नोटिस के बारे में पता चल गया। इसके बाद बैंक ने मंसूर खान से राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण-पत्र लाने को कहा। मंसूर ने सत्ता में अपनी जान पहचान के चलते एनओसी का जुगाड़ कर लिया।
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लेकिन जब यह मामला एक आईएएस अधिकारी के पास पहुंचा तो उसने दस्तावेज पर साइन करने से मना कर दिया। मंत्री के दबाव बनाने के बावजूद भी अधिकारी ने साइन नहीं किए।