Social Media: जस्टिस चंद्रचूड़ ने ट्विटर जैसे संचार माध्यम अपनाने पर दिया जोर, न्यायमूर्ति ललित ने कही यह बात
सुप्रीम कोर्ट के जज डी वाई चंद्रचूड़ ने संचार के आधुनिक साधनों को अपनाने की बात कही है। साथ ही न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने भी इस अवसर पर बात की। उन्होंने लोगों को कानूनी सहायता प्रदान करने में जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
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सुप्रीम कोर्ट के जज डी वाई चंद्रचूड़ ने संचार के आधुनिक साधनों को अपनाने की वकालत की है। उन्होंने रविवार को कहा कि जनता तक पहुंचने के लिए न्यायपालिका को ट्विटर-फेसबुक जैसे संचार के आधुनिक साधन अपनाने चाहिए। वहीं, प्रथम अखिल भारतीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समापन समारोह में बोलते हुए न्यायमूर्ति यूयू ललित ने कानूनी सेवा संस्थानों को अपने प्रति आम लोगों के बीच विश्वास की कमी को दूर करने पर जोर दिया। इस दौरान न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि पूरी न्यायिक प्रणाली को बाईपास की जरूरत है और पहले चरण में ही मुकदमे को बंद करने का प्रयास होना चाहिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साधनों को अपनाने पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट के जज डी वाई चंद्रचूड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टूल्स का जिक्र करते हुए कहा कि अदालतें संचार के आधुनिक साधनों को अपनाने के प्रति डर रही हैं। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों और न्यायपालिका को अपना डर छोड़ना होगा चाहे वह ट्विटर और टेलीग्राम जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग करने के बारे में हो या कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग करने के बारे में हो।
परिवर्तन का अग्रदूत बनने के लिए संचार के नवीनतम साधन अपनाना जरूरी
एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि इस समय जवाबदेही की दुनिया है और मुझे लगता है कि हम बड़े पैमाने पर समुदाय का सम्मान अर्जित कर सकते हैं बशर्ते हम समाज में प्रचलित मंचों को अपनाएं। उन्होंने आगे कहा कि यदि हमें परिवर्तन का अग्रदूत बनना है तो न्यायिक प्रणाली को भी पीछे नहीं छोड़ा जा सकता है। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रथम अखिल भारतीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समापन समारोह में बोलते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि जब तक हम एक न्यायिक संस्थान के रूप में संचार के इन साधनों को अपनाने के लिए इस प्रतिरोध को नहीं दूर करेंगे तब तक हम परिवर्तन के वाहक नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी ने आज तुरंत संदेश और यूनिडायरेक्शनल संचार के लिए उपकरण दिए हैं जिसके माध्यम से कोई सूचना लोड कर सकता है और सूचना प्रसारित कर सकता है।
न्यायपालिका के कम्प्यूटरीकरण की देखभाल करने वाली सर्वोच्च न्यायालय की ई-समिति के प्रमुख न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि मुझे लगता है कि संचार के साधनों का उपयोग करने के इस प्रतिरोध को बदलना होगा क्योंकि हम भाषा का उपयोग करके अपने नागरिकों तक पहुंच सकते हैं। इस दौरान न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कई तकनीकी हस्तक्षेपों के बारे में भी बात की, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय और न्यायपालिका द्वारा ई-समिति के जरिए अपनाया जा रहा है।
न्यायमूर्ति यू यू ललित ने विश्वास की कमी को दूर करने पर दिया जोर
वहीं, न्यायाधीश न्यायमूर्ति यूयू ललित ने इस मौके पर कहा कि कानूनी सेवा संस्थानों को अपने प्रति आम लोगों के बीच विश्वास की कमी को दूर करना होगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए एक अभिनव कानूनी सहायता बचाव परामर्श प्रणाली तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में काम करने के लिए कानूनी सेवा संस्थानों में अपेक्षित क्षमता है क्योंकि वे कानूनी सहायता सेवाओं के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए देश के 9.5 लाख गांवों तक पहुंच चुके हैं। न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि अगला कदम कानूनी सहायता सेवाओं की गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए कानूनी सहायता देना है। इस दौरान न्यायमूर्ति ललित ने नालसा और कानून मंत्रालय के सहयोगात्मक प्रयास की सराहना की। दोनों टेली-लॉ और न्याय बंधु मोबाइल एप्लिकेशन पर काम करेंगे, जिससे लोगों को मदद मिलेगी।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कही बड़ी बात
सभा को संबोधित करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने सभी से सिस्टम के भीतर उपलब्ध उपकरणों का अपनी क्षमता के सर्वोत्तम उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने डीएलएसए के सदस्यों से लीक से हटकर सोचने की भावना पैदा करने को कहा और कहा कि इसे हितधारकों के बीच सक्रिय बातचीत के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि पूरी न्यायिक प्रणाली को बाईपास की जरूरत है और पहले चरण में ही मुकदमे को बंद करने का प्रयास होना चाहिए।