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यूएपीए बिल: कपिल सिब्बल ने अमित शाह को उनका ही बयान याद दिलाकर दिया जबाव

Thu, 01 Aug 2019 09:00 PM IST
Trainee Trainee अमर उजाला ब्यूरो,नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो,नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Thu, 01 Aug 2019 09:00 PM IST
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kapil sibal takes on amit shah in Unlawful Activities Prevention Act bill debate
कपिल सिब्बल
राजनीति वार-पलटवार और शह-मात का खेल है। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने आज बड़ी ही चतुराई से केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को उनका कथन याद दिलाकर बिंदुवार जवाब दिया। अवसर था राज्यसभा में विधि विरुद्ध क्रिया कलाप निवारण (संशोधन) विधेयक पर चर्चा का। बारी कपिल सिब्बल की आई। सिब्बल एनसीआरबी के आंकड़े रखते हुए केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का ध्यान कानून के दुरुपयोग की तरफ ले गए। 
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सिब्बल ने यह ध्यान दिलाने के लिए अमित शाह को पिछले महीने सदन में उनके द्वारा कहे गए वक्तव्य की याद दिलाई। तब अमित शाह ने कहा था कि मोदी सरकार के समय में कानून का दुरुपयोग नहीं होता है। सिब्बल ने इसे दोहराते हुए कहा कि 2014 में विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत 1144 मामले ट्रायल में थे। इनमें से केवल 39 मामले ट्रायल प्रक्रिया को पूरा कर पाए।
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इनमें से केवल 9 मामलों में सजा हुई और 24 मामले में लोग बरी हो गए। 2015 में 1209 मामले ट्रायल के स्तर पर लंबित थे और केवल 11 मामले में दोष साबित हो पाया। करीब 60 मामले में लोग दोषमुक्त हो गए। सिब्बल ने आंकड़ों के हवाले से बताया कि ऐसे में मामलों में दोषी साबित करने की दर 13, 14, 15 प्रतिशत के आसपास ही रहा है। 
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सिब्बल ने गृहमंत्री को ध्यान दिलाते हुए कहा कि पहले विधि विरुद्ध क्रियाकलाप का कानून 1967 में बनाया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1980 के राजीव गांधी सरकार टाडा कानून लेकर आई थी। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने दुरुपयोग और स्थिति को महसूस किया और पोटा कानून आया। 2004 में  यूपीए सरकार पोटा के दुरुपयोग को देखते हुए इसमें विधिविरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम लेकर आई।  2012 में यूपीए सरकार ने दुरुपयोग को देखकर इसमें संशोधन किया था और अब आप इस कानून में संशोधन लेकर आए हैं। 
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