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कबाली: फिल्म तैयार करने वाली टीम में ज्यादातर दलित

Fri, 22 Jul 2016 11:35 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 22 Jul 2016 11:35 AM IST
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Kabali: The young production crew of Kabali is predominantly Dalit

फिल्म कबाली तैयार करने वाले क्रू में ज्यादातर लोग दलित समाज से हैं। डायरेक्टर पा. रंजीत, सिनेमैटोग्राफर जी. मुरली, ऑर्ट एंड कॉस्ट्यून डायरेक्टर था. रामालिंगम,  गीतकार उमा देवी, अरुण राजा कामराज और एम बालमुरुगन तक सभी दलित समाज से है।

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तमिल सिनेमा में दलितों की बात उठाने वाले डायरेक्ट रंजीत ने इस फिल्म में परदे के पीछे दलितों को दमदार रोल दिया। रंजीत दलितों की भूमिका को नई पहचान दिलाने की मुहिम में जुटे हैं। साल 2014 में आई उनकी फिल्म मद्रास में रंजीत ने दलितों के मुद्दे को उठाया था।
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हालांकि कबाली फिल्म से जुड़े कुछ लोग ऐसे है भी जो अपनी जाति नहीं बताना चाहते हैं। इन लोगों की मानें तो सिनेमा एक कला है, और कला किसी जाति या धर्म को नहीं बल्कि प्रतिभा को पहचानती है।

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इंडस्ट्री में बड़ रहा है दलितों का दबदबा!

Kabali: The young production crew of Kabali is predominantly Dalit

रंजीत ने फिल्म मद्रास में चेन्नई के दलितों की हालात उजागर किए थे, जिसके बाद फिल्म और उनकी खूब वाहवाही हुई थी। फिल्म डायरेक्टर के मुताबिक उन्हें जाति पर बात करना अच्छा नहीं लगता है लेकिन जातिवाद की समस्या से छुटकारा पाने के लिए वे हर संभव कोशिश करेंगे।

एक राजनीतिक विचारक ने संगीतकार इलैया राजा का उदाहरण देते हुए कहा कि दलितों के पास ऐसी प्रतिभा और क्षमता है जिससे उन्होंने कई प्रोजेक्ट को सफल बनाया है। 

उन्होंने कहा कि दलितों में से ज्यादातर का इंडस्ट्री गॉडफादर नहीं होने और आर्थिक तंगी की वजह से वे अनदेखे रह जाते हैं। इंडस्ट्री हमेशा क्षत्रियों और मारवाड़ियों के पैसे से चलती रही है। दलित बिजनेसमैन ने फिल्मों में पैसा लगाया हो, ऐसा न के बराबर है। मद्रास जैसी फिल्में छवि तोड़ रही है और दलितों में एक आत्मविश्वास पैदा कर रही हैं। उसी कड़ी में अब कबाली भी दलितों को सम्मान दिलाने वाली फिल्म साबित हो रही है।

फिल्म कबाली में डायरेक्टर रंजीत ने अत्याचार सह रहे तमिलों का आवाज उठाई है। पूरी कास्ट को रंजीत ने बेहतरीन तरीके से पेश किया है।

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