सरकारें डरें तो स्वतंत्रता, लोग डरें तो अत्याचार : दीपक मिश्रा
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सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि एक समाज में अगर नागरिक को स्वतंत्रता नहीं मिलेगी तो तनाव पैदा होगा। देश में जब सरकारें लोगों से डरती हैं तो वहां स्वतंत्रता होती है। वहीं, जब लोग सरकार से डरते हैं तो वहां अत्याचार होता है। आजादी से कोई समझौता नहीं हो सकता। अगर आप किसी से आजादी छीन लेंगे तो यह वैसे ही होगा, जैसे बिना खुशबू का गुलाब। अगर कोई संविधान से छेड़छाड़ करता है, धोखा करता है तो वह भावी पीढ़ी का हक छीन रहा है।
धर्म में कोर्ट का दखल नहीं हो सकता : रोहतगी
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा, मेरी राय है कि धर्म से जुड़े रीति रिवाज में कोर्ट का दखल नहीं हो सकता। सिखों के केश, कृपाण पर कोर्ट दखलअंदाजी नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलत है।
उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आजकल मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने को देशद्रोह बताया दिया जाता है। लोग सवाल पूछने से डरने लगे हैं। क्या हम ऐसा बदलाव चाहते थे।
संविधान की धज्जियां उड़ाने वाला बदलाव नहीं चाहिए
सिब्बल ने एक कार्यक्रम में शनिवार को कहा, ‘सांविधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर संकट पैदा करने वाला बदलाव खतरनाक है। देश को ऐसा बदलाव नहीं चाहिए जो अपने पीछे बर्बादी छोड़ जाए, जो संविधान की धज्जियां उड़ा दे और संविधानिक संस्थाओं का राजनीतिकरण कर दे। बदलाव भविष्य के लिए होता है, उन्नति के लिए होता है।’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने पीएम पर झूठे वादे करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 100 दिन में काला धन वापस लाने का वादा किया था। हर व्यक्ति के बैंक खाते में 15 लाख आने का वादा किया था। उनके नोटबंदी के फैसले से एटीएम की लाइन में खड़े 100 से ज्यादा लोग मर गए। आपने गरीबों की कमाई को एक क्षण में खत्म कर दिया, लोगों का इलाज नहीं हो सका। दुख की बात है कि अब अच्छे दिनों की बात नहीं होती, सच्चे दिन नहीं दिखते। कहां गया विकास का एजेंडा।
आरएसएस को भी घेरा
सिब्बल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्यपाल कह रहे हैं कि वह पहले आरएसएस के हैं, बाद में राज्यपाल। शिक्षण संस्थाओं में हर जगह संघ के लोगों को वाइस चांसलर नियुक्त किया जा रहा है। संघ का एजेंडा चलाया जा रहा है। संघ के लोग उच्च संस्थाओं में बैठे हैं। सब कुछ संघ के पक्ष में किया जा रहा है।