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कांची मठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का लंबी बीमारी के बाद निधन, पीएम ने दी श्रद्धांजलि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कांचिपुरम
Updated Wed, 28 Feb 2018 10:00 AM IST
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शंकराचार्य जयेंद्र
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तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित कांची मठ के प्रमुख 82 वर्षीय शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती नहीं रहे। वह काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। पीठ के सूत्रों के मुताबिक उन्हें पिछले महीने अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई थी। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तभी से वह अस्पताल में भर्ती थे।
शंकराचार्य की मृत्यु पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वह लाखों भक्तों के दिलों में रहेंगे। वह एक पवित्र आत्मा थे। उनकी आत्मा को शांति मिले। पीएम मोदी ने भी शंकराचार्य के साथ वाली फोटो के साथ दो ट्वीट किए और श्रद्धाजंलि दी।
वह कामकोटि पीठ में हिंदुओं के 69 वें शंकराचार्य थे। खबरों के मुताबिक जनवरी माह में उन्हें अस्पताल में सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले वर्ष शंकराचार्य नवंबर महीने में दिल्ली आए थे।
वर्ष 2004 में जयेंद्र सरस्वती पर कांचीपुरम मंदिर के एक कर्मचारी की हत्या का भी आरोप लगा था। नौ साल तक चले मामले के बाद उन्हें तथा दूसरे आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।
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शंकराचार्य की मृत्यु पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वह लाखों भक्तों के दिलों में रहेंगे। वह एक पवित्र आत्मा थे। उनकी आत्मा को शांति मिले। पीएम मोदी ने भी शंकराचार्य के साथ वाली फोटो के साथ दो ट्वीट किए और श्रद्धाजंलि दी।
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Jagadguru Pujyashri Jayendra Saraswathi Shankaracharya was at the forefront of innumerable community service initiatives. He nurtured institutions which transformed the lives of the poor and downtrodden. pic.twitter.com/s1vTpSxbbl
विज्ञापन विज्ञापन— Narendra Modi (@narendramodi) February 28, 2018
वह कामकोटि पीठ में हिंदुओं के 69 वें शंकराचार्य थे। खबरों के मुताबिक जनवरी माह में उन्हें अस्पताल में सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले वर्ष शंकराचार्य नवंबर महीने में दिल्ली आए थे।
वर्ष 2004 में जयेंद्र सरस्वती पर कांचीपुरम मंदिर के एक कर्मचारी की हत्या का भी आरोप लगा था। नौ साल तक चले मामले के बाद उन्हें तथा दूसरे आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।