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Kargil Vijay Diwas: जब मुशर्रफ के चेहरे से हटा नकाब.. दुनिया की खुफिया एजेंसियों ने देखी भारत के R&AW की ताकत

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 26 Jul 2025 10:08 AM IST
सार

Kargil Vijay Diwas: 26 साल पहले जब पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भारत पर नापाक नजर  डाली थी। हालांकि, देश की खुफिया एजेंसी 'रॉ' ने पूर्व राष्ट्रपति और पाकिस्तानी सेना में अधिकारी रहे परवेज मुशर्रफ को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया था। जब R&AW ने मुशर्रफ के चेहरे से नकाब हटाया था तो दुनिया की टॉप सीक्रेट एजेंसियों ने भारत का लोहा माना था। कारगिल विजय दिवस के दिन जानिए खास कहानी

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Kargil Vijay Diwas When Indian Agency R&AW exposed PAK and Musharraf global intelligence saw power of India
कारगिल विजय के बाद भारत ने मुशर्रफ को किया था बेनकाब - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कारगिल की लड़ाई के दौरान भारतीय खुफिया एजेंसी 'रिसर्च एंड एनॉलिसिस विंग' (रॉ) ने जब पाकिस्तानी सेना के प्रमुख परवेज मुशर्रफ और उनके विश्वासपात्र ले. जन. मोहम्मद अजीज खान के मध्य हुई बातचीत को इंटरसेप्ट कर लिया था। इतना ही नहीं, बातचीत का वह टेप, पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भी सुनवाया गया था। 'रॉ' के इस कदम के बाद पाकिस्तान सहित दुनिया की तमाम खुफिया एजेंसियां हैरान रह गई थी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ मौन थे। रॉ, ने परवेज मुशर्रफ की साजिश को बे-नकाब कर दिया था। पाकिस्तानी सेना प्रमुख यह सोचकर चल रहे थे कि उन्होंने कारगिल में जो साजिश रची है, भारत को उसके बारे में कुछ पता नहीं है। मुशर्रफ ने रेडियो पर 'बाल्टी और पश्तो' भाषा में कई 'संदेश' जारी कराए थे। उस वक्त 'एलओसी' पर पाकिस्तान के जितने भी जेहादी सक्रिय थे, वे आपसी बोलचाल के लिए इन्हीं दो भाषाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। मुशर्रफ का मकसद, भारतीय सेना को गुमराह करना था। सेना यह समझे कि कुछ जेहादी, सीमा पार आ गए होंगे। सच यह था कि जेहादियों के वेश में पाकिस्तानी सेना, कारगिल में प्रवेश कर चुकी थी। 

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'रॉ'/'मिलिट्री इंटेलीजेंस' को गुमराह करने की कोशिश...
पूर्व सेनाध्यक्ष वीपी मलिक के मुताबिक, 'रॉ' और 'मिलिट्री इंटेलीजेंस' को गुमराह करने के मकसद से परवेज मुशर्रफ ने कारगिल में एलओसी पर झूठे रेडियो संदेश प्रसारित कराए थे। इन संदेशों के माध्यम से ऐसे हालात बयां किए जा रहे थे, जिससे भारतीय एजेंसियों को यह लगे कि कारगिल क्षेत्र में जेहादी ही सक्रिय हैं। पाकिस्तान सेना की घुसपैठ जैसा कुछ नहीं है। रेडियो संदेशों में कहा गया कि पाकिस्तानी सेना, जेहादियों का साथ नहीं दे रही है। ये सब भारतीय सेना को यह विश्वास दिलाने की चाल थी कि एलओसी पर जो कुछ चल रहा है, उसमें पाकिस्तानी सेना शामिल नहीं है। कारगिल की लड़ाई का खाका जनरल मुशर्रफ ने ही तैयार किया था। पाकिस्तान सरकार, इसके बहुत से पहलुओं से अनभिज्ञ थी। प्रारंभ में तो पीएम नवाज शरीफ और उनकी कैबिनेट तक को लड़ाई के प्लान की भनक नहीं लग सकी। जनरल मुशर्रफ ने कारगिल लड़ाई को लेकर पाकिस्तान की तीनों सेनाओं के बीच खाई पैदा करने का प्रयास किया। पाकिस्तानी वायु सेना और नौसेना को मुशर्रफ की 'जंग' के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। जब भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया तो पाकिस्तान के हुक्मरान को जनरल मुशर्रफ के 'धोखे' की मार का अहसास हुआ। 
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परवेज मुशर्रफ को लगता था, कारगिल जीत लेंगे...
मुशर्रफ की योजना थी कि वे पाकिस्तानी थल सेना की मदद से कारगिल की लड़ाई जीत सकते हैं। वे अति उत्साह का शिकार हो चुके थे। उन्होंने पाकिस्तानी नौसेना और एयरफोर्स से भी लड़ाई की अहम जानकारियां छिपा लीं। कारगिल की लड़ाई में भारतीय सेना के प्रमुख रहे वेद प्रकाश मलिक ने अपनी किताब 'फ्रॉम सरप्राइज टू विक्टरी' में ऐसे कई खुलासे किए हैं। तब पाकिस्तानी फौज के जनरल परवेज मुशर्रफ के धोखे को समझने वाला कोई नहीं था। रॉ ने इस लड़ाई के दौरान पाकिस्तान में कई फोन कॉल इंटरसेप्ट की थी। यहां तक कि परवेज मुशर्रफ और उनके विश्वासपात्र ले. जन. मोहम्मद अजीज खान के बीच जो कुछ बातचीत हुई, रॉ ने उसे भी इंटरसेप्ट कर लिया था। रॉ के तत्कालीन सचिव अरविंद दवे की टीम ने जब मुशर्रफ का फोन कॉल इंटरसेप्ट किया तो पाकिस्तान की सच्चाई सामने आने में देर नहीं लगी। मुशर्रफ, तब बीजिंग में थे। खास बात है कि अरविंद दवे ने मिलिट्री इंटेलिजेंस चीफ को फोन टेपिंग की बात बताने के लिए वह कॉल की थी। गलती से वह कॉल, जन. मलिक के फोन पर लग गई।
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मुशर्रफ ने पूछा, भारत का चॉपर कहां गिरा है...
पाकिस्तानी चीफ मुशर्रफ ने मोहम्मद अजीज खान से भारत को हुए नुकसान के बारे में पूछा। अजीज खान ने बताया, भारत के एक एमआई 17 हेलीकॉप्टर को उनके ही क्षेत्र में मार गिराया है। पाकिस्तान की ओर से कहा गया है कि यह हरकत मुजाहिदीनों की है। उसमें सेना की कोई भूमिका नहीं है। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इस मामले में क्या सोच रहे हैं, अजीज खान ने यह जानकारी भी मुशर्रफ को दी। कारगिल की लड़ाई में भारतीय वायु सेना बहुत देर से शामिल हुई थी, मुशर्रफ इस मामले पर लगातार नजर रखे हुए थे। शुरु में पाकिस्तान ने जब इंडियन एयरफोर्स का एक हेलीकॉप्टर और दो  लड़ाकू विमान मार गिराए गए तो मुशर्रफ उत्साह में आ गए थे। उन्होंने अपने जूनियर से पूछा था कि अब वायु सेना क्या रणनीति बना रही है। अजीज खान ने उन्हें बताया कि भारतीय वायुसेना के लड़ाकू जहाज ठीक तरह से उड़ान नहीं भर पा रही है। उसके निशाने गलत लग रहे हैं। लड़ाकू विमानों के फेरे अब कुछ कम होने लगे हैं। इस बात पर मुशर्रफ खुश हो गए थे। हालांकि बाद में इंडियन एयरफोर्स ने जबरदस्त बमबारी की। नतीजा, पाकिस्तान की सेना भाग खड़ी हुई। कारगिल की लड़ाई के दौरान ही वह टेप, नवाज शरीफ को सुनवाने के लिए दो लोगों को पाकिस्तान भेजा गया था। वह मिशन पूरी तरह सीक्रेट रहा।

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