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ईडी: बिना लाइसेंस के दवाओं के लेबल बदलते थे, जेनेरिक दवा पर ब्रांडेड लेबल लगा होती थी नई पैकिंग
Mon, 02 Nov 2026 09:06 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 02 Nov 2026 09:06 PM IST
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ईडी की बड़ी कार्रवाई
- फोटो : Amar Ujala
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), बंगलूरू ने नकली दवाओं के एक कथित रैकेट से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के पांच ठिकानों पर, 'धन शोधन निवारण अधिनियम' (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की है। यह तलाशी, कर्नाटक के बेंगलुरु दक्षिण स्थित तावरेकेरे पुलिस स्टेशन में 18.08.2026 को दर्ज एफआईआर संख्या 0266/2026 से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की चल रही जांच के सिलसिले में की गई है।
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यह एफआईआर, 18.08.2026 को ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी और पुलिस द्वारा सीके तांड्या गांव की एक आवासीय संपत्ति पर की गई संयुक्त छापेमारी से संबंधित है। वहां आरोपी बिना किसी वैध लाइसेंस, परमिट या अनुमति के दवाएं और फार्मास्युटिकल उत्पाद जमा किए हुए पाए गए। इन दवाओं के लेबल भी बदल रखे थे। 'भारतीय न्याय संहिता', 2023 की धारा 318(4) और 'कॉपीराइट अधिनियम', 1957 की धारा 63 के तहत दर्ज अपराध, पीएमएलए के अंतर्गत 'अनुसूचित अपराध' माने जाते हैं। इस आधार पर, ईडी ने ईसीआईआर संख्या ECIR/BGZO/45/2026 दर्ज की। इसके बाद पीएमएलए, 2002 के तहत उक्त मामले की जांच शुरू कर दी गई।
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जांच से पता चला है कि आर. प्रशांत ने कथित तौर पर बिदादी के पास एक फार्महाउस का इंतजाम किया था, जहां बिना किसी ड्रग लाइसेंस या परमिट के दवाओं का निर्माण, रीपैकेजिंग और रीलेबलिंग की जाती थी। अलग-अलग राज्यों के निर्माण केंद्रों से खरीदी गई सस्ती दवाओं को कथित तौर पर नई शीशियों में पैक किया जाता था। उन पर धोखाधड़ी से फाइजर की महंगी एंटीबायोटिक दवाओं—जैसे ज़ाविसिफ्टा, एम्बलेवियो आदि के लेबल लगा दिए जाते थे।
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इन शीशियों में असल में जेनेरिक दवाएं होती थीं, लेकिन उन पर फाइजर ब्रांड के लेबल लगे होते थे। कथित तौर पर, इन दवाओं को 'एम/एस डीएम फार्मास्यूटिकल्स' के जरिए बांटा जाता था। उन्हें 'एम/एस कृपा हेल्थकेयर' को सप्लाई किया जाता था। इसके बाद, 'एम/एस कृपा हेल्थकेयर' इन्हें अन्य दवा कंपनियों और अस्पतालों को सप्लाई करता था, जहां असली दवाओं के साथ-साथ ये नकली दवाएं भी भेजी जाती थीं, ताकि किसी को शक न हो। तलाशी अभियान के दौरान, वीरेश कुमार के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया, जिनमें लगभग 9,00,000 रुपये जमा थे। इसके अलावा, तलाशी के दौरान कई लोगों से जुड़े डिजिटल डिवाइस, रिकॉर्ड और अपराध से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए।