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SC: समलैंगिक विवाह पर फैसले की समीक्षा से पहले बड़ी खबर, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने खुद को मामले से अलग किया

Wed, 10 Jul 2024 03:22 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Wed, 10 Jul 2024 03:22 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष भी इस मामले में सुनवाई की थी। उस दौरान समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने ये भी कहा है कि इस मामले में याचिकाओं पर खुले मंच पर सुनवाई नहीं होगी।

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Justice Sanjiv Khanna recuses from considering pleas seeking review to same-sex marriage
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में आज समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता ना देने के खिलाफ दायर की गई याचिका पर समीक्षा होनी है। अब सूत्रों के हवाले से खबर है कि न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने खुद को इस मामले से अलग कर दिया है। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 17 अक्तूबर, वर्ष 2023 को समलैंगिक विवाह को कानूनी तौर पर वैधता देने से इनकार कर दिया था। पांच न्यायाधीशों की पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति हिमा कोहली, न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा भी शामिल थे। अब न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने खुद को इस मामले से अलग कर दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने खुली अदालत में सुनवाई से इनकार किया था
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस मामले की सुनवाई खुली अदालत में नहीं बल्कि अलग चैंबर में होगी। वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी और एनके कौल ने अदालत में इस मामले पर जोर डालते हुए अनुरोध किया था कि मुख्य न्यायाधीश को खुले मंच पर याचिकाओं की समीक्षा करनी चाहिए। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में संविधान पीठ द्वारा समीक्षा की जाएगी और इसे चैंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। पीठ ने कहा कि समलैंगिकों के पास वैधानिक प्रावधानों के तहत विवाह करने का हक है। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की अनुमति सिर्फ कानून के जरिए ही दी जा सकती है और कोर्ट द्वारा विधायी मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। 

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पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी वैधता देने से इनकार किया था
शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष भी इस मामले में सुनवाई की थी। उस दौरान समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के समर्थन में 22 पूर्व जज सामने आए थे। पूर्व न्यायाधीशों का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध में बिल्कुल सही फैसला दिया है।

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