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पहली बार सांसद बने नकुलनाथ को संसद छोड़ने आए पापा

Mon, 17 Jun 2019 01:22 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 17 Jun 2019 01:22 PM IST
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Kamal Nath and his son Nakul Nath at Parliament he  has been elected as MP from Chhindwara
कमलनाथ एवं नकुलनाथ - फोटो : PTI

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ सोमवार को संसद भवन पहुंचे। नकुलनाथ 17वीं लोकसभा में मध्यप्रदेश की छिंदवाड़ा सीट से चुने गए हैं। उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की। छिंदवाड़ा सीट से उनके पिता कमलनाथ नौ बार सांसद चुने जा चुके हैं। 600 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ वह लोकसभा चुनाव के अमीर सांसदों में से एक हैं।

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44 साल के नकुलनाथ ने बोस्टन के बे स्टेट कॉलेज से बिजनेस में स्नातक की पढ़ाई की है। पहली बार उन्होंने 2013 में जुन्नारदेव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। लेकिन पार्टी ने उन्हें 2018 विधानसभा चुनाव में नहीं उतारा और लोकसभा टिकट दे दिया।
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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद से ही नकुलनाथ लगातार छिंदवाड़ा के लोगों से मिल रहे थे और कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम रहे  थे। अपने पिता कमलनाथ की तरह ही नकुलनाथ की पढ़ाई भी दून स्कूल से हुई है। वह वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के पूर्व कर्मचारी रहे हैं। लोकसभा में उनके खिलाफ भाजपा ने नत्थन साहा कावरेती को मैदान में उतारा था। 57 साल के कावरेती राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े आदिवासी नेता हैं। 

राजनीति और छिंदवाड़ा सीट

छिंदवाड़ा लोकसभा सीट कांग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है। नकुलनाथ के पिता कमलनाथ इस सीट से 1980 से लड़ रहे हैं। नकुलनाथ बचपन से ही छिंदवाड़ा आते रहे हैं। जवानी के दिनों में नकुलनाथ, पिता कमलनाथ के साथ जनसभाओं में शिरकत भी करते रहे हैं। 1996 वो पहला साल था जब नकुलनाथ ने मां अलका नाथ के लिए यहां छिटपुट प्रचार किया और शायद राजनीति के कुछ जरूरी सबक भी सीखे। 


पिता की समृद्ध राजनीतिक छत्रछाया में नकुलनाथ के लिए यहां से लोकसभा चुनाव जीतना आसान हो गया। कमलनाथ का छिंदवाड़ा से रिश्ता चार दशक पुराना है। वो नौ बार इस सीट से सांसद बनकर लोकसभा पहुंचे हैं। 2014 की मोदी लहर में भी वो अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। बीते चार दशक में सिर्फ 1997 वो साल था जब उन्हें एक उपचुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा।

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