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HC: 'सभी को न्याय दिलाने के लिए कठोर कानून की जरूरत', जस्टिस दत्ता ने बताया न्यायाधिकरणों का महत्व

Sat, 19 Nov 2022 10:51 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 19 Nov 2022 10:51 PM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने कहा कि व्यक्तियों की गरिमा बनाए रखने के लिए और सभी को न्याय देने की हमारी प्रस्तावना के वादे को पूरा करने के लिए हमें सभी स्थितियों से निपटने के लिए कुछ मजबूत कानून की आवश्यकता है। इस दौरान उन्होंने न्यायाधिकरणों का महत्व भी बताया।

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Justice Dipankar Datta says Need robust legislation to tackle all situations to secure justice for citizens
जस्टिस दीपांकर दत्ता। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने शनिवार को सभी नागरिकों के लिए न्याय सुनिश्चित करने और इसके लिए सामने आने सभी स्थितियों से निपटने के लिए एक मजबूत कानून की जरूरत पर जोर दिया। दूरसंचार विवाद निपटान अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीसैट) द्वारा आयोजित एक सेमिनॉर में बोलते हुए कहा कि  नागरिकों को न्याय दिलाने का वादा पूरा करने के लिए हमें बेहतर कानून की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में श्रद्धा वाकर हत्याकांड का भी जिक्र किया। 

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दूरसंचार, प्रसारण और साइबर क्षेत्र के मुद्दे, दृष्टिकोण और आगे की राह में विवाद समाधान तंत्र की भूमिका विषय पर आयोजित सेमिनार में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में किसी की भी सारी जानकारी ज्यादातर मोबाइल फोन में रहती है। जिसे किसी के भी द्वारा और कहीं से भी हैक किया जा सकता है। ऐसे में हमें यह मालूम करने की जरूरत है कि क्या दिल्ली में टीडीसैट की एक प्रमुख पीठ होने के बजाय हम छह अन्य स्थानों पर बैठक कर सकते हैं। साथ ही हमारे पास नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अनुरूप क्षेत्रीय बेंच क्यों नहीं हैं।
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इस दौरान, श्रद्धा वाकर हत्याकांड के अप्रत्यक्ष संदर्भ में बोलते हुए न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि हमने अभी अखबारों में 'मुंबई में प्यार, दिल्ली में आतंक' की कुछ कहानियों के बारे में पढ़ा है। ये अपराध इसलिए किए जा रहे हैं क्योंकि इंटरनेट पर हर तरह की सामग्री तक आसानी से पहुंच है। ऐसे में भारतीय दूरसंचार विधेयक को लेकर भारत सरकार सही दिशा में सोंच रही है। 
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उन्होंने आगे कहा कि व्यक्तियों की गरिमा बनाए रखने के लिए और सभी को न्याय देने की हमारी प्रस्तावना के वादे को पूरा करने के लिए हमें सभी स्थितियों से निपटने के लिए कुछ मजबूत कानून की आवश्यकता है। इस दौरान उन्होंने न्यायाधिकरणों का महत्व भी बताया। न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि न्यायाधिकरणों के गठन में कोई नुकसान नहीं है अगर उन्हें उचित रूप से गठित किया जाता है। साथ ही जिस उद्देश्य के लिए अदालत के विकल्प के रूप में न्यायाधिकरण का गठन किया जाए वह प्राप्त हो जाता है। 

हालांकि टीडीसैट के पास इसके सदस्यों की पूरी संख्या है, यह देश के अन्य न्यायाधिकरणों के लिए सही नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले साल बॉम्बे हाई कोर्ट को यह सुनिश्चित करने के लिए जोर देना पड़ा था कि सभी ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों (डीआरटी) में अध्यक्षों की नियुक्ति हो। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में अब ऐसे मामलों की बाढ़ आ गई है जिन पर न्यायाधिकरणों को विचार करना चाहिए।

आधार कानून में संशोधन करने पर  दिया जोर 
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अभय ओका ने शनिवार को आधार कानून में संशोधन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधार अधिनियम में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि जिन लोगों के पास आधार नहीं है, उन लोगों को राहत दी जा सके और इसे 'नागरिक केंद्रित' बनाया जा सके। उन्होंने ये बातें दूरसंचार विवाद निपटान अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीसैट) द्वारा आयोजित 'दूरसंचार, प्रसारण और साइबर क्षेत्र के मुद्दे, दृष्टिकोण और आगे की राह' में विवाद समाधान तंत्र पर एक संगोष्ठी में बोलते हुए कहीं।  


इस दौरान, न्यायमूर्ति ओका ने शिक्षित वर्ग के बीच "कानूनी साक्षरता" की कमी पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि लोग चुपचाप अन्याय सहते हैं क्योंकि वे समस्याओं के समाधान का लाभ नहीं उठाते हैं। गौरतलब है कि 2019 में, आधार तंत्र से संबंधित अपीलीय क्षेत्राधिकार TDSAT को सौंपा गया था। जस्टिस ओका ने कहा कि आधार अधिनियम, 2016 में नागरिकों द्वारा प्राधिकरण को प्रदान की गई जानकारी की गोपनीयता को सुरक्षित रखने का प्रावधान है।  
 

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