फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Kamduni gangrape-murder: HC acquits death penalty awardee, commutes capital punishment of 2 others

कामदुनी दुष्कर्म-हत्या: हाईकोर्ट ने मौत की सजा पाए दोषी को बरी किया, दो की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला

Fri, 06 Oct 2023 07:27 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 06 Oct 2023 07:27 PM IST
सार

Kamduni Gangrape-Murder: उच्च न्यायालय ने अमीन अली को बरी कर दिया और सैफुल अली और अंसार अली की मौत की सजा को उनके प्राकृतिक जीवन के अंत तक कारावास में बदल दिया। अदालत ने दोनों को सामूहिक दुष्कर्म और हत्या तथा अन्य आरोपों में दोषी पाया।

विज्ञापन
Kamduni gangrape-murder: HC acquits death penalty awardee, commutes capital punishment of 2 others
Calcutta high court - फोटो : Social Media

विस्तार

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कामदुनी में 10 साल पहले एक महिला (21 वर्षीय) के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में मौत की सजा पाने वाले एक व्यक्ति को शुक्रवार को बरी कर दिया और दो अन्य की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।

विज्ञापन

एक स्थानीय अदालत ने सात जून, 2013 को इस अपराध के लिए तीन दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी, जबकि तीन अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सत्र अदालत ने 2016 में अमीन अली, सैफुल अली और अंसार अली को मौत की सजा सुनाई थी, जबकि इमानुल इस्लाम, अमीनुल इस्लाम और भोला नस्कर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

उच्च न्यायालय ने अमीन अली को बरी कर दिया और सैफुल अली और अंसार अली की मौत की सजा को उनके प्राकृतिक जीवन के अंत तक कारावास में बदल दिया। अदालत ने दोनों को सामूहिक दुष्कर्म और हत्या तथा अन्य आरोपों में दोषी पाया।

विज्ञापन

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने एसके एमामुल इस्लाम, अमीनुर इस्लाम और भोला नस्कर को सामूहिक दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया, जबकि उन्हें आपराधिक साजिश रचने और सबूत मिटाने का दोषी ठहराया।

यह कहते हुए कि तीनों अपनी गिरफ्तारी के बाद से 10 साल से अधिक समय से कैद की सजा का सामना कर रहे हैं और उनकी दोषसिद्धि में अधिकतम सात साल की कैद की सजा है। अदालत ने निर्देश दिया कि उन्हें 10,000 रुपये का जुर्माना भरने पर रिहा कर दिया जाएगा, जिसके उल्लंघन में उन्हें तीन और महीने के लिए साधारण कारावास की सजा काटनी होगी। पीड़िता के परिवार के सदस्यों ने कहा कि वे आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed