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नंबूदरीपाद की सीट से दिग्गजों को चित करके जीता 'कन्हैया का दोस्त'

Fri, 20 May 2016 12:45 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 20 May 2016 12:45 PM IST
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 kanhaiya's friend mohasin won pattambi seat against mohammed saleem

केरल में सीपीआई के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने कांग्रेस के यूडीएफ को हराकर एक बार फिर सत्ता में वापसी की है। यूं तो इस गठबंधन ने राज्य की 85 सीटों पर कब्जा जमाया है लेकिन इस जीत में ऐसे कुछ खास चेहरे भी चमके हैं जो आने वाले समय में वाम नेतृत्व को नई ऊर्जा दे सकते हैं। 

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इन्हीं में से एक हैं मार्क्सवाद के शिखर पुरुष नंबूदरीपाद की सीट से जीत दर्ज करने वाले मोहम्मद मोहसिन। 29 बरस के मोहसिन ने नंबूदरीपाद की पट्टांबी सीट से कांग्रेस के दिग्‍गज नेता और लगातार तीन बार से जीत दर्ज करते आ रहे सीपी मोहम्मद को शिकस्त देकर यहां एक बार फिर वाम झंडा लहरा दिया है। 
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चुनावों के लिए पार्टी का उम्‍मीदवार घोषित होने के बाद क्षेत्र में मोहम्मद मोहसिन की एक पहचान और भी बनी, 'कन्हैया के दोस्त' की। असल में मोहसिन चार साल जेएनयू में बिता चुके हैं, जहां उनकी कन्हैया से दोस्ती हुई थी। 
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देश विरोधी नारों के बीच जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार अचानक सुर्खियों में आए तो लोगों ने उनके दोस्तों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस दोस्ती की कीमत जेएनयू से हजारों किलोमीटर दूर केरल में मोहम्मद मोहसिन को भी चुकानी पड़ी। 

सात भाई बहनों में दूसरे नंबर के मोहसिन वैसे तो यहीं पले बढ़े हैं, लेकिन जेएनयू से उठे विवाद के बाद जब लेफ्ट फ्रंट ने उन्हें इस सीट के लिए चुना, तो वह अचानक चर्चा में आ गए। 

कांग्रेस के दिग्गज सीपी मोहम्मद को दी मात

 kanhaiya's friend mohasin won pattambi seat against mohammed saleem

तकरीबन चार साल जेएनयू में गुजार चुके मोहसिन के लिए जेएनयू के छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार का दोस्त होने की ‘कीमत’ भी यहां चुकानी पड़ रही है। वह जब पहली बार प्रचार के लिए निकले, तो उन्हें जो पहला फिकरा सुनने को मिला था वह था ‘एंटी नेशनलिस्ट।’

लेकिन इन सबसे प्रभावित हुए बिना इस युवा नेता ने क्षेत्र में मेहनत करना जारी रखा और उसका परिणाम भी मिला। गुरुवार को ईवीएम से नतीजे बाहर आए तो मोहसिन ने कांग्रेस के दिग्गज सीपी मोहम्मद और भारतीय जनता पार्टी के एडवोकेट पी मनोज को हराकर सभी को चौंका दिया। 

कम्यूनिस्ट पार्टी के मोहसिन को 64025 वोट मिले तो लगातार तीन बार विधायक रह चुके सीपी मोहम्मद 56621 वोट ही पा सके। वहीं भाजपा के पी मनोज 14824 वोट लेकर कहीं पीछे रहे। कांग्रेस के सीपी मोहम्मद को चुनाव में हराना इतना आसान काम भी नहीं था। 

बताते हैं कि 15 साल के कार्यकाल में सीपी मोहम्मद ने वहां अच्छा काम किया इसलिए क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान बनी। वहीं चुनाव प्रचार को याद करते हुए मुहसिन बताते ‌हैं कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार तक किया गया है और अफजल गुरु की फांसी का विरोध करने की तोहमत तक लगाई गई। उनका नाम बार बार कन्हैया से जोड़ा जाता, विरोधी अपनी रैलियों में उन्हें कन्हैया का दोस्त कहना नहीं भूलते थे।

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