{"_id":"6346163b36a0cf4eb171772e","slug":"justice-dy-chandrachud-gave-verdict-on-matters-like-sabarimala-and-abortion","type":"story","status":"publish","title_hn":"New CJI: मजबूत फैसले जस्टिस चंद्रचूड़ की पहचान, सबरीमाला व गर्भपात पर फैसलों से सामाजिक जड़ता पर किए प्रहार","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
New CJI: मजबूत फैसले जस्टिस चंद्रचूड़ की पहचान, सबरीमाला व गर्भपात पर फैसलों से सामाजिक जड़ता पर किए प्रहार
Wed, 12 Oct 2022 06:49 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 12 Oct 2022 06:49 AM IST
सार
सबरीमाला मामले में फैसला देते हुए धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ ने कहा था कि रिवाजों के संरक्षण और उनके इस्तेमाल ने संविधान की सर्वोच्चता छीन ली है।
विज्ञापन
धनंजय यशवंत चंद्रचूड़
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ कहते हैं कि अदालतों का काम कानूनी जवाबदेही के साथ अत्याचार दूर करना है। उनके फैसले जितने मजबूत और तार्किक होते हैं, उतनी ही बेबाकी के साथ वे असहमति भी जताते हैं। कई फैसलों में पूरी पीठ से अलग राय रखते हुए वे असहमति को लोकतंत्र का सेफ्टी वाल्व करार देते हैं।
विज्ञापन
निष्पक्षता और पारदर्शिता को न्यायिक प्रणाली के लिए अहम मानते हुए वे अपने पिता भूतपूर्व चीफ जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ के व्यभिचार व निजता पर दिए फैसलों को पलट चुके हैं। वहीं, हाल ही में अदालती कार्यवाही के बारे में जानने को नागरिकों का अधिकार बताते हुए अदालत की कार्यवाही का सीधा प्रसारण शुरू किया। व्यभिचार और समलैंगिक संबंधों को गैर-आपराधिक बनाने वाले फैसले देकर उन्होंने यौन व्यवहार को लेकर जारी सामाजिक व व्यवस्थागत रूढ़ीवाद को झकझोरा।
विज्ञापन
समलैंगिक संबंधों को अपराध बताने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा-377 को उन्होंने मैकाले की विरासत बताते हुए कहा था कि अतीत के अन्याय को ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन भविष्य की दिशा तो तय की जा सकती है। वहीं, हदिया मामले में व्यभिचार को गैर-आपराधिक घोषित करते हुए यौन स्वेच्छाचारिता को शादी के तहत महिला की स्वायत्तता का विषय बताया था।
विज्ञापन
सबरीमाला मामले में फैसला देते हुए कहा था कि रिवाजों के संरक्षण और उनके इस्तेमाल ने संविधान की सर्वोच्चता छीन ली है। हाल ही में संविधान पीठ का हिस्सा रहते हुए उन्होंने पीठ से अलग राय रखते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को सार्वजनिक प्राधिकरण बताते हुए इसे सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत उत्तरदायी बताया था। उनकी इस राय के आधार पर ही अदालत में आरटीआई आवेदनों से निपटने के लिए एक ऑनलाइन मंच स्थापित करने की घोषणा की गई।
दिल्ली से एलएलबी हार्वर्ड से एलएलएम
11 नवंबर, 1959 को जन्मे जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की मां प्रभा चंद्रचूड़ शास्त्रीय संगीतकार थीं। उनकी स्कूली शिक्षा मुंबई और दिल्ली में हुई। उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद 1982 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी की। यहां से वे अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पहुंचे, जहां पहले एलएलएम पूरी की और 1986 में जूरिडिकल साइंसेस में पीएचडी की उपाधि हासिल की।