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'लोकतंत्र नहीं, हमें बचाओ कहिए': कपिल सिब्बल ने भाजपा पर कसा तंज, विपक्ष की रैली में जुटी भीड़ पर क्या कहा?
Mon, 02 Nov 2026 07:52 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 02 Nov 2026 07:52 PM IST
सार
इंडिया ब्लॉक की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली में पांच से छह लाख लोगों के जुटने का दावा करते हुए कपिल सिब्बल ने भाजपा पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि भाजपा को अपनी रैलियों का नाम 'हमें बचाओ' रखना चाहिए। सिब्बल ने जंतर-मंतर की हिंसा और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी पर भी सवाल उठाए। आखिर उन्होंने मोहन भागवत से विदेशी ताकतों को लेकर क्या पूछा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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वोट चोरी के आरोपों को लेकर क्या बोले सिब्बल?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कांग्रेस और विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक की दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने दावा किया है कि इस रैली में करीब पांच से छह लाख लोग शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का शांतिपूर्ण तरीके से जुटना दिखाता है कि देश के नागरिक सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाना चाहते हैं। सिब्बल ने भारतीय जनता पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि अब उसे अपनी रैलियों का नाम 'लोकतंत्र बचाओ' या 'देश बचाओ' रखने के बजाय 'हमें बचाओ' रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष की रैली में जुटी भीड़ से चिंतित है।
कपिल सिब्बल ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रामलीला मैदान में हुई रैली में उनके अनुमान के मुताबिक पांच से छह लाख लोग मौजूद थे। उन्होंने दावा किया कि कनॉट प्लेस और उससे जुड़ने वाली आसपास की सड़कों पर पूरी तरह जाम लगा हुआ था और कहीं भी खाली जगह दिखाई नहीं दे रही थी। सिब्बल के मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की रैली में लोग शांतिपूर्वक शामिल हुए और हिंसा की कोई घटना नहीं हुई।
भाजपा की रैलियों को 'हमें बचाओ' नाम देने की बात क्यों कही?
सिब्बल ने भाजपा की प्रस्तावित रैलियों को लेकर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि भाजपा भी अपनी 'लोकतंत्र बचाओ' रैलियां आयोजित कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रोहतक पहुंचे तो वहां केवल 100 से 200 लोग मौजूद थे। इसी पर तंज कसते हुए सिब्बल ने कहा कि भाजपा को अपनी रैली का नाम 'लोकतंत्र बचाओ' या 'देश बचाओ' रखने के बजाय 'हमें बचाओ' रखना चाहिए। उनके मुताबिक, विपक्ष की रैली में बड़ी संख्या में लोगों का पहुंचना बताता है कि नागरिक सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। सिब्बल ने कहा कि भारत में लोग विरोध प्रदर्शन करेंगे, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से करेंगे। उन्होंने इसे देश की लोकतांत्रिक परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि भारत का इतिहास शांतिपूर्ण आंदोलनों का रहा है।
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जंतर-मंतर पर हुई हिंसा को लेकर सिब्बल ने क्या सवाल उठाए?
सिब्बल ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वहां युवा शांतिपूर्वक भूख हड़ताल पर बैठे थे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रदर्शन शांतिपूर्ण था तो हिंसा किसने भड़काई। सिब्बल ने सरकार से इस घटना की जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पत्थरों से भरा ट्रक लाया गया था और कुछ लोग बिना वर्दी के वहां मौजूद थे। उन्होंने सवाल किया कि ट्रक कौन लाया था और सादे कपड़ों में मौजूद वे लोग कौन थे। सिब्बल ने दावा किया कि सरकार को इन सवालों के जवाब पता हैं, लेकिन वह जांच नहीं कराएगी। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसकी राजनीति में हिंसा भड़काने, लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल के बाद युवाओं को ही जिम्मेदार ठहराने का तरीका अपनाया जाता है।
राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों को लेकर क्या बोले सिब्बल?
सिब्बल ने राहुल गांधी की ओर से लगाए गए वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बता चुके हैं कि कर्नाटक में व्यवस्थित तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए गए और महाराष्ट्र में भी इसी तरह के मामले सामने आए। सिब्बल ने आरोप लगाया कि सरकार सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए हेरफेर पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि किसी नागरिक को उसके मतदान के मौलिक अधिकार से वंचित करना संविधान और देश की सुरक्षा के खिलाफ काम करने जैसा है। सिब्बल ने कहा कि राहुल गांधी ने रैली में जिस उद्देश्य की बात की है, उसे हासिल होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया और स्पेन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की राजनीतिक परंपरा शांतिपूर्ण विरोध की रही है।
मोहन भागवत के बयान पर सिब्बल ने क्या सवाल किया?
सिब्बल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के दशहरा संबोधन का भी जिक्र किया। उन्होंने भागवत के उस बयान पर सवाल उठाया, जिसमें भारतीय लोकतंत्र के लिए विदेशी ताकतों और बाहरी साजिशों को खतरा बताया गया था। सिब्बल ने पूछा कि मध्य प्रदेश, केरल, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा से आए गरीब और मध्यम वर्ग के लाखों लोगों को रामलीला मैदान तक किस विदेशी एजेंसी ने पहुंचाया था। उन्होंने कहा कि इस तरह के आधारहीन दावे करने से बची हुई विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। सिब्बल ने भागवत से आत्ममंथन करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोकतंत्र को कमजोर करना बंद करने के लिए कहने की अपील की। इस तरह उन्होंने विपक्ष की रैली में जुटी भीड़, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और लोकतंत्र पर विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों को एक साथ उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा।
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कपिल सिब्बल ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रामलीला मैदान में हुई रैली में उनके अनुमान के मुताबिक पांच से छह लाख लोग मौजूद थे। उन्होंने दावा किया कि कनॉट प्लेस और उससे जुड़ने वाली आसपास की सड़कों पर पूरी तरह जाम लगा हुआ था और कहीं भी खाली जगह दिखाई नहीं दे रही थी। सिब्बल के मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की रैली में लोग शांतिपूर्वक शामिल हुए और हिंसा की कोई घटना नहीं हुई।
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भाजपा की रैलियों को 'हमें बचाओ' नाम देने की बात क्यों कही?
सिब्बल ने भाजपा की प्रस्तावित रैलियों को लेकर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि भाजपा भी अपनी 'लोकतंत्र बचाओ' रैलियां आयोजित कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रोहतक पहुंचे तो वहां केवल 100 से 200 लोग मौजूद थे। इसी पर तंज कसते हुए सिब्बल ने कहा कि भाजपा को अपनी रैली का नाम 'लोकतंत्र बचाओ' या 'देश बचाओ' रखने के बजाय 'हमें बचाओ' रखना चाहिए। उनके मुताबिक, विपक्ष की रैली में बड़ी संख्या में लोगों का पहुंचना बताता है कि नागरिक सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। सिब्बल ने कहा कि भारत में लोग विरोध प्रदर्शन करेंगे, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से करेंगे। उन्होंने इसे देश की लोकतांत्रिक परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि भारत का इतिहास शांतिपूर्ण आंदोलनों का रहा है।
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जंतर-मंतर पर हुई हिंसा को लेकर सिब्बल ने क्या सवाल उठाए?
सिब्बल ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वहां युवा शांतिपूर्वक भूख हड़ताल पर बैठे थे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रदर्शन शांतिपूर्ण था तो हिंसा किसने भड़काई। सिब्बल ने सरकार से इस घटना की जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पत्थरों से भरा ट्रक लाया गया था और कुछ लोग बिना वर्दी के वहां मौजूद थे। उन्होंने सवाल किया कि ट्रक कौन लाया था और सादे कपड़ों में मौजूद वे लोग कौन थे। सिब्बल ने दावा किया कि सरकार को इन सवालों के जवाब पता हैं, लेकिन वह जांच नहीं कराएगी। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसकी राजनीति में हिंसा भड़काने, लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल के बाद युवाओं को ही जिम्मेदार ठहराने का तरीका अपनाया जाता है।
राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों को लेकर क्या बोले सिब्बल?
सिब्बल ने राहुल गांधी की ओर से लगाए गए वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बता चुके हैं कि कर्नाटक में व्यवस्थित तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए गए और महाराष्ट्र में भी इसी तरह के मामले सामने आए। सिब्बल ने आरोप लगाया कि सरकार सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए हेरफेर पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि किसी नागरिक को उसके मतदान के मौलिक अधिकार से वंचित करना संविधान और देश की सुरक्षा के खिलाफ काम करने जैसा है। सिब्बल ने कहा कि राहुल गांधी ने रैली में जिस उद्देश्य की बात की है, उसे हासिल होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया और स्पेन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की राजनीतिक परंपरा शांतिपूर्ण विरोध की रही है।
मोहन भागवत के बयान पर सिब्बल ने क्या सवाल किया?
सिब्बल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के दशहरा संबोधन का भी जिक्र किया। उन्होंने भागवत के उस बयान पर सवाल उठाया, जिसमें भारतीय लोकतंत्र के लिए विदेशी ताकतों और बाहरी साजिशों को खतरा बताया गया था। सिब्बल ने पूछा कि मध्य प्रदेश, केरल, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा से आए गरीब और मध्यम वर्ग के लाखों लोगों को रामलीला मैदान तक किस विदेशी एजेंसी ने पहुंचाया था। उन्होंने कहा कि इस तरह के आधारहीन दावे करने से बची हुई विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। सिब्बल ने भागवत से आत्ममंथन करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोकतंत्र को कमजोर करना बंद करने के लिए कहने की अपील की। इस तरह उन्होंने विपक्ष की रैली में जुटी भीड़, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और लोकतंत्र पर विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों को एक साथ उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा।