कांवड़ यात्रा: तीसरी लहर को न्योता न साबित हो जाए, पीएम की गंभीर चिंता के बाद भी नहीं समझ रहे राज्य

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 09 Jul 2021 06:47 PM IST

सार

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भीड़ बढ़ाने से भारी तबाही ला सकती है कोरोना की तीसरी लहर, देश की 75 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन लगने तक सावधानी बरतने की सलाह।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विशेषज्ञों के साथ बैठक कर कोरोना की तीसरी लहर से निबटने की तैयारी की और ऑक्सीजन की उपलब्धता पर रिपोर्ट मांगी, वहीं  उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्य कांवड़ यात्रा को अनुमति दे रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता है कि अगर इस माहौल में कांवड़ यात्रा को अनुमति दी जाती है तो यह कोरोना की तीसरी लहर के संकट को न्योता देने जैसा कदम साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब तक देश की 70-80 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन नहीं लग जाती है, तब तक ऐसे किसी भी आयोजन को अनुमति देने से बचना चाहिए।
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हरिद्वार में कुंभ के पहले भी चेताया था, न दें कांवड़ यात्रा की अनुमति
हरिद्वार कुंभ के आयोजन के पहले भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी, लेकिन धार्मिक मामला देख उत्तराखंड सरकार दबाव में आ गई और उसने कुंभ के आयोजन को अनुमति दे दी। इसका परिणाम हुआ कि हजारों साधु-संत और अन्य लोग इसकी चपेट में आए और कई अकाल मृत्यु के शिकार हुए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर के संकट को देखते हुए इस वर्ष भी कांवड़ यात्रा को अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।


कब से है सावन
इस साल सावन का महीना 23 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है। परंपरागत रूप से इसके बाद प्रमुख तिथियों पर शिवभक्त गंगा या अन्य प्रमुख नदियों से जल लाकर प्रमुख शिव मंदिरों पर अर्पित करते रहे हैं। इसे कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) कहा जाता है। पिछले साल कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह यात्रा स्थगित कर दी गई थी। इस साल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना संकट के कमजोर पड़ने के बाद कांवड़ यात्रा की अनुमति दे दी है।

उत्तराखंड सरकार का रुख अभी स्पष्ट नहीं 

हालांकि उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उत्तराखंड के नव नियुक्त मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्राथमिक तौर पर इस वर्ष भी कांवड़ यात्रा को अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया था। इसके पीछे हरिद्वार कुंभ को अनुमति मिलने के कारण राज्य में फैली कोरोना महामारी से उपजी परिस्थिति को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है।

इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि वह उत्तराखंड के सीएम से बात करके इस मसले का समाधान निकालने की कोशिश करेगी। धार्मिक मामला देख धामी ने भी शुक्रवार को इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर कोई फैसला लेने की बात कह दी है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जिस प्रकार की चिंता जताई है, उसे देखते हुए कहा जा रहा है कि अगर इस वर्ष भी कांवड़ यात्रा को अनुमति दी जाती है तो यह कोरोना संकट को देखते हुए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

भीड़ पर प्रधानमंत्री ने चेताया, कैंप्टी फॉल के फोटो ने डराया

इधर, दिल्ली और आसपास के इलाकों से लोग छुट्टियां बिताने उत्तराखंड के प्रमुख स्थलों पर जाने लगे हैं। मसूरी के कैंप्टी फॉल पर एक साथ सैकड़ों लोगों के जमा होने की तस्वीरें सामने आ गई हैं, जिसे देख लोगों में भारी भय व्याप्त हो गया। प्रधानमंत्री ने इसके बाद लोगों को चेताया है कि कोरोना अभी कहीं गया नहीं है और अभी इसके प्रति लापरवाह होने की आवश्यकता नहीं है, अन्यथा इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं। प्रधानमंत्री की इतनी गंभीर चिंता के बाद भी कांवड़ यात्रा को अनुमति मिलने को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है।

विशेषज्ञ चिकित्सक की यह है राय 

दिल्ली के बीएल कपूर अस्पताल में कोरोना प्रबंधन की भूमिका निभा रहे डॉक्टर संदीप नायर ने अमर उजाला से कहा कि जब तक देश की 70 से 80 फीसदी आबादी को कोरोना की वैक्सीन नहीं लग जाती, तब तक यह कहना मुश्किल है कि समाज में हर्ड इम्यूनिटी आ चुकी है। इस स्थिति तक पहुंचने तक कोरोना की लहर के आने का खतरा उतना ही गंभीर है, जितना कि यह इसी वर्ष अप्रैल-मई महीने के दौरान था।

अक्टूबर-नवंबर तक भीड़ बढ़ाने का खतरा न उठाएं
अभी जिस रफ्तार से कोरोना वैक्सीनेशन चल रहा है और केंद्र सरकार ने अपनी जो योजनाएं बताई हैं, उसके अनुसार भी चलें तो 70 से 80 फीसदी आबादी को वैक्सीन लगाने में अक्टूबर-नवंबर तक का समय लग सकता है। तब तक भीड़ बढ़ाने का कोई खतरा नहीं उठाया जा सकता।

बचाव में ही समझदारी है
विशेषज्ञ के अनुसार, कोरोना की तीसरी लहर के बारे में अभी बिल्कुल ठीक-ठीक कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन जिस तरह पहाड़ों, बाजारों और मॉल्स में लोगों की भीड़ बढ़ रही है, कोरोना की तीसरी लहर के आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। दूसरी लहर की भयावहता को देखते हुए बचाव करने में ही समझदारी है।
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