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कैलाश सत्यार्थी की मांग: संसद के आगामी मानसून सत्र में पारित हो एंटी ट्रैफिकिंग बिल

Wed, 14 Jul 2021 04:33 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 14 Jul 2021 04:33 PM IST
सार

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने जबरिया बाल मजदूरी और ट्रैफिकिंग (तस्करी) के तेजी से बढ़ते मामलों पर रोक लगाने के लिए राजनीतिक दलों और सांसदों से संसद के आगामी मानसून सत्र में फौरन एंटी ट्रैफिकिंग बिल (तस्करी रोधी विधेयक) को पारित करने की मांग की है। 

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Kailash Satyarthi asks to pass anti trafficking bill in upcoming monsoon session of parliament
कैलाश सत्यार्थी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इस संबंध में जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि कोरोना वायरस महामारी ने भारत में सबसे अधिक बच्चों को प्रभावित किया है और खासकर हाशिए के बच्चों की सुरक्षा के खतरों को बढ़ाया है। इसमें यह भी कहा गया है कि कोरोना महामारी काल में बाल श्रम और बाल दुर्व्यापार के मामलों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।

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कैलाश सत्यार्थी कहते हैं कि एक मजबूत एंटी ट्रैफिकिंग कानून हमारे नेताओं की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है और यह राष्ट्र निर्माण व आर्थिक प्रगति की दिशा में एक आवश्यक कदम भी है। जब तक बच्चों को जानवरों से भी कम कीमत पर खरीदा और बेचा जाता रहेगा, कोई भी देश खुद को सभ्य नहीं कह सकता। 
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उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण ट्रैफिकिंग में वृद्धि हुई है। खासकर महिलाओं और बच्चों की ट्रैफिकिंग में। मैं सभी सांसदों से संसद के आगामी सत्र में एक मजबूत और व्यापक एंटी ट्रैफिकिंग कानून पारित करने का आह्वान करता हूं। हमारे बच्चे, उनकी गरिमा और आजादी अब और अधिक इंतजार नहीं कर सकते।
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क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
विज्ञप्ति के अनुसार सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में हर दिन आठ बच्चे ट्रैफिकिंग के शिकार होते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों की संख्या 2914 हो गई थी, जो 2018 में 2837 थी। एक साल में इसमें 2.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। 

बाल दुर्व्यापार की रिपोर्ट दर्ज करने वाले छह शीर्ष राज्य राजस्थान, दिल्ली, बिहार, ओडिशा, केरल और मध्यप्रदेश हैं। देश में गुमशुदा बच्चों की तादाद भी लगातार बढ रही है। ज्यादातर गुमशुदा बच्चे ट्रैफिकिंग के ही शिकार होते हैं। एनसीआरबी के अनुसार साल 2019 में 73,138 बच्चों के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज की गई थीं।

ट्रैफिकिंग इन पर्सन्स (प्रीवेंशन, केयर एंड रीहैबिलिटेशन) बिल 2021, ट्रैफिकिंग से संबंधित विभिन्न अपराधों को शामिल करते हुए और इसके  विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देता है। यह कानून ट्रैफिकिंग जैसे संगठित अपराध की कमर तोड़ने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर तीन स्तरीय संस्थागत ढांचों के निर्माण की जरूरत पर बल देता है।


यह अपराध की रोकथाम सुनिश्चित करने हेतु आर्थिक, आपराधिक और सामाजिक प्रतिरोध की क्षमता भी पैदा करता है। यह कानून ट्रैफिकिंग की रोकथाम और पीडि़तों के पुनर्वास और संरक्षण को सुनिश्चित करता है।

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