काबुल में बिगड़े हालात: नागरिकों को सुरक्षित निकालना और शांतिपूर्ण, स्थायी अफगानिस्तान ही भारत की पहली प्राथमिकता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि वहां से अपने लोगों को सुरक्षित निकालना हमारी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए भारत अपने कई सहयोगी, साझीदार देशों से चर्चा कर रहा है...
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काबुल एयरपोर्ट के पास हुई आतंकी घटना ने कई देशों को झकझोर कर रख दिया है। भारत ने भी वहां सिख और हिंदुओं समेत अपने कुछ नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की थी। लेकिन काबुल एयरपोर्ट से यह छठवीं और आखिरी उड़ान थी। अब नई दिल्ली को वहां हालात सामान्य होने का इंतजार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि वहां से अपने लोगों को सुरक्षित निकालना हमारी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए भारत प्रयास कर रहा है।
अरिंदम बागची ने कहा कि भारत की मंशा शांतिपूर्ण और स्थायी अफगानिस्तान के स्थापना की है। क्षेत्रीय सुरक्षा एक अहम विषय है और इसे लेकर भारत भी संवेदनशील है। बागची ने कहा कि इसके लिए भारत अपने कई सहयोगी, साझीदार देशों से चर्चा कर रहा है। भारत को अफगानिस्तान में अपने नागरिकों को निकालने में कतर, यूएई, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन जैसे कई देशों से सहायता मिल रही है। इसके अलावा नई दिल्ली पड़ोसी देश में अपने हितों को लेकर लगातार सक्रिय है।
देशों से क्या बात कर रहा है भारत?
भारत की चिंता तीन प्रमुख बिंदुओं पर फिलहाल सिमटी हुई है।
- इसमें सबसे पहली प्राथमिकता वहां से लोगों को सुरक्षित लाना है। इसके लिए भारत चाहता है कि यथाशीघ्र काबुल हवाई अड्डे के पास स्थिति सामान्य हो। एयरपोर्ट से विमानों के जरिए लोगों को लाया जा सके।
- चिंता का दूसरा विषय अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण तरीके से सभी स्टेक होल्डर्स के साथ समुचित व्यवहार करने वाली स्थायी सरकार की स्थापना है। ताकि अफगानिस्तान में विकास और निर्माण कार्य में तेजी आए। वहां अमन, चैन की बहाली हो सके। राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय मामले के जानकारों का कहना है कि अफगानिस्तान में अस्थिरता क्षेत्रीय असुरक्षा को बढ़ाएगी और यह स्थिति किसी के पक्ष में नहीं है।
- तीसरी चिंता आतंकवाद जैसे विषय से जुड़ी है। भारत का स्पष्ट मानना है कि आतंकवाद में अच्छा और बुरा कुछ नहीं होता। आतंकवाद आतंकवाद है और इसके विरुद्ध विश्व समुदाय को एकजुटता के साथ समझ बनाने तथा विरोध के एक फोरम पर आना जरूरी है।
वेट एंड वाच की स्थिति है
अरिंदम बागची भी इस स्थिति को सही मानते हैं। विदेश मामलों के जानकार प्रो. एसडी मुनि का कहना है कि उड़ती हुई धूल और धुएं में कुछ नहीं दिखाई देता। अफगानिस्तान में स्थिति अभी साफ नहीं है। काफी जटिल परिस्थिति है। इसलिए अभी तो वेट एंड वाच की रणनीति पर चलना होगा। एसके शर्मा का भी यही कहना है। शर्मा को लग रहा है कि अभी एक-दो महीने अफगानिस्तान में उथल-पुथल की स्थिति बनी रह सकती है। अफगानिस्तान में हालात और तालिबान की सरकार को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि अभी कुछ भी कहना ठीक नहीं है। पता नहीं तालिबान अफगानिस्तान में सरकार बनाएगा या क्या होगा? बागची कहते हैं कि वहां की स्थिति सामान्य होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।